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यातना के विरुद्ध यू.एन. कन्वेंशन

  • 20 Dec 2019
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध यू.एन. कन्वेंशन

मेन्स के लिये:

‘यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध यू.एन. कन्वेंशन’ एवं मालदीव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह ने ‘यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय एवं अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध यू.एन. कन्वेंशन’ (Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman or Degrading Treatment or Punishment) के अनुच्छेद-22 से संबंधित घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं।

मुख्य बिंदु:

  • मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित इस घोषणा-पत्र के अनुसार, मालदीव सरकार अत्याचार से प्रभावित व्यक्तियों की शिकायतें प्राप्त करने के लिये गठित समिति की दक्षता की पहचान करेगी परंतु यह केवल उन्हीं मामलों में संभव हो सकेगा जब यातना से पीड़ित का मामला मालदीव के अधिकार क्षेत्र में आता हो।
  • मालदीव के राष्ट्रपति ने इस कन्वेंशन के अनुच्छेद-22 से संबंधित घोषणा-पत्र पर नवंबर 2018 में यातना के विरुद्ध बनी समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के निष्कर्षों में दी गई सिफारिशों के आधार पर हस्ताक्षर किये हैं।

यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध यू.एन. कन्वेंशन:

(UN Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman or Degrading Treatment or Punishment):

  • यह यू.एन. कन्वेंशन 10 दिसंबर, 1984 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव द्वारा स्वीकार किया गया तथा हस्ताक्षर, अनुसमर्थन एवं स्थापित करने के लिये प्रस्तावित किया गया।
  • यह कन्वेंशन 26 जून, 1987 को प्रभाव में आया था।
  • यह कन्वेंशन 9 फरवरी, 1975 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा ‘यातना और अन्य क्रूरता, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा से सभी व्यक्तियों के संरक्षण’ विषय पर विचार-विमर्श का परिणाम था।
  • यह कन्वेंशन राज्यों को अपने क्षेत्राधिकार के अंदर किसी भी क्षेत्र में यातना को रोकने के लिये प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता पर बल देता है, साथ ही यह ऐसे लोगों को जिनके संबंध में यह विश्वास है कि जहाँ भी जाएंगे ऐसी ही समस्या उत्पन्न करेंगे, को किसी भी देश में आवागमन के लिये प्रतिबंधित भी करता है।
  • विशेषतः इस कन्वेंशन के अनुच्छेद-55 में मानवाधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रता के सार्वभौमिक सम्मान को बढ़ाने की बात की गई है।

क्या कहता है कन्वेंशन का अनुच्छेद-22?

  • इस अनुच्छेद के अनुसार, इस कन्वेंशन के पक्षकार राज्य यातना से प्रभावित व्यक्तियों की शिकायतें प्राप्त करने के लिये गठित समिति की दक्षता की पहचान करता है परंतु यह केवल उन्हीं मामलों में संभव हो सकेगा जब यातना पीड़ित का मामला उस पक्षकार राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता हो।
  • यदि किसी पक्षकार राज्य द्वारा इस संदर्भ में ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है, तो समिति द्वारा इस संबंध में कोई मामला स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत की स्थिति:

  • भारत ने 14 अक्तूबर, 1997 को इस यू.एन. कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किये थे। हालाँकि भारत द्वारा अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है क्योंकि भारत द्वारा अभी यातना विरोधी कानून नहीं बनाया गया है।
  • भारत विश्व के उन नौ देशों में से एक है, जिन्होंने अभी तक यातना विरोधी कानून नहीं बनाए है, जबकि यह इस अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधि की पुष्टि करने के लिये एक अनिवार्य शर्त है।

स्रोत- द हिंदू

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