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हॉन्गकॉन्ग के निवासियों को ब्रिटिश वीज़ा

  • 03 Feb 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रिटेन ने हॉन्गकॉन्ग के निवासियों को अपने देश में निवास करने और नागरिकता प्रदान करने के लिये एक विशेष प्रकार का वीज़ा शुरू किया है।

  • यह कदम चीन द्वारा हॉन्गकॉन्ग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Law) लागू करने के बाद उठाया गया है। इस सुरक्षा कानून का उद्देश्य भविष्य में हॉन्गकॉन्ग में वर्ष 2019 जैसे लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों को रोकना और हॉन्गकॉन्ग सरकार की शक्तियों को खत्म करना है।
  •  ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन (European Union- EU) का सदस्य रहते हुए वर्ष 2004 में विदेशी श्रमिकों को नागरिकता देने के निर्णय को स्वीकार किया था। इस निर्णय के बाद ब्रिटेन द्वारा विदेशी नागरिकों को स्वीकार करने हेतु यह पहला प्रमुख कदम है, जबकि ब्रिटेन इस समय यूरोपीय यूनियन का सदस्य भी नहीं है।

प्रमुख बिंदु

पृष्ठभूमि:

  • ब्रिटिश सरकार ने हॉन्गकॉन्ग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होने के पूर्व ही जुलाई 2020 से हॉन्गकॉन्ग के लगभग 7,000 लोगों को अपने देश में आने की अनुमति दी थी।
  • इन्हें वीज़ा योजना के माध्यम से नहीं बल्कि सरकार की इजाज़त पर प्रवास करने की अनुमति दी गई थी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जवाब में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा ने हॉन्गकॉन्ग के साथ अपने प्रत्यर्पण संधियों को निलंबित कर दिया है।

विशेष वीज़ा योजना की शर्तें:

  • ब्रिटेन में हॉन्गकॉन्ग के लोगों और उनके आश्रितों को रखने के लिये एक ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज़ वीज़ा (British National Overseas Passport) जारी किया जाएगा।
  • वीज़ा धारक ब्रिटेन में 5 वर्ष तक रह सकते हैं और काम कर सकते हैं। वे ब्रिटेन की नागरिकता के लिये 5 वर्ष बाद आवेदन कर सकते हैं।

इस वीज़ा योजना का कारण (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून):

  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से खतरा: चीन ने हॉन्गकॉन्ग में नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य चीन की मनमानी और आपराधिक गतिविधियों को छुपाना है।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को मूल कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है जो हॉन्गकॉन्ग और बीजिंग के बीच संबंधों को परिभाषित करता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रावधान:
    • इसमें तोड़फोड़, आतंकवाद और विदेशी ताकतों से मिलीभगत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिये अधिकतम सज़ा आजीवन कारावास है।
    • सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को नुकसान पहुँचाने वालों को आतंकवादी घोषित किया जा सकता है।
    • इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने वाले लोगों को सार्वजनिक पदों के लिये अयोग्य करार दिया गया है।
    • चीन, हॉन्गकॉन्ग में एक नए सुरक्षा कार्यालय की स्थापना करेगा। इस कार्यालय का कोई भी कर्मचारी हॉन्गकॉन्ग के स्थानीय प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा।
    • हॉन्गकॉन्ग को चीन द्वारा नियुक्त सलाहकार के साथ कानूनों को लागू करने के लिये अपना राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग स्थापित करना होगा।
      • यह कार्यालय कुछ मामलों पर फैसले हेतु उन्हें चीन भेज सकता है।
    • हॉन्गकॉन्ग के मुख्य कार्यकारी के पास राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की सुनवाई के लिये न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की शक्ति होगी, जिससे हॉन्गकॉन्ग की न्यायिक स्वायत्तता पर खतरा बढ़ेगा।
    • चीन को कानून की व्याख्या करने का भी अधिकार होगा।

ब्रिटेन का पक्ष:

  • यह सुरक्षा कानून चीन-ब्रिटेन के बीच वर्ष 1984 में हुई संधि का गंभीर और स्पष्ट उल्लंघन है।
    • चीन ने इस संधि के तहत वर्ष 1997 से 50 साल की अवधि तक हॉन्गकॉन्ग की नीति, शासन प्रणाली, स्वतंत्र न्यायपालिका और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने का वादा किया था।

चीन का पक्ष:

  • चीन द्वारा ब्रिटेन के इस कदम की आलोचना की गई और कहा गया कि हॉन्गकॉन्ग 24 वर्ष पहले चीन को सौंप दिया गया था।
  • चीन ने कहा कि BN(O) पासपोर्ट उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है, अतः वह इसे मान्यता नहीं देगा।

ब्रिटेन द्वारा चीन को हॉन्गकॉन्ग के प्रशासन का हस्तांतरण 

  • हॉन्गकॉन्ग लगभग एक शताब्दी तक ब्रिटेन का उपनिवेश रहा, जिसे एक लंबी वार्ता द्वारा वर्ष 1997 में चीन को सौंप दिया गया। इसके बाद हॉन्गकॉन्ग, चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों (SAR) में से एक बन गया।
  • इसे ‘बेसिक लॉ’ नामक एक मिनी-संविधान द्वारा शासित किया जाता है, जो कि ‘एक देश, दो प्रणाली’ के सिद्धांत की पुष्टि करता है।
  • ‘बेसिक लॉ’ नाम का यह संवैधानिक दस्तावेज़ 1984 की चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा का ही परिणाम है, जिसके तहत चीन ने 50 वर्ष की अवधि के लिये हॉन्गकॉन्ग की उदार नीतियों, शासन प्रणाली, स्वतंत्र न्यायपालिका और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की व्यवस्था को बनाए रखने का वादा किया था।

आगे की राह

  • वर्तमान वीज़ा प्रणाली हॉन्गकॉन्ग के लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत चीन के गुप्त, तानाशाही और बलपूर्वक किये जाने वाले कार्यों से बचने में सक्षम बनाएगा, हालाँकि हॉन्गकॉन्ग के लोगों के हितों की सुरक्षा के लिये आवश्यक है कि सभी हितधारकों के साथ मध्यस्थता और सुलह के माध्यम से दीर्घकालिक समाधान खोजा जाए।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कारण एक पूर्व एशियाई व्यापारिक केंद्र के रूप में हॉन्गकॉन्ग की स्थिति पर खतरा उत्पन्न हो सकता है, चीन इस कानून के कारण पहले से ही वैश्विक आलोचना का सामना कर रहा है, जिसमें ब्रिटेन द्वारा की गई हालिया कार्यवाही भी शामिल है, इसके अलावा चीन पर कोरोना वायरस से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी को छिपाने का आरोप लगाया जा रहा है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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