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अपहरण रोधी अधिनियम, 2016

  • 14 Jun 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 के तहत एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही उस पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। गौरतलब है कि अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 (The Anti Hijacking Act, 2016) के तहत यह पहली सजा है।

पृष्ठभूमि

  • ध्यातव्य है कि मुंबई के इस व्यक्ति ने 30 अक्तूबर, 2017 को जेट एयरवेज़ की मुंबई-दिल्ली फ्लाइट के दौरान टॉयलेट में अपहरण नोट लिखकर छोड़ा था।
  • इस नोट में लिखा गया था कि विमान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ले जाया जाए। इस हादसे के पश्चात् विमान अपहरण रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अपहरण रोधी अधिनियम, 2016

  • 2016 का यह अधिनियम, अपहरण रोधी अधिनयम 1982 (The Anti Hijacking Act, 1982) को प्रतिस्थापित करता है।
  • इस अधिनियम का उद्देश्य ‘हेग हाइजैकिंग कन्वेंशन’ (Hague Hijacking Convention) और ‘बीजिंग प्रोटोकॉल सप्लीमेंट्री- 2010’ (Beijing Protocol Supplementary-2010) को लागू करना है।
  • यह अधिनियम तब भी लागू होगा जब ऐसी कोई घटना भारत के बाहर घटित हो किंतु विमान भारत में पंजीकृत हो या किसी भारतीय व्यक्ति द्वारा विमान पट्टे पर लिया गया हो या अपराधी अवैध रूप से भारत में रहता हो (जैसे कि कोई अवैध बांग्लादेशी प्रवासी) या भारतीयों को क्षति पहुँचाने का प्रयास किया गया हो।
  • इस नए अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित बदलाव किये गए हैं-
    • विमान अपहरण की गलत सूचना की अपवाह फैलाने पर मृत्युदंड और उम्रकैद
    • विमान ‘In Service’ की व्यापक परिभाषा

विमान अपहरण

  • अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 की धारा 3(1) के तहत हाइजैकिंग के अपराध को परिभाषित किया गया है। इस परिभाषा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बलपूर्वक या किसी अन्य प्रकार की धमकी से या किसी भी तकनीकी माध्यम से किसी सेवारत विमान के नियंत्रण पर कब्ज़ा करता है/संचालन को बाधित करता है तो उसे हाईजैकिंग अपराध माना जाएगा।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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