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टेक-होम राशन

  • 04 Jul 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

नीति आयोग, विश्व खाद्य कार्यक्रम, एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS), टेक होम राशन (THR)

मेन्स के लिये:

समाज के कमज़ोर वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों में टेक होम राशन-गुड प्रेक्टिस (Take Home Ration-Good Practices) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की गई थी।

विश्व खाद्य कार्यक्रम क्या है?

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ:

  • रिपोर्ट राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा टेक होम राशन मूल्य शृंखला के कार्यान्वयन में अपनाई गई अच्छी और नवीन प्रथाओं का एक सेट प्रस्तुत करती है।
  • सरकार ने दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुँचने के लिये इनोवेटिव मॉडल्स को अपनाया।
  • इसने जनभागीदारी और आँगनवाड़ी के स्थानीय नेटवर्क आदि के माध्यम से सरकार द्वारा अपनाए गए सामाजिक एवं व्यावहारिक मानदंडों, उत्पादन, निर्माण, वितरण, लेबलिंग, पैकेजिंग, पर्यवेक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा संशोधन आदि की सराहना की।

टेक होम राशन:

  • भारत सरकार बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं (PLW) के बीच पोषण में अंतर को भरने के लिये एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) के पूरक पोषण घटक के तहत टेक होम राशन प्रदान करती है।
  • यह दो तरह से घर पर उपयोग के लिये फोर्टीफाईड राशन प्रदान करता है:
    • आँगनबाडी केंद्रों पर टेक-होम राशन और गरमा-गर्म भोजन।
    • यह कच्चे माल या पके हुए भोजन के पैकेट के रूप में दिया जाता है।

चुनौतियाँ:

  • वितरण तंत्र में खामियाँ:
    • वितरण प्रणाली में दोषपूर्ण प्रथाओं और भ्रष्टाचार के कारण यह कार्य अत्यंत जटिल है और इसे ब्लैक मार्केट में भेजना आसान है।
  • निम्न गुणवत्ता:
    • खरीद विभाग की लापरवाही के कारण कई बार माल खराब गुणवत्ता का होता है।
    • गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण अक्सर खाद्यान्न की बर्बादी होती थी।
  • पारदर्शिता का अभाव:
    • समग्र वितरण तंत्र में पारदर्शिता का अभाव है क्योंकि यह रसद और उन पर नियंत्रण रखने के लिये शामिल विभिन्न अन्य तंत्रों की निगरानी करने में लगभग असमर्थ है।
  • अप्रभावी कार्यान्वयन:
    • उत्पाद को प्राप्त करने, छाँटने और वितरित करने के लिये पारंपरिक तरीकों का उपयोग प्रणाली को अक्षम बनाता है, जिससे खाद्यान्न की डिलीवरी का प्रभावी रूप से कार्यान्वयन नहीं होता है।

अन्य समान सरकारी योजनाएंँ:

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM):
    • NHM को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (वर्ष 2005 में शुरू) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (वर्ष 2013 में शुरू) को मिलाकर आरंभ किया गया था।
    • इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM-POSHAN):
    • सितंबर 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1.31 ट्रिलियन रुपए के वित्तीय परिव्यय के साथ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराने के लिये प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण या पीएम-पोषण को मंज़ूरी दी।
    • इस योजना ने स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम या मध्याह्न भोजन योजना (Mid-day Meal Scheme) की जगह ले ली।
  • राष्ट्रीय पोषण रणनीति:
    • इस रणनीति का उद्देश्य सबसे कमज़ोर और गंभीर आयु समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 2030 तक सभी प्रकार के कुपोषण को कम करना है।

आगे की राह

  • समय पर पोषण संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने के लिये THR कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ किये जाने की आवश्यकता है।
  • विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आदर्श THR कार्यक्रमों की सर्वोत्तम पद्धतियों तथा विश्लेषणों को सीखने की आवश्यकता है।
  • उत्पादन, वितरण, गुणवत्ता नियंत्रण, निगरानी और प्रौद्योगिकी के उपयोग के मामले में THR के क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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