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भारतीय अर्थव्यवस्था

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में वृद्धि

  • 06 Jun 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, राइट्स इश्यू 

मेन्स के लिये:

पूंजी बाज़ार पर COVID-19 का प्रभाव, विदेशी निवेश से संबंधित प्रश्न  

चर्चा में क्यों? 

जून माह के पहले सप्ताह में ‘इक्विटी बाज़ार’ (Equity Market) में 'विदेशी पोर्टफोलियो निवेश' (Foreign Portfolio Investment- FPI) में भारी वृद्धि देखी गई है। एक ही सप्ताह में FPI के रूप में प्राप्त हुआ यह निवेश वर्ष 2020 में अब तक किसी माह में हुआ सबसे अधिक निवेश है।

प्रमुख बिंदु:

  • जून 2020 के पहले सप्ताह में 5 दिनों के व्यापार के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा लगभग 21,000 करोड़ के शेयर की खरीद की गई है।
  • इससे पहले वर्ष 2020 में सबसे अधिक मई माह में FPI में कुल 14,569 रुपए का निवेश हुआ था।  
  • 'विदेशी पोर्टफोलियो निवेश’ में हुई यह वृद्धि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (Reliance Industries Limited- RIL) द्वारा जारी राइट्स इश्यू (Rights Issue), कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में हिस्सेदारी की बिक्री और वर्तमान महामारी के बीच भी बाज़ार के प्रति लोगों की सकारात्मक सोच में वृद्धि को भी माना जा सकता है।  
    • इस दौरान RIL द्वारा राइट्स इश्यू के माध्यम से 53,124.20 करोड़ रुपए जुटाए गए, जो भारत में राइट्स इश्यू  के तहत प्राप्त हुई सबसे अधिक/बड़ी पूंजी है। 
    • 4 जून को कोटक महिंद्रा बैंक के निदेशक उदय कोटक ने बैंक में 2.8% हिस्सेदारी (लगभग 6,800 करोड़ के शेयर) बेच दी, जो ‘गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन’, ओपेनहाइमर डेवेलपिंग मार्केट फंड और टी.रो प्राइस (T. Rowe Price) जैसे कई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा खरीदे गए।  
  • इस दौरान ऑटोमोबाइल, निजी बैंक (Private Bank) और फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals) जैसे क्षेत्रों के निवेश में वृद्धि देखने को मिली है। 
  • हालाँकि जून माह में FPI में हुई इस वृद्धि के बावजूद भी मार्च और अप्रैल में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाज़ार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकालने के कारण वर्तमान वर्ष में इक्विटी बाज़ार का कुल संचयी विदेशी प्रवाह (Cumulative Foreign Flow) ऋणात्मक (-19,531 करोड़ रुपए) ही बना हुआ है। 
  • गौरतलब है कि COVID-19 महामारी के कारण इक्विटी बाज़ार में मार्च माह में 61,973 करोड़ रुपए और अप्रैल में 6,884 करोड़ रुपए का बहिर्वाह (Outflow) देखा गया था।   

क्या है 'विदेशी पोर्टफोलियो निवेश'

(Foreign Portfolio Investment- FPI)?

  • FPI किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा किसी दूसरे देश की कंपनी में किया गया वह निवेश है,  जिसके तहत वह संबंधित कंपनी के शेयर या बाॅण्ड खरीदता है अथवा उसे ऋण उपलब्ध कराता है। 
  • FPI में निवेशक ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ (Foreign Direct Investment- FDI) के विपरीत कंपनी के प्रबंधन (उत्पादन, विपणन आदि) में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होता है।
  • FPI के तहत निवेशक शेयर के लाभांश या ऋण पर मिलने वाले ब्याज के रूप में लाभ प्राप्त करते हैं।
  • FPI  का विनियमन ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ (Securities and Exchange Board of India-SEBI) द्वारा किया जाता है। 

राइट्स इश्यू (Rights Issue):  

  • राइट्स इश्यू किसी कंपनी द्वारा पूंजी जुटाने का वह माध्यम है, जिसके तहत वह अपने मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी में अतिरिक्त शेयर खरीदने का अधिकार (Right) प्रदान करती है।
  • सामान्यतः राइट्स इश्यू एक शेयर धारक को कंपनी में उसके मौजूदा शेयर के अनुपात में और बाज़ार की तुलना में कम मूल्य पर जारी किये जाते हैं।  
  • मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी द्वारा राइट्स इश्यू के तहत दिये गए शेयरों को  खरीदने की बाध्यता नहीं होती है।  
  • कंपनियों द्वारा ऋण में वृद्धि किये बगैर पूंजी जुटाने के लिये राइट्स इश्यू का प्रयोग किया जाता है।       

स्रोत:  द हिंदू

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