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सामाजिक न्याय

भारत में लापता महिलाओं और बच्चों पर रिपोर्ट

  • 04 Feb 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो

मेन्स के लिये

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी भारत में लापता महिलाओं और बच्चों पर रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau- NCRB) द्वारा ‘भारत में लापता महिलाओं और बच्चों पर रिपोर्ट’ (Report on Missing Women and Children in India) जारी की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • NCRB की इस रिपोर्ट में वर्ष 2016, 2017 और 2018 में जारी ‘भारत में वार्षिक अपराध संबंधी रिपोर्ट’ (Annual Crime in India Report) के आँकड़ों को आधार बनाया गया है।
  • वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने NCRB को लापता व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं और बच्चों) से संबंधित आँकड़ों का विश्लेषण करने का निर्देश दिया था, ताकि इन व्यक्तियों की तस्करी किये जाने वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके।

रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख आँकड़े:

  • देश में लापता होने वाली महिलाओं और बच्चों की सर्वाधिक संख्या के मामले में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं।
  • इन दोनों राज्यों में वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान सभी राज्यों की तुलना में लापता बच्चों और महिलाओं के मामलों की अधिकतम संख्या दर्ज की गई।

महिलाओं से संबंधित आँकड़े:

  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा महिलाएँ लापता हुईं।
  • महाराष्ट्र में वर्ष 2016 में 28,316 महिलाएँ, वर्ष 2017 में 29,279 और 2018 में 33,964 महिलाएँ लापता हुईं।
  • महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में ऐसी घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई, मुंबई में जहाँ वर्ष 2017 और 2018 में क्रमशः 4,718 और 5,201 महिलाएँ लापता हुईं, वहीं पुणे में समान अवधि के दौरान क्रमशः 2,576 और 2,504 महिलाएँ लापता हुईं।
  • पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान लापता महिलाओं की संख्या क्रमशः 24,937, 28,133 और 31,299 थी।
  • मध्य प्रदेश में वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान क्रमशः 21,435, 26,587 और 29,761 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई।

बच्चों से संबंधित आँकड़े:

  • वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान देश भर में क्रमशः 63,407, 63,349 और 67,134 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई।
  • वर्ष 2016, 2017 और 2018 के दौरान सर्वाधिक लापता बच्चों की रिपोर्ट क्रमशः महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के इंदौर में सर्वाधिक लापता बच्चों से संबंधित रिपोर्ट में यह संख्या वर्ष 2017 और 2018 के दौरान क्रमशः 596 और 823 थी।
  • मध्य प्रदेश के ही सतना ज़िले में लापता बच्चों की संख्या वर्ष 2017 के 360 से बढ़कर वर्ष 2018 में 564 हो गई।
  • पश्चिम बंगाल के कोलकाता ज़िले में वर्ष 2018 के दौरान लापता बच्चों की सर्वाधिकसंख्या (989) पाई गई।
  • बांग्लादेश की सीमा से सटे नादिया ज़िले में लापता बच्चों की संख्या वर्ष 2017 के 291 से बढ़कर वर्ष 2018 में 474 हो गई।

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आँकड़े जारी करने का उद्देश्य:

  • NCRB के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ लापता व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं और बच्चों) के पंजीकृत मामले अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक हैं।
  • देश के कुछ हिस्से जिनमें ऐसी घटनाओं की दर उच्च है, ऐसे क्षेत्र बच्चे/महिलाओं की तस्करी (Child/Women Trafficking) के स्रोत या पारगमन गंतव्यों में से एक हो सकते हैं। इन स्थानों के बारे में जानकारी होने से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये किये जाने वाले प्रयासों में वृद्धि होगी।

स्रोत- द हिंदू

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