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भारतीय अर्थव्यवस्था

आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिये प्रोत्साहन पैकेज

  • 12 Aug 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल के दिनों में कई आर्थिक संकेतकों ने यह स्पष्ट किया है कि भारत आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रहा है, और देश की शहरी तथा ग्रामीण मांग में लगातार कमी आ रही है।

  • उदाहरणस्वरूप देश का ऑटोमोबाइल सेक्टर लंबे समय से मांग में गिरावट का सामना कर रहा है और इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियों के जाने का खतरा भी मंडरा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक यदि देश की आर्थिक स्थिति लगातार ऐसी ही बनी रहती है तो इस सेक्टर में तक़रीबन 10 लाख नौकरियों के जाने का खतरा है।
  • इस आर्थिक मंदी से निपटने तथा देश की वृद्धि दर को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार अब प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus Package) लाने पर विचार कर रही है।

इस आर्थिक सुस्ती के क्या कारण हैं?

  • इक्विटी बाज़ारों और बैंकिंग क्षेत्र में नीति संबंधी अनिश्चिताओं तथा गलत धारणाओं के कारण निवेश पूर्णतः रुक गया है और पहले से निवेशित राशि बाज़ार से बाहर निकाली जा रही है।
  • वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव (अमेरिका-चीन का व्यापार युद्ध) बढ़ने के कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों में और अधिक कमी आने तथा मंदी के तेज़ होने की संभावनाएँ हैं।
  • इस कमज़ोर आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए उद्योग क्षेत्र ने वैश्विक और घरेलू मंदी के बीच निवेश चक्र शुरू करने के लिये 1 ट्रिलियन रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है।
  • सरकार ने भी इस बात को महसूस किया है कि कठोर राजकोषीय नीति देश के आर्थिक विकास के लिये चिंता का विषय बनी हुई है और अकेले मौद्रिक नीति आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिये पर्याप्त नहीं है।
    • इसलिये सरकार ने कर में कटौती सहित कई अन्य ऐसे कदम उठाए हैं जो देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में मददगार हो सकते हैं।

आर्थिक सुस्ती से निपटने हेतु प्रयास :

  • इस संदर्भ में सरकार द्वारा निम्नलिखित उपाय किये जा रहा है :
    • उद्योगों को दिये जा रहे प्रोत्साहन पैकेज में अगले पॉंच वर्षों में 100 ट्रिलियन का इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश शामिल होगा।
    • ऑटोमोबाइल सेक्टर सहित कई विशिष्ट क्षेत्रों को GST में राहत प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है ताकि इन क्षेत्रों में मांग को और अधिक बढ़ाया जा सके।
    • सीमा पार से होने वाले व्यापार पर लालफीताशाही की प्रवृत्ति को दूर करने और कारोबार के लिये उचित माहौल तैयार करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

Reversing The slowdown

महत्त्व :

  • इससे पहले राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (Fiscal Responsibility and Budget Management Act-FRBM Act) ने सरकार को राजकोषीय नीति को आगे बढ़ाने से रोक रखा था।
  • परंतु अब सरकार इस अधिनियम के बचाव खंड (Escape Clause) का सहारा लेते हुए राजकोषीय घाटे को 50 बेसिस पॉइंट तक विचलित करने पर विचार कर रही है।
    • यह सरकार को एक वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त 1.15 ट्रिलियन खर्च करने का अधिकार दे सकता है।
  • बचाव खंड (Escape Clause) : एन.के. सिंह की अध्यक्षता में गठित FRBM Act की समीक्षा समिति ने बचाव खंड (Escape Clause) का सुझाव दिया था, यह खंड सकल घरेलू उत्पाद के 0.5 प्रतिशत पॉइंट तक विचलन की अनुमति देता है।

स्रोत: लाइव मिंट

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