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विश्व जनसंख्या- 2019: UNFPA

  • 12 Apr 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund-UNFPA) द्वारा जारी स्टेट ऑफ़ वर्ल्ड पॉपुलेशन-2019 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 और 2019 के बीच भारत की आबादी औसतन 1.2 प्रतिशत बढ़ी है, जो चीन की वार्षिक वृद्धि दर के दोगुने से अधिक है।

  • यह रिपोर्ट प्रजनन क्षमता के स्तर को कम करने में देशों की सहायता करने हेतु स्थापित UNFPA की 50वीं वर्षगाँठ को भी इंगित करती है।
  • यह रिपोर्ट वर्ष 1994 में हुए जनसंख्या और विकास पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICPD) के 25 वर्षों को भी चिह्नित करती है, जहाँ 179 देशों की सरकारों ने जनसंख्या वृद्धि को संबोधित करने हेतु यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर सहमत व्यक्त की थी।
  • यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में लैंगिकता (यौनिकता) से संबंधित केवल रोग, प्रक्रिया का सुचारू रूप से कार्य न करना या दुर्बलता (विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार) का अभाव ही शामिल नहीं है, अपितु इसमें शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को भी शामिल किया जाता हैं।

प्रमुख बिंदु

  • वैश्विक जनसंख्या 72 वर्ष की औसत जीवन प्रत्याशा के साथ वर्ष 2018 के 7.633 बिलियन से बढ़कर वर्ष 2019 में 7.715 बिलियन हो गई।
  • सबसे कम विकसित देशों में सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई, अफ्रीकी देशों में एक वर्ष में औसतन 2.7% वृद्धि दर्ज की गई।
  • वर्ष 2050 तक वैश्विक आबादी में होने वाली समग्र वृद्धि में सर्वाधिक भागीदारी उच्च प्रजननशीलता वाले अफ्रीकी देशों में अथवा बड़ी आबादी वाले देशों जैसे- नाइज़ीरिया एवं भारत में होने का अनुमान है।
  • वर्ष 2010 और 2019 के बीच भारत की जनसंख्या में 1.2% प्रति वर्ष की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में वैश्विक वृद्धि का औसत 1.1% प्रति वर्ष रहा है।
  • देश के 24 राज्यों में रहने वाली भारत की लगभग आधी आबादी में प्रति महिला 2.1 बच्चों की प्रतिस्थापन प्रजनन दर है, जनसंख्या वृद्धि पर रोकथाम लगाने पर वांछित परिवार का आकार यह होगा।

♦ प्रतिस्थापन स्तर, यह एक ऐसी अवस्था होती है जब जितने बूढ़े लोग मरते हैं उनका खाली स्थान भरने के लिये उतने ही नए बच्चे पैदा हो जाते हैं। कभी-कभी कुछ समाजों को ऋणात्मक संवृद्धि दर की स्थिति से भी गुजरना होता है अर्थात् उनका प्रजनन शक्ति स्तर प्रतिस्थापन दर से नीचा रहता है। आज विश्व में कई ऐसे देश और क्षेत्र हैं जहाँ ऐसी स्थिति है जैसे, जापान, रूस, इटली एवं पूर्वी यूरोप। दूसरी ओर, कुछ समाजों में जनसंख्या संवृद्धि दर बहुत ऊँची हो जाती है विशेष रूप से उस स्थिति में, जब वे जनसांख्यिकीय संक्रमण से गुजर रहे होते हैं।
♦ यह दर अधिकतर देशों में प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चे है, हालाँकि यह मृत्यु दर के साथ भिन्न हो सकती है।
♦ भारत में, प्रति महिला कुल प्रजनन दर वर्ष 1969 के 5.6 से घटकर वर्ष 1994 में 3.7 और वर्ष 2019 में 2.3 हो गई हैं।

  • वर्ष 2019 तक, भारत की जनसंख्या 1.36 बिलियन तक होने की संभावना है जो वर्ष 1994 में 942.2 मिलियन तथा वर्ष 1969 में 541.5 मिलियन थी।
  • रिपोर्ट के अनुसारर, भारत की 27% जनसंख्या 0-14 वर्ष और 10-24 वर्ष की आयु वर्ग में, जबकि देश की 67% जनसंख्या 15-64 आयु वर्ग में दर्ज की गई। देश की 6% जनसंख्या 65 वर्ष और उससे अधिक आयु की है।
  • भारत ने जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में सुधार दर्ज किया है। वर्ष 1969 में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 47 वर्ष थी, जो वर्ष 1994 में 60 वर्ष और वर्ष 2019 में बढ़कर 69 वर्ष हो गई है।
  • संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की विश्व जनसंख्या 2019 रिपोर्ट के हिस्से के रूप में पहली बार 15-49 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के परिणाम भी प्रकाशित किये गए। इसमें तीन प्रमुख क्षेत्रों में निर्णय लेने की महिलाओं की क्षमता पर आँकड़ें शामिल किये गए है:

♦ अपने साथी के साथ संभोग करने की क्षमता,
♦ गर्भनिरोधक का उपयोग करना,
♦ स्वास्थ्य देखभाल।

  • रिपोर्ट में शामिल विश्लेषण के अनुसार, प्रजनन और यौन अधिकारों की अनुपस्थिति का महिलाओं की शिक्षा, आय एवं सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे वे अपना स्वयं का भविष्य निर्माण करने में असमर्थ हो जाती है।
  • जल्दी विवाह हो जाना भी महिला सशक्तीकरण और बेहतर प्रजनन अधिकारों के संबंध में एक बाधा बना हुआ है।
  • इस रिपोर्ट में महिलाओं और लड़कियों के संघर्ष एवं जलवायु आपदाओं के कारण होने वाली आपात स्थितियों से उत्पन्न प्रजनन अधिकारों के खतरे पर भी प्रकाश डाला गया है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष
United Nations Population Fund

  • UNFPA संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है।
  • इसे वर्ष 1967 में ट्रस्ट फंड के रूप में स्थापित किया गया था, इसका परिचालन वर्ष 1969 में शुरू हुआ।
  • वर्ष 1987 में इसे आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष नाम दिया गया।
  • हालाँकि, इसका संक्षिप्त नाम UNFPA (जनसंख्या गतिविधियों के लिये संयुक्त राष्ट्र कोष) को भी बरकरार रखा गया।
  • UNFPA का जनादेश संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council- ECOSOC) द्वारा स्थापित किया गया है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक अंग है।
  • UNFPA पूरी तरह से अनुदान देने वाली सरकारों, अंतर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्रों, संस्थानों और व्यैक्तिक स्वैच्छिक योगदान द्वारा समर्थित है, न कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट द्वारा।
  • UNFPA प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य पर सतत् विकास लक्ष्य नंबर 3, शिक्षा पर लक्ष्य 4 और लिंग समानता पर लक्ष्य 5 के संबंध में कार्य करता है।

स्रोत- UNFPA: आधिकारिक वेबसाइट

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