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भारत-श्रीलंका संयुक्त उद्यम को विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतज़ार

  • 20 Jul 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

भारत-श्रीलंका के बीच प्रस्तावित संयुक्त उद्यम को अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचाने के लिये श्रीलंकाई सरकार द्वारा विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है। संभव है कि विशेषज्ञों की राय के उपरांत श्रीलंकाई सरकार द्वारा इस संयुक्त परियोजना को अनुमति दे दी जाएगी। 

प्रमुख बिंदु:

  • श्रीलंका सरकार दक्षिणी प्रांत में स्थित हानि में चल रहे मत्ताला हवाई अड्डे के परिचालन हेतु भारत के साथ अपने संयुक्त उद्यम को अंतिम रूप देने के लिये विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और श्रीलंका की विमानपत्तन और विमानन सेवाओं के बीच प्रस्तावित संयुक्त उद्यम के अनुसार, एयरपोर्ट का पुनर्निर्माण करने और संचालन के लिये भारत की हिस्सेदारी 70% होगी और इसे 225 मिलियन डॉलर खर्च करना होगा जबकि श्रीलंकाई पक्ष शेष राशि का निवेश करेगी।
  • समझौते के मसौदे के अनुसार, यह सुधार कोलंबो में तीन वार्ताओं के बाद हुआ है। अब भारत 40 साल के पट्टे पर हवाई अड्डे का संचालन करेगा।
  • नागरिक उड्डयन मंत्री निमल सिरीपाल डी सिल्वा ने हाल ही में संसद को बताया कि हमें इस मृतप्राय हवाई अड्डे को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत है, जिसके कारण 20 अरब रुपए का भारी नुकसान हुआ है।
  • इस मुकाम तक पहुँच पाना किसी भी दृष्टिकोण से आसन नहीं था, जबकि विपक्षी और पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे द्वारा संयुक्त रूप से इस समझौते का विरोध किया जा रहा था। 
  • वर्तमान में यह हवाई अड्डा घाटे में चल रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे “विश्व का सबसे खाली हवाई अड्डा” (world’s emptiest airport) का दर्जा दिया जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि संयुक्त उद्यम कई प्रकार के विकल्पों की तलाश करेगा जैसे- उड़ान स्कूल की स्थापना, प्रशिक्षण अकादमियों का संचालन, वायुयान यातायात को वाणिज्यिक दृष्टिकोण से सुगम बनाना।
  • वर्तमान परिचालन लागत श्रीलंकाई रुपए में 250 मिलियन (लगभग $ 1.56 मिलियन) प्रतिमाह है, बिना किसी उड़ान के यह हवाई अड्डा वाणिज्यिक दृष्टिकोण से एक कमज़ोर तर्क प्रस्तुत करता है।
  • उल्लेखनीय है कि इन सभी शर्तों के साथ ही हम्बनटोटा जो यहाँ से 30 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है और जहाँ चीन ने बंदरगाह के निर्माण में 70% का योगदान दिया है, को 99 वर्ष के पट्टे पर दिया गया है। ऐसे में यह भारत के सामरिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • अपनी महत्त्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड पहल के हिस्से के रूप में चीन द्वीप के दक्षिणी सिरे में भारी निवेश कर रहा है।
  • इस दौरान राजपक्षे खेमा जो राजनीतिक वापसी की कोशिश कर रहा है और पिछले कुछ महीनों में भारत की जानी-मानी सामरिक चिंताओं ने विपक्ष को बढ़ावा दिया है।
  • गौरतलब है कि भारत केवल हवाई अड्डे के वाणिज्यिक पहलुओं का प्रभार लेना चाहता है। वह सुरक्षा मामलों में श्रीलंका की ज़िम्मेदारी की पूरी तरह से सराहना करता है और इसमें किसी भी भूमिका की मांग नहीं करता है।
  • श्रीलंका सरकार के सूत्रों के मुताबिक, कोलंबो ने मत्ताला हवाई अड्डे को चलाने की योजना बनाने के संबंध में नई दिल्ली से विस्तृत कार्य-योजना मांगी है। नई दिल्ली भी समझौते को मज़बूत करने का इच्छुक है। द्वीप की हाल की यात्रा के दौरान विदेश सचिव विजय गोखले ने श्रीलंकाई अधिकारियों से मत्ताला हवाई अड्डे सहित भारत समर्थित परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिये आग्रह किया है।
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