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स्क्वायर किलोमीटर एरे टेलीस्कोप

  • 08 Feb 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

स्क्वायर किलोमीटर एरे ऑब्ज़र्वेटरी (Square Kilometre Array Observatory- SKAO) परिषद ने अपनी हालिया बैठक के दौरान विश्व के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप/दूरबीन (Radio Telescope) की स्थापना के लिये मंज़ूरी दी। 

  • पिछले वर्ष दिसंबर में प्यूर्टो रिको में स्थित विश्व की सर्वाधिक प्रचलित रेडियो दूरबीन अरेसिबो ( Arecibo) के नष्ट होने या गिरने के बाद इस नए उद्यम/कार्य को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • SKAO एक नया अंतर-सरकारी संगठन है जो रेडियो खगोल विज्ञान (Radio Astronomy) को समर्पित है, इसका मुख्यालय ब्रिटेन में है।
    • वर्तमान में SKAO में दस देशों के संगठन शामिल हैं।
    • इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, भारत, इटली, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, नीदरलैंड और यू.के. शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु:

रेडियो टेलीस्कोप:

  • रेडियो टेलीस्कोप एक खगोलीय उपकरण है जिसमें एक रेडियो रिसीवर और एंटीना प्रणाली शामिल होती है जिसका उपयोग लगभग 10 मीटर (30 मेगाहर्ट्ज़) के तरंगदैर्ध्य और 1 मिमी. (300 गीगाहर्ट्ज़ के मध्य रेडियो-आवृत्ति विकिरण का पता लगाने हेतु किया जाता है। जैसे-तारे (Stars), आकाशगंगा (Galaxies) और क्वासर (Quasars)।
  • ऑप्टिकल टेलीस्कोप (Optical Telescopes) के विपरीत रेडियो टेलीस्कोप अदृश्य गैस का पता लगाने में भी सक्षम है, इसलिये यह अंतरिक्ष के उन क्षेत्रों को भी दिखा सकता है जो ब्रह्मांडीय धूल (Cosmic Dust) के कारण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।
    • ब्रह्मांडीय धूल तारों के बीच की जगह में चारों ओर तैरने वाले ठोस पदार्थ के छोटे कण होते हैं।
  • चूंँकि 1930 के दशक में पहले रेडियो संकेतों का पता चला था, इसलिये खगोलविदों द्वारा ब्रह्मांड में विभिन्न वस्तुओं द्वारा उत्सर्जित रेडियो तरंगों का पता लगाने के लिये रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग किया गया है।
  • राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (National Aeronautics and Space Administration- NASA) के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र का विकास हुआ जो खगोलीय अवलोकन हेतु सबसे महत्त्वपूर्ण  उपकरणों में से एक बन गया।

अरेसिबो टेलीस्कोप:

  • प्यूर्टो रिको में स्थित अरेसिबो  टेलीस्कोप, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सिंगल-डिश रेडियो टेलीस्कोप (Single-Dish Radio Telescope) था जो दिसंबर 2020 में गिर गया।
    • चीन की स्काई आई (Sky Eye) में  विश्व की सबसे बड़ी सिंगल डिश रेडियो टेलीस्कोप स्थित है।
  • इसका निर्माण वर्ष 1963 में हुआ था।
  • अपने शक्तिशाली रडार प्रणाली की वजह से इस टेलीस्कोप को वैज्ञानिकों ने ग्रहों, क्षुद्रग्रहों और आयनमंडल के निरीक्षण के लिये स्थापित किया जिसने कई दशकों तक महत्त्वपूर्ण खोज़ की है, इसमें दूर स्थित आकाशगंगाओं में प्रीबायोटिक अणु, पहला एक्सोप्लैनेट और पहला-मिलीसेकंड पल्सर से संबंधित खोज शामिल है।

स्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA) टेलीस्कोप:

  • स्थिति:
    • यह विश्व के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप का प्रस्ताव है, जो अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में स्थित होगा।
  • विकास:
    • SKA का विकास ‘ऑस्ट्रेलियाई स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर’ (Australian Square Kilometre Array Pathfinder- ASKAP) नामक शक्तिशाली दूरबीन द्वारा किये गए विभिन्न सर्वेक्षणों से प्राप्त परिणामों का उपयोग कर किया जाना है। 
    • ASKAP, ऑस्ट्रेलिया की विज्ञान एजेंसी ‘राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन’ (Commonwealth Scientific and Industrial Research Organisation- CSIRO) द्वारा विकसित और संचालित है।
      • ASKAP टेलीस्कोप, फरवरी 2019 से पूरी तरह से चालू हो गया है।
      • जिसने पिछले साल के अंत में किये गए अपने पहले आकाशीय सर्वेक्षण के दौरान 300 घंटे में रिकॉर्ड तीन मिलियन से अधिक आकाशगंगाओं का मानचित्रण का कार्य किया था।
      • ASKAP सर्वेक्षण को ब्रह्मांडीय संरचना और उसके विकास के मानचित्रण के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो कि आकाशगंगाओं और उनमें विद्यमान हाइड्रोजन गैस का निरीक्षण करता है ।
  • रखरखाव:
    • इसके संचालन, रखरखाव और निर्माण कार्य की देख-रेख SKAO द्वारा की जाएगी।
  • लागत और पूर्णता:
    • इसको पूरा करने में लगभग 1.8 बिलियन पाउंड की लागत तथा एक दशक का समय लगने की संभावना है।
  • महत्त्व:
    • कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका समाधान वैज्ञानिकों द्वारा इस दूरबीन के उपयोग से किये जाने की उम्मीद है।
      • ब्रह्मांड की शुरुआत।
      • पहले तारे का जन्म कैसे और कब हुआ।
      • आकाशगंगा का जीवन-चक्र।
      • हमारी आकाशगंगा में तकनीकी रूप से सक्रिय अन्य सभ्यताओं का पता लगाने की संभावना तलाशना।
      • यह समझना कि गुरुत्वाकर्षण तरंगें (Gravitational Waves) कहाँ से आती हैं।
  • कार्य:
    • नासा के अनुसार, यह टेलीस्कोप ब्रह्मांडीय समय के अनुसार हाइड्रोजन की  तटस्थता को  माप कर आकाशगंगा  में पल्सर से प्राप्त संकेतों की समय पर माप और लाखों आकाशगंगाओं का पता लगाकर उच्च रेडशिफ्ट्स द्वारा अपने वैज्ञानिक लक्ष्यों को पूरा करेगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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