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सामाजिक न्याय

सोशल प्रोटेक्शन फॉर चिल्ड्रेन: ILO-UNICEF

  • 06 Mar 2023
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सोशल प्रोटेक्शन फॉर चिल्ड्रेन, ILO, UNICEF, कोविड-19, गरीबी, SDG, बच्चों के लिये PM CARES।

मेन्स के लिये:

सोशल प्रोटेक्शन फॉर चिल्ड्रेन: ILO-UNICEF।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization- ILO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children's Fund- UNICEF) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक है- “More than a billion reasons: The urgent need to build universal social protection for children”, जिसके अनुसार, 4 में से सिर्फ 1 बच्चा सामाजिक सुरक्षा द्वारा परिरक्षित है, जबकि शेष अन्य बच्चे गरीबी, बहिष्करण और बहुआयामी अभाव के शिकार हो जाते हैं।

सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता:

  • सामाजिक सुरक्षा एक सार्वभौमिक मानव अधिकार है और गरीबी से मुक्त दुनिया हेतु एक पूर्व शर्त है।
  • यह दुनिया के सबसे कमज़ोर बच्चों को क्षमता प्राप्त करने में मदद देने का एक महत्त्वपूर्ण आधार भी है।
  • सामाजिक सुरक्षा भोजन, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच बढ़ाने में मदद करती है।
  • यह बाल श्रम और बाल विवाह को रोकने में भी मदद कर सकती है एवं लैंगिक असमानता तथा बहिष्कार में अंतर्निहित कारणों को भी दूर कर सकती है।
  • यह घरेलू आजीविका का समर्थन करते हुए तनाव और यहाँ तक कि घरेलू हिंसा को भी कम कर सकती है।
  • यह आर्थिक गरीबी को खत्म कर उस कलंक और बहिष्करण को भी कम कर सकती है जिसका सामना कई गरीब बच्चे करते हैं, साथ ही बचपन में महसूस की गई वंचना को "कम-से-कम" करने में मदद कर सकती है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष:

  • समग्र परिदृश्य:
    • 0-18 वर्ष की आयु के 1.77 बिलियन बच्चों के लिये पारिवारिक नकद लाभ उपलब्ध नहीं है जो सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का एक मौलिक स्तंभ है।
    • वयस्कों की तुलना में बच्चों के अत्यधिक गरीबी में रहने की संभावना दोगुनी होती है।
      • लगभग 800 मिलियन बच्चे 3.20 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं और 1 बिलियन बच्चे बहु-आयामी गरीबी का सामना कर रहे हैं।
      • 0-15 वर्ष की आयु के केवल 26.4% बच्चों को सामाजिक सुरक्षा द्वारा परिरक्षित किया जा सका है, शेष 73.6% बच्चे गरीबी, बहिष्करण (Exclusion) एवं बहुआयामी अभावों में जी रहे हैं।
      • विश्व स्तर पर सभी 2.4 बिलियन बच्चों को स्वस्थ और खुश रहने के लिये सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
  • सामाजिक सुरक्षा कवरेज:
    • वर्ष 2016 से 2020 के मध्य विश्व के हर क्षेत्र में बाल और परिवार सामाजिक सुरक्षा कवरेज दर गिर गई या फिर स्थिर हो गई, जिससे कोई भी देश वर्ष 2030 तक पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा कवरेज के तहत सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सकता।
      • लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों में कवरेज लगभग 51% से घट कर 42% हो गया है।
      • कई अन्य क्षेत्रों में कवरेज या तो स्थिर है या इसमें कमी आई है।
  • प्रभाव:
    • अत्यधिक संकट के कारण बड़ी संख्या में बच्चों के गरीबी में होने की आशंका है, जिस वजह से सामाजिक सुरक्षा उपायों में तत्काल वृद्धि किये जाने की आवश्यकता होगी।
    • बच्चों के लिये सामाजिक सुरक्षा की कमी के तत्काल और दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं, इससे बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसे अधिकारों के उल्लंघन की व्यापकता बढ़ जाती है, जिससे बच्चों की आकांक्षाओं तथा अवसरों में भी कमी आती है।
    • इसके अतिरिक्त इस अवास्तविक मानव क्षमता का सामान्य रूप से समुदाय, समाज और अर्थव्यवस्था पर अपरिहार्य प्रतिकूल तथा दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
  • सामजिक सुरक्षा का महत्त्व:
    • कोविड-19 महामारी से पूर्व वयस्कों की तुलना में बच्चों के अत्यधिक गरीबी में रहने की संभावना दोगुनी से अधिक थी।
    • एक अरब बच्चे गरीबी के कई रूपों का अनुभव करते हैं जिनकी भोजन, पानी, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, स्कूली शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं तक पहुँच की कमी है।
    • कोविड-19 महामारी ने संकट के समय में सामाजिक सुरक्षा के महत्त्व को प्रदर्शित किया।
    • विश्व की लगभग प्रत्येक सरकार ने बच्चों और परिवारों की मदद करने के लिए या तो मौजूदा कार्यक्रमों का तेज़ी से अनुकूलन किया या नई सामाजिक सुरक्षा पहल की शुरुआत की।
      • अनाथों तथा बच्चों की बाल सहायता अनुदान (सीएसजी) राशि बढ़ाने के लिये दक्षिण अफ्रीका ने वर्ष 2022 में एक कल्याणकारी योजना बाल सहायता अनुदान (सीएसजी) टॉप-अप कार्यक्रम की शुरुआत की।
      • राष्ट्रीय "पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन" योजना 10,793 पूर्ण अनाथों और 151,322 अर्द्ध-अनाथों के लिये उपायों का पैकेज है, जिसे 31 भारतीय राज्यों में अधिनियमित किया गया था। अब तक 4,302 बच्चे इस कार्यक्रम से लाभान्वित हुए हैं।

सुझाव:

  • सभी बच्चों के लिये सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की दिशा में कार्रवाई करना नीति निर्माताओं हेतु सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये, जिन्हें उन कार्यक्रमों में भी शामिल किया जाना चाहिये जो बाल गरीबी की समस्या के समाधान की गारंटी प्रदान करते हैं।
  • अधिकारियों को राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से बाल लाभ प्रदान करने की भी सलाह दी जाती है जो परिवारों को महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं से जोड़ती हैं, जैसे गुणवत्ता वाली मुफ्त या सस्ती बाल-देखभाल।
  • घरेलू संसाधनों को जुटाकर बच्चों के लिये बजट आवंटन बढ़ाकर, माता-पिता एवं अभिभावकों हेतु सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करके और अच्छे काम एवं पर्याप्त कर्मचारी लाभ की गारंटी देकर योजनाओं के लिये स्थायी वित्तपोषण हासिल करने की आवश्यकता है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न.अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सम्मलेन 138 और 182 (2018) से संबंधित हैं:

(a) बाल श्रम
(b) वैश्विक जलवायु परिवर्तन के लिये कृषि प्रथाओं की अनुकूलता
(c) खाद्य कीमतों और खाद्य सुरक्षा का विनियमन
(d) कार्यस्थल पर लिंग समानता

उत्तर: (a)

स्रोत : डाउन टू अर्थ

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