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आंतरिक सुरक्षा

सीमाओं के लिये स्मार्ट वॉल

  • 06 Feb 2021
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिका-मैक्सिको (USA-Mexico Border) सीमा पर भौतिक और सशस्त्र गश्त के विकल्प के तौर पर उन्नत निगरानी तकनीक वाली एक वैकल्पिक स्मार्ट वॉल (alternative Smart Wall) के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।

  • इससे पूर्व वर्ष 2019 में अमेरिका ने मैक्सिको से ड्रग्स और अपराधियों के "आक्रमण" का हवाला देते हुए अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर एक दीवार (बॉर्डर वॉल) का निर्माण करने के लिये राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।

Mexico

प्रमुख बिंदु

स्मार्ट वॉल के बारे में:

  • स्मार्ट वॉल की कोई एक निश्चित परिभाषा नहीं है। यह  अलग-अलग प्रौद्योगिकियों का संग्रह है जो अवैध प्रवेश, तस्करी और एक भेद्य सीमा पर उत्पन्न सभी प्रकार के खतरों को रोकने के लिये कार्य करती है।
  • स्मार्ट वॉल तकनीक में ड्रोन, स्कैनर और सेंसर आदि के उपयोग से ऐसा तकनीकी अवरोध उत्पन्न जाएगा जिसकी सुरक्षा को तोड़ना अपेक्षाकृत काफी मुश्किल होगा।
    • इन-ग्राउंड सेंसर, सुरक्षा कैमरे और सॉफ्टवेयर जैसी इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (Internet-of-Things- IoT) तकनीकों का उपयोग करते हुए तैयार की गई स्मार्ट वॉल अवैध गतिविधियों को रोकने में सहायक होगी जो स्थितिजन्य जागरूकता के साथ सीमा अधिकारियों को सशक्त बनाएगी।

स्मार्ट वॉल के लाभ:

  • कम लागत :
    • एक स्मार्ट वॉल की लागत भौतिक रूप से निर्मित दीवार से काफी कम होती है।
  • परिनियोजन के समय में कमी: 
    • भौतिक सीमाओं (Physical Boundaries) को बनाने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन स्मार्ट बॉर्डर तकनीक को शीघ्रता से लागू किया जा सकता है।
  •  रख-रखाव की कम लागत:
    • भौतिक रूप से निर्मित दीवार के विपरीत स्मार्ट वॉल सीमा सुरक्षा अधिकारियों को बदलती परिस्थितियों हेतु रणनीति को लगातार समायोजित करने सक्षम बनाती है।
    • यह वॉल ग्राउंड सेंसर और IoT डिवाइस को स्थानांतरित एवं अद्यतन करने में  त्वरित और आसान है।
    • स्मार्ट वॉल के निर्माण में आने वाली लागत भौतिक रूप से निर्मित दीवार का केवल एक हिस्सा होती है जिसे धीरे-धीरे और आवश्यकतानुसार उपयोग किया जा सकता है।
  • पर्यावरणीय चिंताओं में कमी:
    • एक स्मार्ट दीवार पर्यावरणीय चिंताओं को कम  करती है, जिसे वन्यजीव और वर्षा जल क्षेत्र के माध्यम से स्वतंत्र रूप से निर्मित किया जा सकता है।
    • स्मार्ट वॉल में लगे अधिकांश डिवाइस लोगों और जानवरों के मध्य अंतर बता सकते हैं, ये अधिकारियों को उस समय सतर्क करते है जब मनुष्य वन्यजीवों के साथ अवैध रूप से सीमा पार करने का प्रयास करता है।
  • विशाल भूभाग की निगरानी:
    • दीवार के कुछ हिस्सों के टूटने के कारण किसी भी इलाके में गश्त करना मुश्किल होता है।
    • हालाँकि डिजिटल तकनीक विशाल भू-भाग में निगरानी  करने में सक्षम है।
      • कैमरे और इन-ग्राउंड सेंसर जैसे उपकरण एक साथ सैकड़ों मील की दूरी तक निगरानी करने में सक्षम होते हैं जिससे आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।
      • रियल टाइम अलर्ट (Real-Time Alerts) सीमा पर पहुँचने वाले प्रवासियों और मार्ग भटक जाने वाले यात्रियों की गतिविधियों की सूचना देने की प्रक्रिया को आसान कर सकता है। 
  • भूमि आवश्यकता को कम करना:
    • सीमा पार दीवार बनाने के लिये सरकार को स्थानीय भूस्वामियों से संपत्ति ज़ब्त करने की आवश्यकता होगी। वहीँ छोटे और अपेक्षाकृत गैर-आक्रामक, स्मार्ट वॉल प्रौद्योगिकियों के लिये  बहुत कम भूमि ज़ब्ती की आवश्यकता होगी।

US-Border

भारत में स्मार्ट वॉल की ज़रूरत:

  • भारतीय सीमाओं का अधिकांश क्षेत्र बीहड़ है और स्पष्ट रूप से परिभाषित भी नहीं है। यह एक महत्त्वपूर्ण कारक है जिसे भारतीय सीमाओं के साथ इस तरह की प्रणाली के उपयोग करने पर विचार किया जाना चाहिये।
  • यह प्रणाली भले ही भारत की लंबी सीमाओं के लिये संभव न हो, फिर भी इसे देश के उन महत्त्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों में तैनात किया जा सकता है जहाँ पहले से ही भौतिक बाड़ (Physical Fencing) और दीवार पूरक के रूप में मौजूद हैं।
  • इस प्रणाली से भारतीय सशस्त्र बलों का अच्छी तरह से सुसज्जित किया जाना चाहिये ताकि इस नवीनतम तकनीकी का लाभ शत्रु देशों के  खिलाफ लिया जा सके।
  • सीमा पार घुसपैठ की समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिये विशेषज्ञों को  स्मार्ट वॉल के विचार पर अन्वेषण करना चाहिये।

भारत में स्मार्ट फेंसिंग:

  • भारत-पाकिस्तान सीमा (10 किलोमीटर) और भारत-बांग्लादेश सीमा (61 किलोमीटर) पर व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (Comprehensive Integrated Border Management System- CIBMS) के तहत 71 किलोमीटर की दो पायलट परियोजनाएंँ पूरी हो चुकी हैं।
    • CIBMS के तहत सीमाओं पर अत्याधुनिक निगरानी तकनीकों की एक शृंखला को तैनात किया जाना शामिल है- थर्मल इमेजर्स, इन्फ्रा-रेड और लेज़र-आधारित घुसपैठ अलार्म, हवाई निगरानी हेतु एयरोस्टेट, बिना सेंसर वाले ग्राउंड सेंसर जो रडार, सोनार सिस्टम का पता लगाने में मदद कर सकते हैं, फाइबर-ऑप्टिक सेंसर और एक कमांड और कंट्रोल सिस्टम जो वास्तविक समय (Real Time) में सभी निगरानी उपकरणों से डेटा प्राप्त करने में सक्षम है।
    • बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली डोमिनेटेड क्यूआरटी इंटरसेप्शन टेक्नीक (BOLD-QIT) CIBMS के तहत असम के धुबरी ज़िले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर भी इस तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

स्रोत: द हिंदू

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