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डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के छह वर्ष

  • 02 Jul 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम और इससे संबंधित भारतीय पहल

मेन्स के लिये:

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम : इसका महत्त्व तथा उपलब्धियाँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम (Digital India Programme) के छह वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक आभासी कार्यक्रम को संबोधित किया।

प्रमुख बिंदु:

संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • भारत का टेकेड (India's Techade): भारत के सिद्ध तकनीकी कौशल के साथ संयुक्त डेटा और जनसांख्यिकीय लाभांश देश के लिये बड़े अवसर प्रस्तुत करता है और आने वाला दशक भारत का टेकेड यानी ‘तकनीक का दशक’ होगा।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला गया:
    • दीक्षा (Diksha): इसका संक्षिप्त रूप नॉलेज शेयरिंग के लिये डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह शिक्षकों के लिये राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना के रूप में कार्य करता है। देश भर के सभी शिक्षक उन्नत डिजिटल तकनीक से लैस होंगे।
    • ई-नाम (eNAM): इसे 14 अप्रैल, 2016 को राज्यों में कृषि उपज बाज़ार समितियों (APMCs) को जोड़ने वाले अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल के रूप में लॉन्च किया गया था।
    • ई-संजीवनी (eSanjeevani): यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का एक टेलीमेडिसिन सेवा मंच है।
    • डिजीबुनाई (DigiBunai): यह बुनकरों को डिजिटल कलाकृति बनाने और करघे में लोड की जाने वाली साड़ी के डिज़ाइन विकसित करने में सहायता करता है। DigiBunai™ जैक्वार्ड और डॉबी वीविंग के लिये अपनी तरह का पहला ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है।
    • प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi scheme): केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय’ (Ministry of Housing and Urban Affairs- MoHUA) द्वारा छोटे दुकानदारों और फेरीवालों (Street Venders) को आर्थिक सहयोग प्रदान करने हेतु ‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (The Pradhan Mantri Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi- PM SVANidhi) या पीएम स्वनिधि नामक योजना की शुरुआत की। यह सड़क पर सामान विक्रेताओं के माध्यम से  डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करता है।
  • कोविड-19 के दौरान डिजिटल समाधान: संपर्क अनुरेखण एप, आरोग्य सेतु
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: इसे वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया था। कार्यक्रम को कई महत्त्वपूर्ण सरकारी योजनाओं जैसे- भारतनेट, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया, औद्योगिक गलियारों आदि के लिये समर्थ बनाया गया है।
  • दृष्टि क्षेत्र:
    • प्रत्येक नागरिक के लिये इन्फ्रास्ट्रक्चर एक उपयोगिता के रूप में;
    • मांग पर शासन और सेवाएँ;
    • नागरिकों का डिजिटल सशक्तीकरण।
  • उद्देश्य:
    • भारत को एक ज्ञान भविष्य के लिये तैयार करना।
    • परिवर्तन को साकार करना अर्थात् आईटी (इंडियन टैलेंट) + आईटी (इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी = आईटी (इंडिया टुमोरो) को वास्तविक रूप देना।
    • परिवर्तन को सक्षम करने के लिये प्रौद्योगिकी को केंद्रीय बनाना।
    • एक शीर्ष कार्यक्रम बनाना जो कई विभागों तक पहुँचे।
  • डिजिटल इंडिया के 9 स्तंभ:
    • ब्रॉडबैंड हाईवे
    • मोबाइल कनेक्टिविटी तक सार्वभौमिक पहुँच
    • पब्लिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम
    • ई-गवर्नेंस : प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार
    • ई-क्रांति : सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी
    • सभी के लिये सूचना
    • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
    • नौकरियों के लिये आईटी
    • अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम

Digital-India

  • महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ: 
    • डिजिटल भुगतान: एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) की शुरुआत ने देश के हर हिस्से में डिजिटल भुगतान के लाभों की शुरुआत की।
      • भुगतान और लेनदेन के मामले में UPI समृद्ध व्यवसायियों से लेकर मामूली रेहड़ी-पटरी वालों तक सभी की मदद कर रहा है।
      • यह कई निजी अभिकर्त्ताओं को डिजिटल भुगतान का विकल्प प्रदान करने के लिये प्रोत्साहित करता है जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है।
    • व्यवसायों के संचालन को आसान बनाना: इलेक्ट्रॉनिक ग्राहक पहचान प्रणाली (e-KYC), इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ भंडारण प्रणाली (DigiLocker) और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रणाली (eSign) व्यवसायों व उनके संचालन को सुव्यवस्थित करने में मदद के लिये पेश किया गया था।
    • जैम ट्रिनिटी से परे: सिस्टम में खामियों को दूर करने हेतु JAM (जन धन, आधार और मोबाइल) ट्रिनिटी को एक सरल कदम के रूप में शुरू किया गया। यह कोविड टीकाकरण अभियान को सशक्त बनाता है जिसके चलते भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसने 20 करोड़ टीके लगाए।

आगे की राह: 

  • इसके सफल कार्यान्वयन के रास्ते में कई प्रकार की बाधाएंँ हैं, जैसे- डिजिटल निरक्षरता, खराब बुनियादी ढांँचा, इंटरनेट की धीमी गति, विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय की कमी, कराधान से संबंधित मुद्दे आदि। कार्यक्रम की पूरी क्षमता का उपयोग करने हेतु इन चुनौतियों का समाधान  करने की आवश्यकता है। 
  • चूँकि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने छह वर्ष पूरे कर लिये हैं इसलिये यहाँ छह ठोस रणनीतिक कदम दिये जा रहे हैं जो भारत की सफलता की कहानी में योगदान देने तथा पांँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के सपने को पूरा करने हेतु डिजिटल 4.0 के लिये नए डिजिटल राष्ट्र के निर्माण में सहायता कर सकते हैं:
    • वैज्ञानिक सोच का समावेश, जहांँ धारणा/सोच नीति को संचालित नहीं करती है।
    • डेटा तक पहुंँच और उपकरणों की कम लागत, विशेष रूप से स्मार्टफोन।
    • उच्च गति प्रौद्योगिकी और निर्बाध कनेक्टिविटी (5G, 6G)।
    • गुणवत्ता और स्थानीय भाषा सामग्री।
    • निवारण, लोकपाल, शिकायत निवारण अधिकारियों हेतु निश्चित स्थानों के साथ एक सुरक्षित साइबरस्पेस।
    • अक्षय ऊर्जा, बिजली की निर्बाध आपूर्ति, हरित प्रौद्योगिकी और अधिक-से-अधिक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना तथा अधिक-से-अधिक विभागों को एक-दूसरे से जोड़ना।
  • डिजिटल इंडिया एक सशक्त तकनीकी समाधान है जो वर्षों से बुनियादी ढांँचे के निर्माण में सहायक रहा है और आज यह स्टार्ट-अप, डिजिटल शिक्षा, निर्बाध बैंकिंग एवं भुगतान समाधान, एग्रीटेक, स्वास्थ्य तकनीक, स्मार्ट सिटीज़, शासन तथा खुदरा प्रबंधन जैसे अन्य उभरते क्षेत्रों के आधार के रूप में कार्य कर रहा है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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