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डेली अपडेट्स

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

अर्द्ध-डाइरेक धातु

  • 29 Oct 2019
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

अर्द्ध-डाइरेक धातु  

मेन्स के लिये:

प्रौद्योगिकीयों का विकास एवं अनुप्रयोग 

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के शोधकर्त्ताओं ने अर्द्ध-डाइरेक (Semi-Dirac) नामक विशेष वर्ग के धातु में विशिष्ट गुणों का पता लगाया है।

प्रमुख बिंदु:

  • शोधकर्त्ताओं द्वारा किये गए अध्ययन से ज्ञात हुआ कि जब कोई घटना किसी विशेष दिशा में होती है तो ये धातुएँ दी हुई आवृत्ति तथा ध्रुवीकरण (Polarization) के प्रकाश के लिये पारदर्शिता प्रकट करती हैं।
  • इसके अतिरिक्त जब घटना अलग-अलग दिशा में होती है तब ये धातुएँ उसी प्रकाश के लिये अपारदर्शी होगी।
  • वर्तमान में पारदर्शी संचालन परत हेतु कई प्रकार के अनुप्रयोग विद्यमान हैं, जैसे- मोबाइल में प्रयोग की जाने वाली टच स्क्रीन इसका सामान्य उदाहरण है।
  • अध्ययन में पाया गया कि विशिष्ट आवृत्ति तथा ध्रुवीकरण वाले विद्युत चुंबकीय तरंगों (प्रकाश तरंगों) के लिये अर्द्ध-डाइरेक धातु उच्च प्रकाशीय चालकता (Optical Conductivity) प्रदर्शित करती है।

डाइरेक धातु:

  • सोना एवं चाँदी जैसी धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं तथा इनकी सुचालकता व ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों की गति पर निर्भर करती है। इसके विपरीत डाइरेक धातु सामान्य धातुओं की तुलना में भिन्न होती हैं व इसमें ऊर्जा का स्थानांतरण रैखिक गति द्वारा होता है जो कि इनके अद्वितीय गुणों को प्रदर्शित करता है।
  • टाइटेनियम ऑक्साइड (Titanium Oxide- TiO2) और वैनेडियम ऑक्साइड  (Vanadium Oxides- V2O3) की नैनो संरचना वाले पदार्थ डाइरेक धातुओं के उदाहरण हैं।
  • अर्द्ध-डाइरेक धातुएँ एक दिशा में डाइरेक धातुओं के सामान तथा  लंबवत दिशा में सामान्य धातुओं के समान व्यवहार करती हैं।
  • किसी भी धातु में समावेशित संवाहकों जैसे इलेक्ट्रॉन आदि का प्रभावी द्रव्यमान जो कि धातु की प्रकृति पर आधारित होता है, धातु की स्वतंत्र अवस्था के द्रव्यमान से अलग होता है।
  • इसके अतिरिक्त एक विशिष्ट दिशा में चालन (Conductivity) हेतु इन धातुओं का प्रभावी द्रव्यमान शून्य हो जाता है।

आवश्यकता:

  • सामान्य धातुओं की तुलना में इन धातुओं का वेग 100 गुना अधिक हो सकता है, अतः डाइरेक धातु से बने उपकरणों में गतिशीलता तथा धारा में वृद्धि की जा सकती है।
  • अध्ययन से पता चला है कि अर्द्ध-डाइरेक धातु थर्मोइलेक्ट्रिक गुणों को प्रदर्शित कर सकती है।
    • वस्तुतः थर्मोइलेक्ट्रिसिटी (Thermoelectricity) एक स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है जो अपशिष्ट ताप का उपयोग कर विद्युत का उत्पादन करती है। इस प्रकार की तकनीक वर्तमान में कम उपलब्ध हैं।
    • थर्मोइलेक्ट्रिक्स ऊष्मा से विद्युत रूपांतरण दक्षता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही इससे नैनो प्रौद्योगिकी (Nano Technology) तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology) को बढ़ावा मिल सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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