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भारतीय अर्थव्यवस्था

FPI हेतु नए मापदंड

  • 22 Aug 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India- SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors-FPIs) के लिये नियामकीय व्यवस्था को सरल बनाने के लक्ष्य से नए मानदंडों को जारी किया है।

प्रमुख बिंदु:

  • इन मापदंडों को जारी करने का एक उद्देश्य FPI के बहिर्गमन (Outflows) की जाँच करना भी है, क्योंकि आँकड़ों के अनुसार, जुलाई 2019 से अगस्त 2019 के बीच 22,000 करोड़ रुपए से अधिक के शेयर बेचे गए थे।
  • ज्ञातव्य है कि बजट 2019 में सरकार द्वारा सुपर-रिच (Super-Rich) पर उच्च कर लगाने के बाद FPI भारतीय बाज़ार से अपना पैसा वापस ले रहे हैं।
  • उपरोक्त समस्या को ध्यान में रखते हुए एच. आर. खान समिति (H. R. Khan committee) की सिफारिश के आधार पर FPI नियमों को फिर से तैयार किया गया है।

FPI हेतु संशोधित नियम:

  • पुराने नियमों के अनुसार, यह आवश्यक था कि सभी FPIs में कम-से-कम 20 प्रतिशत निवेशक हों, परंतु अब इस नियम को समाप्त कर दिया गया है।
  • विदेशी निवेशकों के लिये KYC (Know Your Customer-KYC) दस्तावेज़ की आवश्यकता का भी सरलीकरण किया गया है।
  • इसी के साथ अब अन्य देशों के वे केंद्रीय बैंक भी स्वयं को (भारत में) FPI के रूप में पंजीकृत करा पाएंगे जो बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट (Bank for International Settlement-BIS) के सदस्य नहीं हैं।
    • SEBI के अनुसार, इस तरह की इकाइयाँ अपेक्षाकृत दीर्घकालिक और कम जोखिम वाली होती हैं क्योंकि ये प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से सरकार द्वारा ही नियंत्रित की जाती हैं।
  • FPI को घरेलू या विदेशी निवेशक को प्रतिभूतियों के ऑफ-मार्केट हस्तांतरण की अनुमति दी गई है।
  • SEBI ने फैसला किया है कि अब FPI को तीन श्रेणियों की बजाय दो श्रेणियों- श्रेणी I और II में ही वर्गीकृत किया जाएगा।
    • SEBI ने FPI की श्रेणी- III की अवधारणा को हटा दिया है।

उपरोक्त परिवर्तन नियामक ढाँचे को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाएंगे।

  • FPI नियमों में बदलाव के अलावा, SEBI ने इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) को रोकने के लिये व्हिसल-ब्लोअर (Whistle-Blowers) को पुरस्कृत करने का भी निर्णय लिया है।

इनसाइडर ट्रेडिंग

(Insider Trading)

  • इसका तात्पर्य सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी की प्रतिभूतियों की अंदरूनी जानकारी, जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, का उपयोग कर उन्हें खरीदने या बेचने से है।
  • आंतरिक जानकारी किसी भी ऐसी जानकारी को संदर्भित करती है जिसके परिणामस्वरूप एक निवेशक का निर्णय पर्याप्त प्रभावित हो सकता है।
  • उदाहरण के लिये- एक सरकारी कर्मचारी नए पारित होने वाले विनियमन के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर काम करता है और विनियमन की जानकारी सार्वजनिक होने से कंपनी के शेयरों को खरीदकर और किसी अन्य कंपनी या फर्म को लाभान्वित कर सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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