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आरक्षित वन

  • 18 Feb 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

आरक्षित वन, संरक्षित वन, ग्राम वन, उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, अर्द्ध-सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन, पर्वतीय वन, उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन, दलदली वन।

मेन्स के लिये:

भारत में वनों के प्रकार और वनों के संरक्षण की आवश्यकता, भारत में वनों के संरक्षण के लिये उठाए गए कदम।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में दिल्ली सरकार ने दक्षिणी दिल्ली के दो गाँवों में वन भूमि को 'आरक्षित वन' के रूप में अधिसूचित किया है।

वनों के प्रकार:

  • आरक्षित वन: आरक्षित वन सबसे अधिक प्रतिबंधित वन हैं और किसी भी वन भूमि या बंजर भूमि जो कि सरकार की संपत्ति है, पर राज्य सरकार द्वारा गठित किये जाते हैं।
    • आरक्षित वनों में किसी वन अधिकारी द्वारा विशेष रूप से अनुमति के बिना स्थानीय लोगों की आवाजाही निषिद्ध है।
  • संरक्षित वन: राज्य सरकार को आरक्षित भूमि के अलावा किसी भी भूमि का गठन करने का अधिकार है, जिस पर सरकार का मालिकाना अधिकार है और ऐसे वनों के उपयोग के संबंध में नियम जारी करने की शक्ति है।
    • इस शक्ति का उपयोग ऐसे वृक्षों जिनकी लकड़ी, फल या अन्य गैर-लकड़ी उत्पादों में राजस्व बढ़ाने की क्षमता है, पर राज्य का नियंत्रण स्थापित करने के लिये किया गया है। 
  • ग्राम वन: ग्राम वन वे वन हैं जिनके संबंध में राज्य सरकार “किसी भी ग्राम समुदाय को किसी भूमि या आरक्षित वन के रूप में सूचीबद्ध भूमि के संबंध में सरकार के अधिकार सौंप सकती है।”.

भारत में वर्षा के आधार पर वनों का वर्गीकरण:

  • उष्णकटिबंधीय सदाबहार और अर्द्ध- सदाबहार वन:
    • ये वन पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलान, पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहाड़ियों और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं।
    • ये 200 सेमी. से अधिक वार्षिक वर्षा और 22 डिग्री सेल्सियस से ऊपर औसत वार्षिक तापमान के साथ गर्म व आर्द्र क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
    • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन अच्छी तरह से स्तरीकृत होते हैं, जिनकी परतें ज़मीन के करीब होती हैं और झाड़ियों एवं लताओं से ढकी रहती हैं, जिनमें छोटे संरचित पेड़ और पेड़ों की काफी अधिक विविधता होती है। 
    • इन जंगलों में पेड़ों की ऊंँचाई 60 मीटर या उससे अधिक होती है। इन वनों में पत्तों के झड़ने, फूल आने और फल लगने का समय अलग-अलग होता है, इसलिये ये वर्ष भर हरे-भरे दिखाई पड़ते हैं।
    • इन क्षेत्रों के कम वर्षा वाले भागों में अर्द्ध-सदाबहार वन पाए जाते हैं। ऐसे वनों में सदाबहार और नम पर्णपाती वृक्षों का मिश्रण होता है। बढ़ती ऊँचाई और बढ़ते पर्वत इन वनों को एक सदाबहार गुण प्रदान करते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन:
    • ये भारत में सबसे व्यापक वन हैं। इन्हें ‘मानसूनी वन’ भी कहा जाता है। ये प्रायः उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ वर्षा 70-200 सेमी के बीच होती है। जल की उपलब्धता के आधार पर इन वनों को नम और शुष्क पर्णपाती के रूप में विभाजित किया जाता है।
  • पर्वतीय वन:
    • पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती ऊँचाई के साथ तापमान में कमी के कारण प्राकृतिक वनस्पतियों में परिवर्तन देखा जाता है।
    • पर्वतीय वनों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है, उत्तरी पर्वतीय वन और दक्षिणी पर्वतीय वन।
  • उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन: 
    • उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 50 सेमी. से कम वर्षा होती है। इनमें विभिन्न प्रकार की घास और झाड़ियाँ मौजूद होती हैं। इसमें दक्षिण पश्चिम पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अर्द्ध-शुष्क क्षेत्र शामिल हैं।
    • इन वनों में पौधे वर्ष के अधिकांश भाग में पत्ती रहित झाड़ीदार वनस्पति के रूप में पाए जाते हैं।
  • दलदली वन:
    • ये अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और गंगा व ब्रह्मपुत्र के डेल्टा क्षेत्र में पाए जाते हैं।
      • इसके अलावा महानदी, गोदावरी और कृष्णा डेल्टा जैसे क्षेत्रों में भी ये पाए जाते हैं।
    • इनमें से कुछ वन घने और अभेद्य हैं। इन सदाबहार वनों में सीमित संख्या में ही पौधे पाए जाते हैं।
    • इनमें जड़ें होती हैं, जिनमें नरम ऊतक मौजूद होते हैं ताकि पौधे पानी में साँस ले सकें।
    • इसमें मुख्य रूप से व्हिस्टलिंग पाइन, मैंग्रोव खजूर और बुलेटवुड शामिल होते हैं।

Natural-Vegetation

भारत में वनावरण की स्थिति:

  • भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2021 के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 1,540 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त कवर के साथ देश में वन और वृक्षों के आवरण में वृद्धि जारी है।
  • मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है, इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र हैं।
  • कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में वन आवरण के मामले में शीर्ष पाँच राज्य मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर और नगालैंड हैं।
  • वनावरण में सबसे अधिक वृद्धि दर्शाने वाले राज्यों में तेलंगाना (3.07%), आंध्र प्रदेश (2.22%) और ओडिशा (1.04%) हैं।
  • वनावरण में सबसे अधिक कमी पूर्वोत्तर के पाँच राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम और नगालैंड में हुई है।

स्रोत: द हिंदू

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