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लीची खाने से होने वाली मौतों के सन्दर्भ में पेश रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल

  • 20 Feb 2017
  • 4 min read

सन्दर्भ 

क्या लीची खाकर किसी की मौत हो सकती है? सुनने में भले ही ये बात अटपटी लगे लेकिन लैंसेंट जर्नल ने तीन वर्षों के शोध के उपरांत हाल ही में यह खुलासा किया था कि बिहार के मुज़फ्फरपुर में बीते दो दशकों में हज़ारों बच्चों की मौत लीची खाने से हुई है। हालाँकि अब यह बात सामने आ रही है कि इस रिपोर्ट में कई तरह की खामियाँ हैं।

क्या कहा था लैंसेंट जर्नल ने?

  • दरअसल, पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि हर साल बिहार के मुज़फ्फरपुर में मई-जून में कई बच्चों की मौत हो जाती थी और डॉक्टर समझ ही नहीं पाते कि क्या हुआ है। अकेले 2014 में ही 390 बच्चों को इसी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनमें से 122 की मौत हो गई।
  • भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों की संयुक्त कोशिशों से हाल ही में पता चला था कि खाली पेट ज़्यादा लीची खाने के कारण ये बीमारी हुई है। करीब तीन साल चली इस रिसर्च के नतीजे मशहूर विज्ञान पत्रिका लैंसेट ग्लोबल में छपे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक लीची में हाइपोग्लिसीन ए और मिथाइलेन्साइक्लोप्रोपाइल्गिसीन नाम का ज़हरीला तत्त्व होता है।

जर्नल की रिपोर्ट विश्वसनीय क्यों नहीं?

  • विशेषज्ञों ने लैंसेंट की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर यह कहते हुए सवाल उठाया है कि यदि बच्चों की लीची खाने से ही मौत हो रही है तो उन स्थानों पर ऐसी ही घटनाएँ देखने को मिलनी चाहिये थी जहाँ लीची का भरपूर उत्पादन होता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
  • बिहार के गया ज़िले में भी हाइपोग्लिसीन ए और मिथाइलेन्साइक्लोप्रोपाइल्गिसीन जनित स्वास्थ्य समस्याएँ देखने को मिली हैं जहाँ लीची का उत्पादन नहीं होता जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार लीची में ही हाइपोग्लिसीन ए और मिथाइलेन्साइक्लोप्रोपाइल्गिसीन नाम का ज़हरीला तत्त्व पाया जाता है।
  • गौरतलब है कि मुज़फ्फरपुर में हाइपोग्लिसीन ए और मिथाइलेन्साइक्लोप्रोपाइल्गिसीन की मात्रा में पिछले दो वर्षों में कमी देखी गई है जबकि पिछले दो सालों में वहाँ लीची की पैदावार में वृद्धि हुई है।

निष्कर्ष

विदित हो कि लैंसेंट की इस रिपोर्ट के आने के बाद से ही विश्व प्रसिद्ध मुज़फ्फरपुर के लीचियों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, इन परिस्थितियों में बिहार के लीची उद्योग पर नकारात्मक असर दिखने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। बच्चों की होने वाली मौतों के संबंध में डॉक्टरों का कहना है कि तेज़ गर्मी और अत्याधिक कुपोषण के कारण ये मौतें हुई हैं। लैंसेंट की रिपोर्ट के अविश्वसनीय होने के कारण एक ओर जहाँ बिहार के लीची उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं वहीं दूसरी ओर बच्चों के आश्चर्यजनक ढंग से होने वाली मौतों का उचित कारण तलाशना और उसका समाधान करना भी मुश्किल हो गया है।

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