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सतत् ऊर्जा के लिये नियामक संकेतक 2018

  • 14 Dec 2018
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?


सतत् ऊर्जा के लिये नियामक संकेतक (Regulatory Indicators for Sustainable Energy –RISE 2018)
के नवीनतम संस्करण के अनुसार, अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता लक्ष्यों में प्रभावशाली वृद्धि के साथ वर्ष 2010 के बाद से अब तक सतत् ऊर्जा हेतु मज़बूत नीतिगत ढाँचा अपनाने वाले देशों की संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है।

  • राइज 2018 : पॉलिसी मैटर्स (Policy Matters), जो SDG7 (Sustainable Development Goal 7) को प्राप्त करने के लिये नीतियों और विनियमों का वैश्विक भंडार है, बिजली के उपयोग, खाना पकाने के लिये स्वच्छ ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के लिये देश स्तर पर अपनाई गई नीतियों और विनियमों का मूल्यांकन करता है।
  • 133 देशों को कवर करने वाले और दुनिया की 97% आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले संकेतकों के साथ, RISE 2018 नीति निर्माताओं के क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोगियों के समक्ष अपनी नीतियों और नियामक ढाँचे को मानदंड के रूप में स्थापित करने के लिये एक निर्देश बिंदु प्रदान करता है और उन अंतरालों की पहचान करता है जो सार्वभौमिक ऊर्जा तक पहुँच की दिशा में उनकी प्रगति में बाधा डाल सकते हैं।

RISE 2018 के मुख्य निष्कर्ष

  • 2010-2017 के बीच सतत् ऊर्जा के लिये मज़बूत नीतिगत ढाँचा अपनाने वाले देशों की संख्या 17 से बढ़कर 59 तक पहुँच गई जो कि तीन गुना से अधिक है।
  • 2015 पेरिस समझौते के बाद अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता दोनों के लिये स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करते हुए दुनिया में ऊर्जा का सबसे अधिक उपभोग करने वाले देशों में से कई ने अपने अक्षय ऊर्जा नियमों में काफी सुधार किया है।
  • यह प्रगति केवल विकसित देशों में ही नहीं हुई है बल्कि विकासशील देशों ने भी इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।

ऊर्जा तक पहुँच (Energy Access)

  • जिन देशों ने 2010 के बाद बिजली तक पहुँच स्थापित करने के लिये अपनी दरों में वृद्धि की है, उन्होंने बिजली तक पहुँच स्थापित करने वाली नीतियों में एक समवर्ती सुधार भी दर्शाया है।
  • बिजली तक पहुँच स्थापित करने में पीछे रहने वाले देशों में नीति निर्माता इस अंतराल को तेज़ी से कम करने के लिये ऑफ-ग्रिड समाधान पर ध्यान दे रहे हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)

  • 2017 में 50 देशों (2010 से लगभग दोगुना) ने नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये महत्त्वपूर्ण नीति ढाँचे का विकास किया।
  • RISE द्वारा कवर किये गए देशों में से लगभग 93% देशों ने आधिकारिक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को अपनाया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में केवल 37% देशों ने आधिकारिक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को अपनाया था।
  • 84% देशों के पास अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का समर्थन करने के लिये नियम थे, जबकि 95% ने निजी क्षेत्र को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ तैयार करने और उन्हें संचालित करने की अनुमति दी।
  • अब भी स्वच्छ ऊर्जा नीतियों के तहत बिजली पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जबकि हीटिंग और परिवहन (जो 80% वैश्विक ऊर्जा उपयोग के लिये ज़िम्मेदार है) को अनदेखा किया जाता है।

ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency)

  • ऊर्जा दक्षता पर उन्नत नीतिगत ढाँचा अपनाने वाले देशों का प्रतिशत 2010 के 2% से बढ़कर 2017 में 25% हो गया। उल्लेखनीय है की विश्व की कुल ऊर्जा खपत में इन देशों का योगदान 66% है।
  • लेकिन ऊर्जा दक्षता को लेकर वैश्विक औसत स्कोर कम बना हुआ है जो अब भी बहुत अधिक सुधार का सुझाव देता है।

क्लीन कुकिंग (Clean Cooking)

  • SDG7 के अंतर्गत लक्षित चार क्षेत्रों में से एक क्लीन कुकिंग की नीति निर्माताओं द्वारा सबसे अधिक अनदेखी की जाती है और इस क्षेत्र के लिये आवश्यकता से कम वित्त उपलब्ध कराया जाता है।
  • 2010 से 2017 तक नीतिगत ढाँचे में कुछ विकास के बावजूद, कुकस्टोव के लिये मानक सेटिंग या उपभोक्ता और उत्पादक द्वारा स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर प्रोत्साहनों में बहुत कम प्रगति हुई है।

आगे की राह

  • हालाँकि ये परिणाम उत्साहित करने वाले हैं लेकिन RISE 2018 से यह पता चलता है कि देशों द्वारा इस मामले में काफी रास्ता तय किया जाना शेष है।
  • टिकाऊ ऊर्जा के लिये उन्नत नीति ढाँचे को अपनाने की दिशा में दुनिया ने केवल आधा रास्ता ही तय किया है। इससे 2030 तक SDG7 की उपलब्धि खतरे में हो सकती है और वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री से कम रखने के लक्ष्य में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
  • नीति प्रवर्तन एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है। एक ओर जहाँ मज़बूत नीतिगत ढाँचों को अपनाना महत्त्वपूर्ण है वहीँ दूसरी ओर उन्हें प्रभावी संस्थानों और प्रवर्तन द्वारा समर्थित किया जाना भी आवश्यक है। RISE ने यह समझने में सहायता के लिये प्रॉक्सी संकेतक शामिल किये हैं कि देश नीतियों को लागू करने पर कितनी दृढ़ता से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
  • उन देशों (जिन्होंने टिकाऊ नीतियों पर प्रगति की है) में राष्ट्रीय उपयोगिता की खराब वित्तीय स्थिति इस प्रगति को खतरे में डाल रही है। ऊर्जा तक कम पहुँच वाले देशों में बुनियादी क्रेडिट योग्यता मानदंडों को पूरा करने वाली उपयोगिताओं की संख्या 2012 के 63% से घटकर 2016 में 37% ही रह गई है।

भारतीय परिदृश्य

  • भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत सफलता मिली है जिसके फलस्वरूप सौर ऊर्जा के मूल्य में कमी आई है।
  • लेकिन इसकी संभावना को पूरी तरह से साकार करने के लिये भारत को क्लीन कुकिंग, परिवहन आदि जैसे क्षेत्रों में बहुत अधिक कार्य करने की आवश्यकता है।

ELECTRICITY

RISE 2018 के बारे में

  • RISE 2018, RISE का दूसरा संस्करण है।
  • इसका पहला संस्करण वर्ष 2016 में प्रकाशित हुआ था।
  • इस प्रकार RISE 2018 में भी देशों को वर्गीकृत करने के लिये पिछली कार्य-प्रणाली का ही अनुसरण किया गया है तथा देशों को उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्गों- ग्रीन ज़ोन, येलो ज़ोन तथा रेड ज़ोन में रखा गया है।
  • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देशों को ग्रीन ज़ोन में, मध्यम प्रदर्शन वाले देशों को येलो ज़ोन में तथा सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वालों को रेड ज़ोन में रखा गया है।

RISE

  • RISE 2018 में 2010 से पॉलिसी टाइम ट्रेंड समेत कई नीतियों को भी शामिल किया गया है जो इस प्रकार हैं-

♦ प्रवर्तन का समर्थन करने वाली नीतियों को लागू करने पर अधिक जोर देना।
♦ हीटिंग और परिवहन क्षेत्रों का व्यापक कवरेज।
♦ क्लीन कुकिंग के लिये नीतियों का प्रारंभिक मूल्यांकन।


स्रोत : world bank वेबसाइट

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