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शासन व्यवस्था

सरकारी विज्ञापनों का विनियमन

  • 28 Jul 2020
  • 3 min read

प्रीलिम्स के लिये:

सर्वोच्च न्यायालय, CCRGA

मेन्स के लिये:

सरकारी विज्ञापनों के विनियमन हेतु सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय  द्वारा नियुक्त ‘कमेटी ऑन कंटेंट रेगुलेशन इन गवर्नमेंट एडवरटाइज़िंग’ (Committee on Content Regulation in Government Advertising-CCRGA) द्वारा  दिल्ली सरकार को एक नोटिस जारी किया, जिसमें प्रमुख समाचार पत्रों के मुंबई संस्करणों में दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में दिये गए विज्ञापन पर स्पष्टीकरण माँगा गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • दिल्ली सरकार के अनुसार, दिल्ली सरकार CCRGA के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। दिल्ली सरकार की विज्ञापन सामग्री राज्य स्तरीय समिति द्वारा नियंत्रित की जाती है।
  • कमेटी ऑन कंटेंट रेगुलेशन इन गवर्नमेंट एडवरटाइज़िंग:
    • वर्ष 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, भारत सरकार ने सभी मीडिया प्लेटफार्मों में सरकारी वित्त पोषित विज्ञापन सामग्री के विनियमन को देखने के लिये वर्ष 2016 में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
    • इस समिति के पास सामान्य जनता की शिकायतों को दूर करने का अधिकार है। 
    • यह सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के खिलाफ आत्म-संज्ञान ले सकती है तथा इसके विरुद्ध सुधारात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।

MP-PCS

सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश:

  • सरकारी विज्ञापनों की सामग्री नागरिकों एवं उनके अधिकारों के साथ-साथ सरकार के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के लिये भी प्रासंगिक होनी चाहिये।
  • विज्ञापन सामग्री को अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने तथा लागत प्रभावी तरीके से अधिकतम पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया जाना चाहिये।
  • विज्ञापन सामग्री सही होनी चाहिये तथा इसके द्वारा पहले से मौजूद नीतियों और उत्पादों को नए ढंग से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिये।
  • विज्ञापन सामग्री द्वारा सत्ता पक्ष के राजनीतिक हितों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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