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Rapid Fire करेंट अफेयर्स (24 July)

  • 24 Jul 2019
  • 8 min read
  • संसद ने मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया। इस संशोधन से भारत के मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त किसी ऐसे व्यक्ति को भी आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जा सकेगा, जो सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो। आयोग के सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन की जाएगी, जिनमें एक महिला होगी। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और दिव्यांगजनों संबंधी मुख्य आयुक्त को आयोग के सदस्यों के रूप में शामिल किया जा सकेगा। आयोग और राज्य आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों की पदावधि को पाँच वर्ष से कम करके तीन वर्ष किया जाएगा और वे पुनर्नियुक्ति के लिये पात्र होंगे। मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की चयन समिति में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा का उपसभापति एवं दोनों सदनों के विपक्ष के नेता शामिल किये गए हैं। भारत में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन 12 अक्तूबर, 1993 को हुआ था। इस आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप है जिन्हें अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिये राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसंबर, 1993 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे मंज़ूरी दी गई थी।
  • आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग की अध्यक्षता वाली एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने देश में निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि निजी क्रिप्टोकरेंसी में कोई अंतर्निहित आंतरिक मूल्य नहीं है, इसलिये सरकार द्वारा जारी क्रिप्टोकरेंसी के अलावा इस तरह की सभी मुद्राओं पर प्रतिबंध लगना चाहिये। समिति ने क्रिप्टोकरेंसी के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर एक से दस साल तक की सज़ा का प्रस्ताव किया है तथा इसके अलावा 50 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। हालांकि सरकार अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए आधिकारिक तौर पर डिजिटल रुपया जारी कर सकती है जो लेन-देन के लिए पूरी तरह वैध होगा। यदि सरकार डिजिटल मुद्रा लाती है तो इसका नियमन रिज़र्व बैंक करेगा। समिति ने क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने के लिये 'बैनिंग क्रिप्टोकरेंसी एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2019' शीर्षक से विधेयक का एक मसौदा भी तैयार किया है। ज्ञातव्य है कि सरकार ने 2 नवंबर, 2017 को आर्थिक मामलों के सचिव की अगुवाई में यह अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की थी। इस समिति को डिजिटल करेंसी से संबंधित मुद्दों पर अध्ययन करने और इसके लिये कार्रवाई पर सुझाव देने का काम दिया गया था।
  • नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने 34,422 करोड़ रुपए की पीएम-कुसुम योजना को शुरू करने के लिये दिशा-निर्देश जारी किये हैं, जो किसानों को अपने खेतों में सौर ऊर्जा पैदा करने और डीज़ल पंपों के स्थान पर स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत वर्ष 2022 तक 25,750 मेगावाट की सौर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें कुल केंद्रीय वित्तीय सहायता 34,422 करोड़ रुपए की होगी। इस योजना के तीन कंपोनेंट हैं- कंपोनेंट-ए में विकेंद्रीकृत ज़मीन/स्टिल्ट-माउंटेड ग्रिड-कनेक्टेड सौर या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित 10,000 मेगावाट क्षमता के बिजली संयंत्रों की स्थापना की जानी है। कंपोनेंट-बी में 17.50 लाख एकल सौर कृषि पंपों की स्थापना का प्रावधान है, जबकि कंपोनेंट-सी में 10 लाख ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किये जाने की परिकल्पना की गई है। ये दिशा-निर्देश इस योजना को व्यापक कार्यान्वयन संरचना प्रदान करने के लिये तैयार किये गए हैं।
  • दुनियाभर में एड्स से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आ रही है। हाल ही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2010 की तुलना में अब एड्स से होने वाली मौतों की संख्या 33 प्रतिशत कम हुई है। यूएनएड्स की इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में एड्स के मामलों में 16 प्रतिशत की कमी आई है। यह रिपोर्ट दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका पर आधारित है, जहाँ इस कमी की वज़ह वहाँ हुई प्रगति को माना गया है। एड्स से जुड़ी मौतों में कमी की एक बड़ी वज़ह उपचार में हो रहे सुधार को माना गया है। यूएनएड्स का पूरा नाम यूनाइटेड नेशंस प्रोग्राम ऑन एचआईवी/एड्स है और भारत में वर्ष 1999 से इसकी मौजूदगी है। यूएनएड्स एक ऐसी भागीदारी है, जो एचआईवी से बचाव, उपचार, सेवा और समर्थन को सर्वसुलभ कराने में दुनिया को नेतृत्‍व और प्रेरणा देती है।
  • ब्रेक्ज़िट की पृष्ठभूमि में बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री चुना गया है। वह प्रधानमंत्री थेरेसा मे का स्थान लेंगे। लंदन के मेयर रह चुके बोरिस जॉनसन ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ में जेरमी हंट को पीछे छोड़ा। गौरतलब है कि ब्रिटेन की यूरोपियन यूनियन के साथ बेक्ज़िट डील कराने में विफल रहने के बाद 7 जून को थेरेसा मे ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनकी कंज़र्वेटिव पार्टी ने बोरिस जॉनसन और जेरेमी हंट में से किसी एक को प्रधानमंत्री चुनने के लिये पार्टी कार्यकर्त्ताओं का मत जानना चाहा था। इसमें पार्टी के 1.60 लाख कार्यकर्ताओं से बैलेट वोटिंग कराई गई। बोरिस जॉनसन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ब्रेक्ज़िट विवाद को हल करने की होगी। ब्रिटेन को इस साल 31 अक्तूबर तक यूरोपीय संघ से अलग होने की प्रक्रिया पूरी करनी है। थेरेसा मे ने बतौर प्रधानमंत्री 23 जुलाई को अपनी आखिरी कैबिनेट मीटिंग में हिस्सा लिया तथा अपना इस्तीफा महारानी एलिजाबेथ को सौंप दिया। इसके बाद ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री के नाम का ऐलान किया गया।
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