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भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रस्तावित डिजिटल रुपया

  • 10 Oct 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), ई-रुपया, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), वर्चुअल करेंसी, डिजिटल पेमेंट।

मेन्स के लिये:

ई-रुपया और आभासी मुद्राओं का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही विशिष्ट उपयोग के लिये ई-रुपए, या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) या डिजिटल रुपए को व्यापक रुप से शुरु करेगा।

  • इसने खुदरा और थोक के रुप में विभिन्न लेन-देन के लिये ई-रुपए के उपयोग की दो व्यापक श्रेणियों का संकेत दिया है।

ई-रुपया

  • परिभाषा: RBI, CBDC को केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किये गए मुद्रा के डिजिटल संस्करण के रूप में परिभाषित करता है। देश की मौद्रिक नीति के अनुसार यह केंद्रीय बैंक (इस मामले में, आरबीआई) द्वारा जारी एक संप्रभु या पूरी तरह से स्वतंत्र मुद्रा है।
  • लीगल टेंडर: एक बार आधिकारिक रूप से जारी होने के बाद CBDC को तीनों पक्षों - नागरिक, सरकारी निकायों और उद्यमों द्वारा भुगतान का माध्यम एवं लीगल टेंडर माना जाएगा। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने के कारण इसे किसी भी वाणिज्यिक बैंक की मुद्रा या नोटों में स्वतंत्र रूप से परिवर्तित किया जा सकता है। 
    • RBI ई-रुपए पर ब्याज के पक्ष में नहीं है क्योंकि लोग बैंकों से पैसे निकालकर इसे डिजिटल रुपए में बदल सकते हैं, जिससे बैंक विफल हो सकते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी से भिन्नता: क्रिप्टोकरेंसी (डिस्ट्रिब्यूटेड लेज़र) की अंतर्निहित तकनीक डिजिटल रुपया प्रणाली के कुछ आयामों को कम कर सकती है, लेकिन आरबीआई ने अभी तक इस पर फैसला नहीं किया है। हालाँकि बिटकॉइन या एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी प्रकृति में 'निजी' हैं। दूसरी ओर, डिजिटल रुपए को आरबीआई द्वारा जारी और नियंत्रित किया जाएगा।
  • वैश्विक परिदृश्य: जुलाई 2022 तक करीब 105 देश CBDC पर विचार कर रहे थे। दस देशों ने CBDC की शुरुआत कर दी है जिनमें सबसे पहला है वर्ष 2020 में बहामियन सैंड डॉलर तथा सबसे नवीनतम है जमैका का JAM-DEX

CBDC के लिये RBI की योजना:

  • CBDC के प्रकार: डिजिटल रुपए के उपयोग और कार्यों के आधार तथा उसकी पहुँच के विभिन्न स्तरों को ध्यान में रखते हुए CBDC को दो व्यापक श्रेणियों में बाँटा जा सकता है- सामान्य उद्देश्य वाला (खुदरा) (CBDC-R) और थोक (CBDC-W)
    • खुदरा CBDC नकदी का एक इलेक्ट्रॉनिक संस्करण है जो मुख्य रूप से खुदरा लेन-देन हेतु है। इसका उपयोग सभी द्वारा किया जाएगा यथा-निजी क्षेत्र, गैर-वित्तीय उपभोक्ता और व्यवसाय। हालाँकि RBI ने यह नहीं बताया है कि खुदरा व्यापार में मर्चेंट ट्रांजैक्शंस में ई-रुपए का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है
    • थोक CBDC को चुनिंदा वित्तीय संस्थानों तक सीमित पहुँच के लिये डिज़ाइन किया गया है। इसमें बैंकों द्वारा किये गए वित्तीय लेन-देन के लिये निपटान प्रणालियों को सरकारी प्रतिभूतियों (ज) सेगमेंट, अंतर-बैंक बाज़ार और पूंजी बाज़ार में परिचालन लागत, संपार्श्विक के उपयोग एवं तरलता प्रबंधन के संदर्भ में अधिक कुशलतापूर्वक तथा सुरक्षित रूप से बदलने की क्षमता है।
  • ढाँचा:
    • टोकन पर आधारित CBDC बैंक नोटों के समान लेन-देन एक साधन होगा; टोकन प्राप्त करने वाले को टोकन के अपने स्वामित्त्व की वैधता को प्रमाणित करना होगा। चूँकि यह वास्तविक धन के समान होगा, टोकन-आधारित CBDC को पसंदीदा CBDC-खुदरा मोड के रूप में देखा जाएगा।
    • किसी भी खाता-आधारित प्रणाली के लिये CBDC के सभी धारकों के शेष और लेन-देन के रिकॉर्ड के रखरखाव की आवश्यकता होगी तथा मौद्रिक शेष राशि के स्वामित्त्व को इंगित करना होगा। इस संदर्भ में एक मध्यस्थ एक खाताधारक की पहचान को सत्यापित करेगा। CBDC-थोक हेतु इस प्रणाली पर विचार किया जा सकता है।
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में उपलब्ध: एक विकल्प के रूप में ऑफलाइन कार्यक्षमता CBDC को इंटरनेट के बिना लेन-देन करने की अनुमति देगी और इस प्रकार खराब या बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में पहुँच को सक्षम करेगी।
    • यह वित्तीय प्रणाली से असंबद्ध आबादी के लिये डिजिटल पदचिह्न साबित होगा, जिससे उन्हें ऋण की आसान उपलब्धता की सुविधा प्राप्त होगी।
    • हालाँकि RBI को लगता है कि ऑफलाइन मोड में 'दोहरे खर्च' का जोखिम रहेगा क्योंकि CBDC के सामान्य खाता बही को अपडेट किये बिना CBDC इकाई का एक से अधिक बार उपयोग करना तकनीकी रूप से संभव होगा।
  • जारी करने के लिये मॉडल:
    • प्रत्यक्ष मॉडल में केंद्रीय बैंक डिजिटल रुपया प्रणाली के सभी पहलुओं जैसे जारी करने, खाता रखने और लेन-देन सत्यापन के प्रबंधन के लिये ज़िम्मेदार होगा।
    • अप्रत्यक्ष मॉडल वह होगा जहाँ केंद्रीय बैंक और अन्य मध्यस्थ (बैंक तथा कोई अन्य सेवा प्रदाता), सभी अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। केंद्रीय बैंक अप्रत्यक्ष रूप से बिचौलियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को CBDC जारी करेगा और उपभोक्ताओं के किसी भी दावे का प्रबंधन मध्यस्थ द्वारा किया जाएगा।

ई-रुपए के फायदे:

  • भौतिक नकद प्रबंधन में शामिल परिचालन लागत में कमी, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना, भुगतान प्रणाली में लचीलापन, दक्षता और नवीनता लाना।
  • जनता को ऐसी सुविधा प्रदान करता है जो कोई भी निजी आभासी मुद्राएँ संबद्ध जोखिमों के बिना प्रदान कर सकती हैं।

भारत में CBDC से संबंधित मुद्दे:

  • साइबर सुरक्षा: CBDC पारिस्थितिकी तंत्र को साइबर हमलों जैसे जोखिम हो सकते हैं जो वर्तमान भुगतान प्रणाली में पहले से मौजूद हैं।
  • गोपनीयता का मुद्दा: CBDC से वास्तविक समय में डेटा के विशाल मात्रा के उत्पन्न होने की उम्मीद है। डेटा की गोपनीयता इसकी अनामिकता से संबंधित चिंताएँ और इसका प्रभावी उपयोग एक चुनौती होगी।
  • डिजिटल अंतराल और वित्तीय निरक्षरता: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey-NFHS)-5 ग्रामीण-शहरी विभाजन के आधार पर डेटा पृथक्करण की सुविधा भी प्रदान करता है। केवल 48.7% ग्रामीण पुरुषों और 24.6% ग्रामीण महिलाओं ने कभी इंटरनेट का उपयोग किया है। इसलिये CBDC डिजिटल डिवाइड के साथ-साथ वित्तीय समावेशन में लिंग आधारित बाधाओं को बढ़ा सकता है।

आगे की राह

  • उन अंतर्निहित तकनीकों पर निर्णय लेने के लिये तकनीकी स्पष्टता सुनिश्चित की जानी चाहिये जिन पर सुरक्षा और स्थिरता के लिये भरोसा किया जा सकता है।
  • CBDC को एक सफल पहल और आंदोलन बनाने के लिये RBI को व्यापक आधार हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकृति बढ़ाने के लिये मांग पक्ष के बुनियादी ढाँचे तथा ज्ञान के अंतराल को दूर करना चाहिये।
  • RBI को विभिन्न मुद्दों, डिज़ाइन के विचारों और डिजिटल मुद्रा की शुूरुआत के निकट प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सावधानी से आगे बढ़ना चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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