इंदौर शाखा: IAS और MPPSC फाउंडेशन बैच-शुरुआत क्रमशः 6 मई और 13 मई   अभी कॉल करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


भारतीय अर्थव्यवस्था

स्थानीय फिनटेक अभिकर्त्ताओं को प्रोत्साहन

  • 22 Feb 2024
  • 17 min read

प्रिलिम्स के लिये:

फिनटेक सेक्टर, साइबर सुरक्षा, संसद समितियाँ, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड

मेन्स के लिये:

भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम, पूंजी बाज़ार

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

संसद में पेश की गई हालिया रिपोर्ट में, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति ने भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में विदेशी स्वामित्व वाले फिनटेक (Fintech) ऐप्स के प्रभुत्व को लेकर चिंता व्यक्त की है।

  • फिनटेक का आशय वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से है।

रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • प्रभावी विनियमन पर ज़ोर:
    • भारत में भुगतान करने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ रहा है इसलिये समिति ने रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया कि डिजिटल भुगतान ऐप्स को प्रभावी ढंग से विनियमित किया जाना चाहिये।
    • इस रिपोर्ट में के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India- NPCI) जैसे नियामक निकायों को विदेशी ऐप्स की तुलना में स्थानीय ऐप्स को विनियमित करना अधिक 'व्यवहार्य' होगा क्योंकि विदेशी ऐप्स से संबंधित अधिकारिता में भिन्नता है।
  • विदेशी स्वामित्व वाली फिनटेक कंपनियों का प्रभुत्व:
    • भारतीय फिनटेक क्षेत्र में विदेशी संस्थाओं के स्वामित्व वाली फिनटेक कंपनियों जैसे फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) की बाज़ार हिस्सेदारी अत्यधिक है।
      • बाज़ार हिस्सेदारी: अक्तूबर-नवंबर 2023 तक के आँकड़ों के अनुसार PhonePe की हिस्सेदारी सबसे अधिक (46.91%) है तथा उसके बाद Google Pay (36.39%) और BHIM UPI (0.22%) का स्थान आता है। 
  • NPCI द्वारा लेन-देन की उच्चतम सीमा का निर्धारण (वॉल्यूम कैप):
    • समिति की अनुशंसाएँ काफी हद तक NPCI द्वारा नवंबर 2020 में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) का उपयोग करके लेन-देन की उच्चतम सीमा (वॉल्यूम कैप) 30% निर्धारित करने के अनुरूप हैं।
      • NPCI द्वारा निर्धारित यह सीमा PhonePe और Amazon Pay जैसे तृतीय-पक्ष ऐप्स को तीन माह में UPI की कुल लेन-देन के 30% से अधिक की हिस्सेदारी होने से प्रतिबंधित करती है।
      • निर्धारित उच्चतम सीमा से अधिक लेन-देन प्रबंधित करने वाले ऐप्स को दो वर्ष की चरणबद्ध अनुपालन अवधि (दिसंबर 2022- दिसंबर 2024) दी गई थी।
    • इस उच्चतम सीमा (वॉल्यूम कैप) का उद्देश्य UPI भुगतान में वृद्धि के दौरान होने वाले संभावित जोखिमों को कम करना और UPI भुगतान इकोसिस्टम की सुरक्षा करना है।
    • NCPI ने UPI विकास को बढ़ावा देने और बाज़ार संतुलन में स्थिरता बनाए रखने के लिये बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों द्वारा उपभोक्ता पहुँच में विस्तार करने पर ज़ोर दिया।
  • धोखाधड़ी संबंधी चिंताएँ:
    • समिति ने चीनी घोटालेबाज़ों द्वारा अबू धाबी की Pyppl ऐप का दुरुपयोग करने जैसे मामलों को आधार बनाते हुए धन शोधन के लिये फिनटेक प्लेटफाॅर्मों के दुरुपयोग से संबंधित चिंताओं पर प्रकाश डाला।
    • पिछले पाँच वर्षों में भुगतान की मात्रा में वृद्धि के बावजूद धोखाधड़ी से बिक्री (F2S) अनुपात काफी हद तक 0.0015% के आसपास बना हुआ है।
      • UPI धोखाधड़ी से प्रभावित उपयोगकर्त्ताओं का प्रतिशत 0.0189% था।
      • F2S एक मात्रा आधारित प्रतिशत है जो किसी व्यवसाय में उनकी मासिक बिक्री की मात्रा की तुलना में किसी दिये गए महीने में की गई धोखाधड़ी वाले लेन-देन की संख्या को मापता है।

फिनटेक क्या है?

  • परिचय:
    • फिनटेक, एक वित्तीय प्रौद्योगिकी, भुगतान, उधार, बीमा, धन प्रबंधन तथा अन्य वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने अथवा उनको अधिक सुविधाजनक बनाने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर एवं सेवाओं का उपयोग है।
  • महत्त्व:
    • फिनटेक, भारत के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सहायता कर सकता है:
      • भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरदराज़ के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बैंक रहित तथा कम बैंकिंग सुविधा वाली आबादी तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच के साथ समावेशन का विस्तार करना है ।
      • पारंपरिक तरीकों में शामिल लागत, समय एवं घर्षण को कम करके वित्तीय लेन-देन की दक्षता तथा सुविधा को बढ़ाना।
      • उद्यमियों, स्टार्टअप एवं उपभोक्ताओं के लिये नए अवसर एवं बाज़ार सृजित करके भारतीय अर्थव्यवस्था के नवाचार एवं विकास को बढ़ावा देना।
  • भारत के फिनटेक उद्योग के भाग एवं कार्यप्रणाली:
    • फिनटेक के अंतर्गत प्रमुख क्षेत्रों में भुगतान, डिजिटल ऋण, इंश्योरटेक, वेल्थटेक शामिल हैं।
      • डिजिटल भुगतान, जो ऑनलाइन या मोबाइल प्लेटफॉर्म, जैसे कि QR, वॉलेट, कार्ड एवं QR कोड के माध्यम से धन अथवा मूल्य के हस्तांतरण को सक्षम बनाता है।
      • डिजिटल ऋण, जो वैकल्पिक डेटा स्रोतों एवं एल्गोरिदम का उपयोग करके ऑनलाइन अथवा मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यक्तियों अथवा व्यवसायों को ऋण प्रदान करता है।
      • इंश्योरटेक, जो बीमा उत्पादों के साथ-साथ सेवाओं के वितरण, एवं प्रबंधन में सुधार के लिये प्रौद्योगिकी लागू करता है।
      • वेल्थटेक, जो निवेश, धन प्रबंधन एवं वित्तीय सलाहकरी सेवाओं के लिये ऑनलाइन अथवा मोबाइल मंच प्रदान करता है।
    • भारत, दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते फिनटेक बाज़ारों में से एक है। यहाँ लगभग 7,000 से अधिक फिनटेक स्टार्ट-अप है।
    • भारतीय फिनटेक उद्योग का बाज़ार आकार वर्ष 2021 में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा और साथ ही वर्ष 2025 तक इसके लगभग 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
  • भारत में फिनटेक के लिये प्रमुख नियामक संस्थाएँ:
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI):
      • RBI, बैंकों, NBFC, PSP तथा क्रेडिट ब्यूरो को विनियमित करता है।
      • भारत के मुद्रा बाज़ार तथा विदेशी मुद्रा बाज़ार को विनियमित करने के लिये ज़िम्मेदार है।
      • डिजिटल भुगतान जैसे फिनटेक क्षेत्रों की निगरानी करता है,
      • डिजिटल ऋण तथा डिजिटल अथवा नव-बैंक(नियोबैंक)
    • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI):
      • प्रतिभूति बाज़ारों एवं स्टॉकब्रोकरों तथा निवेश सलाहकारों जैसे मध्यस्थों को विनियमित करता है।
      • प्रतिभूति, बाज़ारों और स्टॉकब्रोकरों तथा निवेश सलाहकारों जैसे मध्यस्थों को नियंत्रित करता है।
      • स्टॉकब्रोकिंग और निवेश सलाहकार जैसी सेवाएँ इसके अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
    • भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI):
      • बीमाकर्त्ताओं, कॉर्पोरेट एजेंटों, बीमा के लिये वेब एग्रीगेटर्स और तीसरे पक्ष के एजेंटों को विनियमित करता है।
      • बीमा क्षेत्र में अनुपालन और अखंडता सुनिश्चित करता है।

स्थानीय फिनटेक अभिकर्त्ताओं के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

  • अधिक प्रतिस्पर्द्धा: 
    • भारतीय फिनटेक क्षेत्र अत्यधिक प्रतिस्पर्द्धी है, जिसमें कई स्थानीय और विदेशी खिलाड़ी बाज़ार हिस्सेदारी की तलाश में हैं। यह तीव्र प्रतिस्पर्द्धा स्थानीय अभिकर्त्ताओं के लिये अलग दिखना और एक महत्त्वपूर्ण उपयोगकर्त्ता आधार हासिल करना कठिन बना सकती है।
      • स्थानीय अभिकर्त्ताओं को अक्सर विशाल संसाधनों और अनुभव वाले स्थापित वैश्विक फिनटेक दिग्गजों से प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ता है। ये दिग्गज ग्राहकों को आकर्षित करने तथा प्रतिस्पर्द्धात्मक बढ़त हासिल करने के लिये अपनी ब्रांड पहचान एवं तकनीकी प्रगति का लाभ उठा सकते हैं।
  • नियामक बाधाएँ:
    • फिनटेक के लिये भारतीय नियामक परिदृश्य लगातार विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों हेतु अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
      • इन जटिलताओं से निपटना, विशेष रूप से छोटे स्टार्टअप के लिये, समय लेने वाला और संसाधन-गहन हो सकता है।
    • डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएँ स्थानीय अभिकर्त्ताओं के लिये चुनौतियाँ पैदा करती हैं। उन्हें उपयोगकर्त्ता का विश्वास हासिल करने हेतु मज़बूत डेटा सुरक्षा उपायों में निवेश करने और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण जैसे डेटा गोपनीयता नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
  • वित्तीय बाधाएँ:
    • अपने विदेशी समकक्षों की तुलना में, स्थानीय अभिकर्त्ताओं के पास अक्सर फंडिंग तक सीमित पहुँच होती है, जिससे नई प्रौद्योगिकियों में निवेश करने, अपनी पहुँच का विस्तार करने और प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्द्धा करने की उनकी क्षमता में बाधा आती है।
      • जबकि UPI जैसे त्वरित भुगतान ने भारतीय बाज़ार में क्रांति ला दी है, उनकी न्यूनतम लेन-देन शुल्क स्थानीय अभिकर्त्ताओं के लिये राजस्व सृजन को सीमित कर सकती है, खासकर उन लोगों हेतु जो पूरी तरह से इस सेगमेंट पर निर्भर हैं।
      • मैकिन्से (McKinsey's) की रिपोर्ट (2023) के अनुसार भारत में तत्काल भुगतान भविष्य की राजस्व वृद्धि में 10% से कम योगदान दे सकता है।
        • यह अनुमान UPI के माध्यम से किये गए लेन-देन के लिये लगाए गए शुल्क की अनुपस्थिति के कारण है, जबकि UPI न्यूनतम लेन-देन शुल्क लगाता है, फिर भी यह शुल्क-कम नकद लेन-देन की तुलना में अधिक राजस्व उत्पन्न करता है।
          • महंगे नकदी प्रबंधन की तुलना में कागज़ रहित लेन-देन डिजिटल वाणिज्य की सुरक्षा और पहुँच को बढ़ाता है।
  • तकनीकी सीमाएँ:
    • वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में तेज़ी से तकनीकी प्रगति स्थानीय अभिकर्त्ताओं के लिये चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रतिस्पर्द्धी बने रहने और नवीन समाधान पेश करने हेतु उन्हें अनुसंधान तथा विकास में लगातार निवेश करने की आवश्यकता है।
      • उन्नत तकनीकी बुनियादी ढाँचे तक पहुँच की कमी, जैसे कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्थानीय फिनटेक सॉल्यूशन की पहुँच और समावेशिता में बाधा बन सकती है।
  • उपयोगकर्त्ता का विश्वास और व्यवहार:
    • डिजिटल साक्षरता, डेटा सुरक्षा और संभावित धोखाधड़ी के बारे में चिंताओं के कारण, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगकर्त्ताओं में विश्वास स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। स्थानीय अभिकर्त्ता को उपयोगकर्त्ताओं के लिये शिक्षा में निवेश करने और पारदर्शी प्रथाओं के माध्यम से विश्वास बनाने की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • स्थानीय और विदेशी फिनटेक अभिकर्त्ता:
    • भुगतान, ऋण, धन प्रबंधन और बीमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सेवा देने के लिये स्थानीय तथा विदेशी फिनटेक अभिकर्त्ताओं का संतुलित संयोजन आवश्यक है।
      • इष्टतम संयोजन/मिश्रण को भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र के हितों और ज़रूरतों को संतुलित करना चाहिये, जिसमें उपयोगकर्त्ता, प्रदाता, नियामक तथा समाज शामिल हैं।
  • उन्नत नियामक सहभागिता:
    • स्थानीय फिनटेक अभिकर्त्ताओं को बढ़ती अनुपालन आवश्यकताओं को समझने एवं नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिये नियामक निकायों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिये।
    • नियामकों के साथ सहयोग जवाबदेही और अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने एवं नवाचार तथा विकास के लिये अनुकूल नियामक वातावरण को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है
  • उपयोगकर्त्ता का अनुभव:
    • उपयोगकर्त्ता के अनुकूल इंटरफेस और कार्यक्षमताएँ डिज़ाइन की जानी चाहिये जो सुलभ हों तथा डिजिटल साक्षरता के विभिन्न स्तरों को पूरा करें, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • फंडिंग तक पहुँच:
    • स्थानीय अभिकर्त्ताओं के लिये उद्यम पूंजी निवेश या सरकारी अनुदान जैसे फंडिंग तक आसान पहुँच की सुविधा के लिये पहल का पता लगाने की आवश्यकता है, जो उन्हें प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्द्धा करने में मदद कर सकता है।
  • ग्राहक का भरोसा:
    • विश्वास कायम करने के लिये शिक्षा, पारदर्शी संचार और मज़बूत सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2010)

  1. बैंकों का राष्ट्रीयकरण
  2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का गठन
  3. बैंक शाखाओं द्वारा गाँव का अभिग्रहण 

उपरोक्त में से किसे भारत में "वित्तीय समावेशन" प्राप्त करने के लिये उठाया गया कदम माना जा सकता है?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2
× Snow