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डेली अपडेट्स

शासन व्यवस्था

स्कूलों में छात्रों के बीच खेल को बढ़ावा देना

  • 26 Jun 2019
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (Department of School Education and Literacy) ने सभी स्तरों पर समावेशी, न्यायसंगत एवं गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिये ‘स्कूल शिक्षा- समग्र शिक्षा’ (School Education- Samagra Shiksha) नामक एक एकीकृत योजना लागू की है।

  • उल्लेखनीय है कि इस एकीकृत योजना में सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan- SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan- RMSA) और शिक्षक शिक्षा (Teacher Education- TE) तीनों को शामिल किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल, शारीरिक गतिविधियों, योग, सह-पाठयक्रम गतिविधियों (Co-curricular activities) आदि को प्रोत्साहित करने हेतु पहली बार समग्र शिक्षा के तहत खेल एवं शारीरिक शिक्षा के घटकों को शुरू किया गया है।
  • साथ ही सरकारी स्कूलों में खेल उपकरणों के लिये अनुदान का प्रावधान किया गया है जिसके तहत प्रतिवर्ष अनुदान के रूप में प्राथमिक विद्यालयों को 5000 रुपए, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10,000 रुपए तथा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25,000 रुपए दिये जाएंगे।
  • वर्ष 2018-19 के बजट में 894307 सरकारी स्कूलों के लिये खेल अनुदान के तहत 506.90 करोड़ रुपए की मंज़ूरी दी गई।
  • मंत्रालय ने खेल अनुदान के समुचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र/दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
  • इन दिशा-निर्देशों में सरकारी स्कूलों के लिये यथोचित आयु के आधार पर उपकरणों की एक सांकेतिक सूची जारी की गई है। खेल संबंधी विशेष उपकरण भी स्कूलों द्वारा चुने जा सकते हैं, जो स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर आधारित होते हैं, जैसे- प्लेफील्ड की उपलब्धता आदि।
  • राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को उनके पारंपरिक/क्षेत्रीय खेलों को शामिल करने की सलाह दी गई है।
  • प्रत्येक स्कूल में एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक (Physical Education Teacher- PET) नियुक्त किया गया है, जो खेल उपकरणों की देखभाल करने और उनके स्टॉक को बनाए रखने के लिये ज़िम्मेदार होता है।
  • राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा, 2005 (National Curriculum Framework, 2005) के अनुसार, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा को कक्षा I से X तक एक अनिवार्य विषय बनाया गया है।
  • NCERT ने कक्षा VI, VII और VIII के लिये शिक्षक मार्गदर्शिका कक्षा IX के पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के लिये एक अनिवार्य विषय का प्रावधान किया है।
  • केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Examination- CBSE) ने 9वीं-12वीं तक की कक्षा के छात्रों के लिये स्कूलों में स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा हेतु एक सुव्यवस्थित और बेहतर ढंग से डिज़ाइन किया गया है तथा स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा (Health and Physical Education- HPE) कार्यक्रम पेश किया है।
  • स्कूलों को स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के लिये प्रतिदिन एक निश्चित समयावधि निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है। यह कार्यक्रम CBSE के सभी संबद्ध स्कूलों में अनिवार्य किया गया है।

सर्व शिक्षा अभियान

  • इसका कार्यान्‍वयन वर्ष 2000-2001 से किया जा रहा है।
  • यह एक निश्चित समयावधि के भीतर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु भारत सरकार का एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है।
  • इस अभियान को देश भर में राज्य सरकारों की सहभागिता से चलाया जा रहा है।
  • 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा 6-14 वर्ष की आयु वाले सभी बच्चों के लिये प्राथमिक शिक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में निःशुल्क और अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना आवश्यक बना दिया गया है।
  • सर्व शिक्षा अभियान का उद्देश्‍य सार्वभौमिक सुलभता के साथ प्रारंभिक शिक्षा में बालक-बालिका एवं सामाजिक श्रेणी के अंतर को दूर करना तथा अधिगम की गुणवत्‍ता में सुधार करना है।
  • इसके अंतर्गत विविध प्रयास किये जा रहे हैं, जैसे- नए स्‍कूल खोलना तथा वैकल्पिक स्‍कूली सुविधाएँ प्रदान करना, स्‍कूलों एवं अतिरिक्‍त क्लासरूम का निर्माण किया जाना, प्रसाधन-कक्ष एवं पेयजल सुविधा प्रदान करना, नि:शुल्‍क पाठ्य-पुस्‍तकें एवं ड्रेस वितरित करना आदि।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान

(Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan- RMSA)

  • 15-16 वर्ष की आयु के सभी युवाओं को अच्‍छी गुणवत्‍तायुक्‍त माध्‍यमिक शिक्षा उपलब्‍ध कराने, शिक्षा तक पहुँच तथा इसे वहनीय बनाने के उद्देश्‍य से मार्च 2009 में इस योजना की शुरुआत की गई।
  • इस योजना में सभी माध्‍यमिक स्‍कूलों के लिये निर्धारित मानकों का निर्धारण करके महिला-पुरुष, सामाजिक-आर्थिक भेदभाव और नि:शक्‍तता की बाधा को हटाने पर विशेष बल दिया गया है।
  • वर्ष 2013-14 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे- स्‍कूलों में आई.सी.टी., बालिका छात्रावास, माध्‍यमिक स्‍तर पर नि:शक्‍तजनों के लिये समावेशी शिक्षा और व्‍यावसायिक शिक्षा का राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत समावेशन कर दिया गया।

शिक्षक शिक्षा

(Teacher Education- TE)

  • नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (Right to Education- RTE) अधिनियम, 2009 (यह 1 अप्रैल, 2010 से लागू हुआ) के बेहतर कार्यान्वयन के लिये शिक्षकों की शिक्षा को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना गया है।
  • भारत में शिक्षक शिक्षा नीति को समय के हिसाब से निरूपित किया जाता रहा है।
  • यह कई शिक्षा समितियों/आयोगों की विभिन्‍न रिपोर्टों में निहित सिफारिशों पर आधारित है, जैसे-
    • कोठारी आयोग (1966)
    • चट्टोपाध्‍याय समिति (1985)
    • राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (एन पी ई 1986/92)
    • आचार्य राममूर्ति समिति (1990)
    • यशपाल समिति (1993)
    • राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या ढॉंचा (एन सी एफ, 2005)

स्रोत- PIB

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