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भारतीय राजनीति

राष्ट्रपति चुनाव और जम्मू-कश्मीर

  • 06 May 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये

निर्वाचक मंडल, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019

मेन्स के लिये

राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India- ECI) से एक RTI के माध्यम से पूछा गया कि क्या नवगठित जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के लिये निर्वाचक मंडल (Electoral College) का हिस्सा होगा अथवा नहीं।

प्रमुख बिंदु

  • एक छात्र द्वारा दी गई इस RTI में राज्य और केंद्रशासित विधान सभाओं की सूची मांगी गई थी जो राष्ट्रपति के चुनाव के लिये निर्वाचक मंडल का हिस्सा हैं।
  • RTI में चुनाव आयोग से यह भी स्पष्ट करने के लिये भी कहा गया था कि क्या नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर निर्वाचक मंडल का हिस्सा है।
  • मात्र एक पंक्ति में इस RTI का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि इस संदर्भ में जानकारी के लिये आवेदक को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 को देखने के लिये कहा गया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 54

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और सभी राज्यों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली एवं केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

जम्मू-कश्मीर पर अस्पष्टता 

  • इस प्रकार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 54 में केवल दिल्ली और पुदुचेरी का उल्लेख किया गया है, जो राष्ट्रपति के चुनाव में निर्वाचक मंडल का हिस्सा होंगे।
  • इस प्रकार अनुच्छेद 54 में नवगठित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संदर्भ में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया है।
  • वहीं अगस्त 2019 से अस्तित्त्व में आया जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम भी इस संदर्भ में कुछ निर्दिष्ट नहीं करता है कि जम्मू-कश्मीर की विधायिका राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर पाएगी अथवा नहीं।
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की धारा 13 में उल्लेख किया गया है कि जम्मू और कश्मीर विधानमंडल के पास अपने पुडुचेरी विधानमंडल के समान ही शक्तियाँ होंगी।

संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता

  • संविधान के अनुच्छेद 54 में उल्लेखित निर्वाचक मंडल (Electoral College) में नए सदस्यों को शामिल करने के लिये संसद में दो-तिहाई बहुमत और 50 प्रतिशत से अधिक राज्यों द्वारा अनुसमर्थन (Ratification) के माध्यम से एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।
    • ध्यातव्य है कि वर्ष 1992 में 70 वें संविधान संशोधन के माध्यम से दिल्ली और पुदुचेरी को अनुच्छेद 54 के तहत निर्वाचक मंडल के सदस्यों के रूप में शामिल किया गया था।
  • वर्ष 1992 से पूर्व संविधान के अनुच्छेद 54 में केवल संसद के निर्वाचित सदस्यों और राज्यों की विधानसभाएं ही शामिल थीं।
  • आवश्यक है कि चुनाव आयोग नवगठित जम्मू-कश्मीर के संबंध में स्थिति को और अधिक स्पष्ट करे अर्थात जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचन मंडल में शामिल किया जाएगा या नहीं और यदि शामिल किया जाएगा तो किस प्रकार।

राष्ट्रपति का चुनाव

  • राष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 54 में वर्णित एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इस प्रकार जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष तौर पर नहीं करती है , बल्कि उसके द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है। चूँकि जनता राष्ट्रपति का चयन सीधे नहीं करती है, इसलिये इसे परोक्ष निर्वाचन कहा जाता है।
  • भारत में राष्ट्रपति के चुनाव में एक विशेष प्रकार से मतदान होता है। इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम (Single Transferable Vote System) कहते हैं। सिंगल वोट यानी मतदाता एक ही वोट देता है, किंतु वह कई उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता के आधार पर वोट देता है अर्थात् वह बैलेट पेपर पर यह बताता है कि उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी और तीसरी कौन। 
  • इस प्रकार यदि पहली पसंद वाले वोटों से विजेता का फैसला नहीं हो पाता है, तो उम्मीदवार के खाते में वोटर की दूसरी पसंद को नए सिंगल वोट की तरह ट्रांसफर किया जाता है। इसलिये इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट कहा जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि वोट डालने वाले सांसदों और विधायकों के मतों की प्रमुखता भी अलग-अलग होती है। इसे ‘वेटेज़’ भी कहा जाता है। दो राज्यों के विधायकों के वोटों का ‘वेटेज़’ भी अलग-अलग होता है। यह ‘वेटेज़’ राज्य की जनसंख्या के आधार पर तय किया जाता है और यह ‘वेटेज़’ जिस तरह तय किया जाता है, उसे आनुपातिक प्रतिनिधित्त्व व्यवस्था कहते हैं।

स्रोत: द हिंदू

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