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PRANAM आयोग

  • 02 Mar 2019
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में असम की सरकार ने पैरेंट्स रेपॉन्सबिलिटी एंड नॉर्म्स फॉर अकाउंटबिलिटी एंड मॉनिटरिंग (Parents Resposibility And Norms for Accountibility and Monitoring - PRANAM) आयोग का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु

  • PRANAM आयोग राज्य सरकार के कर्मचारियों के बूढ़े माता-पिता और उन पर निर्भर दिव्यांग भाई-बहनों से जुड़ी समस्याओं पर लाए गए ‘PRANAM’ विधेयक से संबंधित मुद्दों की देखभाल के लिये गठित पैनल है।
  • यह देश में अपनी तरह का एकमात्र विधेयक है जिसमें राज्य के सरकारी कर्मचारियों के माता-पिता की उनके बुरे वक़्त में सुरक्षा का प्रयास किया गया है।
  • यह विधेयक राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिये अपने माता-पिता और उन पर निर्भर दिव्यांग भाई-बहनों की देख-भाल को अनिवार्य बनाता है।
  • आयोग को अगर यह सूचना मिलती है कि कर्मचारी अपने माता-पिता या दिव्यांग भाई-बहनों की देखभाल नही कर रहें हैं या उनकी आधारभूत ज़रूरतों को पूरा नहीं कर रहें हैं तो बिल के अनुसार, उनके वेतन का 10–15 प्रतिशत हिस्सा उनके माता-पिता या दिव्यांग भाई-बहनों को हस्तानांतरित कर दिया जाएगा।
  • इस विधेयक से राज्य के लगभग 4 लाख कर्मचारियों के 8 लाख माता-पिता लाभान्वित होंगे।
  • भविष्य में विधेयक में राज्य में कार्यरत निजी क्षेत्र एवं केंद्र के कर्मचारी भी शामिल किये जाएंगे।

स्रोत : टाइम्स ऑफ़ इंडिया

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