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शासन व्यवस्था

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020

  • 14 Feb 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020

मेन्स के लिये:

कीटनाशकों के उपयोग से संबंधित मुद्दे, कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 के निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2020 (Pesticides Management Bill, 2020) को मंज़ूरी दे दी है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • यह विधेयक कीटनाशकों के व्यवसाय को विनियमित करने के लिये लाया जा रहा है।

इस विधेयक की आवश्यकता क्यों?

  • कीटनाशकों का प्रयोग कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों रूपों में प्रभावित करता है, इसलिये कीटनाशकों के व्यवसाय का प्रबंधन करना आवश्यक हो जाता है।
  • ध्यातव्य है कि वर्तमान समय में कीटनाशक व्यवसाय को कीटनाशक अधिनियम, 1968 (Insecticides Act of 1968) के नियमों द्वारा विनियमित किया जाता है। यह कानून अत्यंत पुराना हो गया है और इसमें तत्काल संशोधन की आवश्यकता है।

कीटनाशक विधेयक, 2020 के मुख्य बिंदु

  • कीटनाशक से संबंधित डेटा: यह कीटनाशकों की ताकत और कमज़ोरी, जोखिम और विकल्पों के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्रदान करके किसानों को सशक्त करेगा। ध्यातव्य है कि सभी जानकारियाँ डिजिटल प्रारूप में और सभी भाषाओं में डेटा के रूप में खुले तौर पर उपलब्ध होंगी।
  • मुआवज़ा: यह विधेयक नकली कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले नुकसान के संदर्भ में क्षतिपूर्ति का प्रावधान करता है। ध्यातव्य है कि यह प्रावधान इस विधेयक का सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु है।
    • साथ ही इसमें यह भी वर्णित है कि यदि आवश्यक हुआ तो क्षतिपूर्ति के लिये एक केंद्रीय कोष भी बनाया जाएगा।
  • यह विधेयक जैविक कीटनाशकों के निर्माण एवं उपयोग को भी बढ़ावा देता है।
  • कीटनाशक निर्माताओं का पंजीकरण: इस विधेयक के पारित होने के बाद सभी कीटनाशक निर्माता नए अधिनियम के तहत पंजीकरण हेतु बाध्य होंगे। कीटनाशकों संबंधी विज्ञापनों को विनियमित किया जाएगा ताकि निर्माताओं द्वारा कोई भ्रम न फैलाया जा सके।

भारत में कीटनाशकों का उपयोग:

  • एशिया में भारत कीटनाशकों के उत्पादन में अग्रणी है।
  • घरेलू बाज़ार में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा सबसे अधिक कीटनाशक खपत वाले राज्यों में शामिल हैं।

नकली कीटनाशकों के दुष्प्रभाव

  • ये फसल, मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं।
  • इनकी बिक्री से न केवल कृषकों बल्कि कीटनाशक के वास्तविक निर्माताओं एवं सरकार को नुकसान होता है, ध्यातव्य है कि नकली कीटनाशकों की बिक्री से सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व की हानि होती है।

कीटनाशक अधिनियम, 1968

  • यह अधिनियम मनुष्यों और जानवरों के लिये जोखिम को रोकने के लिये कीटनाशकों के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और उपयोग को विनियमित करने के दृष्टिकोण के साथ अगस्त, 1971 से लागू किया गया था।
  • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड इस अधिनियम की धारा 4 के तहत स्थापित किया गया था और यह कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है।
    • यह बोर्ड केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को अधिनियम के प्रशासन में उत्पन्न तकनीकी मामलों और उसे सौंपे गए अन्य कार्यों को करने की सलाह देता है।

स्रोत: द हिंदू

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