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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-पुर्तगाल संबंध

  • 15 Feb 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये

गोवा मुक्ति दिवस

मेन्स के लिये

भारत-पुर्तगाल संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चर्चा में क्यों?

14 फरवरी 2020 को पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रिबेलो डी सूजा (Marcelo Rebelo de Sousa) भारत की यात्रा पर आए। इस बीच भारत और पुर्तगाल के मध्य 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।

प्रमुख बिंदु

  • पुर्तगाली राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि पुर्तगाल-भारत के संबंध बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। भारत और पुर्तगाल के बीच 500 वर्षों का साझा इतिहास है।
  • दोनों देश संस्कृति, भाषा और वंश परंपरा के माध्यम से गोवा तथा मुंबई के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।
  • भारत-पुर्तगाल द्विपक्षीय कार्ययोजना ने कई गुना विस्तार किया है। दोनों देश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा, नवाचार और स्टार्ट-अप, पानी तथा पर्यावरण सहित अन्य विषयों पर सहयोग कर रहे हैं।
  • आतंकवाद पूरी दुनिया के लिये गंभीर खतरा है। दोनों देशों को इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिये आपसी सहयोग को और मज़बूत करना चाहिये।
  • जलवायु परिवर्तन आज एक दबावकारी वैश्विक चुनौती है। भारत निकट भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में पुर्तगाल के शामिल होने की उम्मीद कर रहा है।
  • दोनों देशों के बीच समुद्री विरासत, समुद्री परिवहन एवं बंदरगाह विकास, प्रवास तथा गतिशीलता, स्टार्ट-अप, बौद्धिक संपदा अधिकार, उत्पादन, योग, राजनयिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, सार्वजनिक नीति, एयरोस्पेस, नैनो-जैव प्रौद्योगिकी और ऑडियो विज़ुअल के क्षेत्र में 14 समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • भारत और पुर्तगाल के बीच लगभग 500 वर्षों का साझा इतिहास है। पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा ने अफ्रीका महाद्वीप के रास्ते मई 1498 में भारत के कालीकट बंदरगाह पर पहुँचकर यूरोप और दक्षिण एशिया के मध्य प्रत्यक्ष मार्ग स्थापित कर दिया।
  • इससे पूर्व वेटिकन और अरब के व्यापारियों द्वारा यूरोप से भारत जाने के लिये भूमध्य सागर से होते हुए अरब सागर का मार्ग चुना जाता था।
  • भारत में पुर्तगाली औपनिवेशिक युग का प्रारंभ 1502 ई में हुआ, जब पुर्तगाली साम्राज्य ने कोल्लम (पूर्व में क्विलोन), केरल में पहला यूरोपीय व्यापारिक केंद्र स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने दीव, दमन, दादरा और नगर हवेली सहित भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कई अन्य परिक्षेत्रों का अधिग्रहण किया।
  • 1510 ई में गोवा पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बना।
  • भारत और पुर्तगाल के बीच आत्मीय संबंध वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद भी अनवरत रूप से ज़ारी हैं, साथ ही दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1949 में होती है।

गोवा विवाद व स्वतंत्रता

  • वर्ष 1946 में समाजवाद के प्रणेता डॉ राम मनोहर लोहिया गोवा पहुँचे, वहाँ पर गोवा की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा हुई। लोहिया ने गोवा में सविनय अवज्ञा आंदोलन किया। आंदोलन का महत्त्व यह था कि गोवा 435 वर्षों में पहली बार स्वतंत्रता के लिये आवाज उठा रहा था।
  • स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सभी रियासतों को मिलाकर भारत को एक संघ राज्य का रूप दिया। वे गोवा को भी भारतीय संघ राज्य क्षेत्र में शामिल करना चाहते थे, परंतु ऐसा नहीं हो पा रहा था क्योंकि 1510 ई से गोवा और दमन एवं दीव में पुर्तगालियों का औपनिवेशिक शासन था।
  • 27 फरवरी, 1950 को भारत सरकार ने पुर्तगाल से भारत में मौजूद कॉलोनियों के संबंध में बातचीत करने का आग्रह किया। लेकिन पुर्तगाल ने बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। पुर्तगाल का कहना था कि गोवा उसका उपनिवेश नहीं है बल्कि महानगरीय पुर्तगाल का हिस्सा है, इसलिये इसे भारत को नहीं दिया जा सकता। इसके चलते भारत के पुर्तगाल के साथ कूटनीतिक संबंध खराब हो गए।
  • वर्ष 1954 में गोवा से भारत के विभिन्न हिस्सों में जाने के लिये वीज़ा लेना ज़रूरी हो गया। इसी बीच गोवा में पुर्तगाल के खिलाफ आंदोलन तेज़ हो गया और वर्ष 1954 में ही दादरा एवं नगर हवेली के कई क्षेत्रों पर भारतीयों ने अपना कब्जा स्थापित कर लिया।
  • भारत सरकार ने एक बार पुनः पुर्तगाली सरकार से बातचीत करने का प्रयास किया परंतु वार्ता के विफल रहने पर गोवा में सामान्य जन-जीवन बहाल करने के उद्देश्य से 18 दिसंबर, 1961 को भारत की सेना ने गोवा, दमन और दीव में हमला कर दिया।
  • 19 दिसंबर, 1961 को पुर्तगाली सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और गोवा को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। प्रतिवर्ष 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस (Goa Libration Day) के रूप में मनाया जाता है।

वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में भारत-पुर्तगाल संबंध आत्मीय व मित्रतापूर्ण हैं। पुर्तगाल बहु क्षेत्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिये अनवरत रूप से समर्थन करता रहा है। पुर्तगाल ने वर्ष 2011-12 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिये भी भारत का समर्थन किया था।
  • अक्तूबर 2005 में पुर्तगाल ने अबू सलेम और मोनिका बेदी को भारत में प्रत्यर्पित किया। भारत में जघन्य आरोपों का सामना करने वाले व्यक्ति का प्रत्यर्पण कराने वाला पुर्तगाल यूरोपीय संघ का पहला देश बना।
  • अक्तूबर 2015 में नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण करने में सहयोग हेतु भारत सरकार के साथ समझौता करने वाला पुर्तगाल यूरोपीय संघ का पहला देश बना।
  • नवंबर 2017 में भारत ने लिस्बन में आयोजित वेब समिट में भाग लिया और हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन के लिये रोडमैप पर चर्चा की।
  • फरवरी 2018 में जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन के विषय पर विमर्श करने के लिये गोवा सरकार का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पुर्तगाल की यात्रा पर गया था।
  • अक्तूबर 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) भारत की यात्रा पर आए।

स्रोत: PIB

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