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परिवार पहचान-पत्र और निजता संबंधी चिंताएँ

  • 08 Feb 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में हरियाणा राज्य द्वारा शुरू की गई परिवार पहचान-पत्र (Parivar Pehchan Patra- PPP) योजना को लेकर निजता से संबंधित कुछ मुद्दे सामने आए हैं।

  • यद्यपि योजना के तहत नामांकन कराना स्वैच्छिक है, लेकिन विभिन्न आवश्यक सेवाओं का लाभ पाने के लिये इस योजना से जुड़े होने की पूर्व शर्त के चलते योजना को लेकर इस प्रकार के मुद्दे सामने आए हैं।

प्रमुख बिंदु

वर्तमान मुद्दा:

  • विवादास्पद स्थिति: भले ही इस योजना के तहत नामांकन कराना स्वैच्छिक है लेकिन यदि कोई नागरिक अथवा परिवार हरियाणा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही किसी सेवा का लाभ उठाना चाहता है तो उसके लिये परिवार पहचान-पत्र की आवश्यकता होगी। इस प्रकार की शर्त योजना में नामांकन कराने अथवा न कराने के संदर्भ में राज्य के निवासियों को न के बराबर विकल्प प्रदान करती है।
  • डेटा का दुरुपयोग: भारत में गोपनीयता कानूनों की अनुपस्थिति या PPP को तैयार करने हेतु जिन मानक संचालन प्रक्रियाओं का अभ्यास किया जा रहा है उनमें डेटा सुरक्षा से संबंधित निर्देशों की अनुपस्थिति के चलते इस समग्र प्रक्रिया में एकत्रित डेटा के दुरुपयोग की संभावनाएँ प्रबल हो जाती हैं।
    • इसके अलावा इस योजना के लिये जितनी अधिक मात्रा में जानकारी/डेटा की मांग की जा रही है, वह एक विशेष सेवा की उपलब्धता हेतु आवश्यक डेटा से अधिक है।

परिवार पहचान-पत्र (Parivar Pehchan Patra- PPP) योजना:

  • पृष्ठभूमि: राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित योजनाओं, सेवाओं और लाभों की ’पेपरलेस’ और ‘फेसलेस’ उपलब्धता के दृष्टिकोण के साथ हरियाणा सरकार ने जुलाई 2019 में PPP योजना की औपचारिक शुरुआत की थी। 
    • इसके तहत प्रत्येक परिवार को एक इकाई/यूनिट माना जाता है तथा उन्हें 8 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाती है जिसे पारिवारिक ID कहा जाता है। 
    • पारिवारिक ID छात्रवृत्ति, सब्सिडी और पेंशन जैसी स्वतंत्र योजनाओं से भी जुड़ी होती है, ताकि स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
    • यह विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी और पेंशन के लाभार्थियों के स्वचालित चयन को भी सक्षम बनाता है।
  • उद्देश्य: परिवार पहचान-पत्र (PPP) का प्रमुख उद्देश्य हरियाणा में सभी परिवारों का प्रामाणिक, सत्यापित और विश्वसनीय डेटा तैयार करना है।

PPP के लाभ:

  • परिवार एक इकाई के रूप में: केंद्र सरकार के आधार कार्ड में व्यक्तिगत विवरण होता है और यह पूरे परिवार को एक इकाई के रूप में प्रस्तुत नहीं करता है।
    • हालाँकि राशन कार्ड प्रणाली भी प्रचलन में है लेकिन यह अद्यतन नहीं है और इसमें परिवार के बारे में पर्याप्त जानकारी भी उपलब्ध नहीं होती है।
  • सेवाओं का बाधा रहित वितरण: हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड और जन्म, मृत्यु, जाति एवं आय प्रमाण-पत्र आदि सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं का वितरण PPP के माध्यम से किया जा रहा है।
  • प्रवासी श्रमिकों के लिये उपयोगी: PPP योजना के तहत उन लोगों को भी पंजीकरण ID प्रदान की जाती है जो हरियाणा में रहते हैं लेकिन राज्य के निवासी के रूप में आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।
    • यह प्रवासी श्रमिकों के लिये विभिन्न लाभों जैसे- उचित मूल्य की दुकानों से राशन, विभिन्न श्रमिक योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ, स्ट्रीट वेंडर के सहायतार्थ चलाई जा रही योजनाओं का लाभ आदि प्रदान करने में राज्य सरकार को सक्षम बनाता है।

पीपीपी बनाम आधार

  • आधार एक व्यक्ति को इकाई को रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि PPP एक परिवार को इकाई के रूप में प्रस्तुत करता है। यहाँ PPP आधार से अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि सरकारों द्वारा चलाई जा रही अधिकाँश योजनाएँ परिवारों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाती हैं, न कि व्यक्ति को।
    • उदाहरण के लिये राशन कार्ड एक परिवार हेतु उपलब्ध होता है लेकिन परिवार विभिन्न सदस्यों (18 वर्ष से अधिक आयु होने पर) में विभाजित हो सकता है और यह कहा जा सकता है कि वे अलग हैं तथा सभी व्यक्तियों के अधिकार भी अलग-अलग हैं।

आगे की राह

  • PPP को धोखाधड़ी वाले लेन-देन पर रोक लगाने और स्वामित्व को स्पष्ट करने के उद्देश्य से  भूमि और संपत्तियों के सरकारी डेटाबेस रिकार्ड्स से भी जोड़ा जा सकता है।
  • इसके अलावा योजना और इसके लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये सरकार एक सामूहिक अभियान शुरू कर सकती है।
  • सरकार को परिवार पहचान-पत्र (PPP) योजना के तहत एकत्र किये जा रहे डेटा की सुरक्षा को मज़बूत करने हेतु भी उपाय करने चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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