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सामाजिक न्याय

शिक्षक एवं शिक्षण पर पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन

  • 20 Sep 2019
  • 11 min read

चर्चा में क्यों?

मानव संसाधन विकास मंत्रालय शिक्षक एवं शिक्षण पर पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन (Pandit Madan Mohan Malaviya National Mission on Teachers and Teaching- PMMMNMTT) नामक एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना लागू कर रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस योजना का उद्देश्य प्रदर्शन मानकों की स्थापना और शिक्षकों के अभिनव (Innovative) शिक्षण तथा व्यावसायिक विकास के लिये शीर्ष श्रेणी की संस्थागत सुविधाओं का निर्माण करके शिक्षकों के एक मज़बूत पेशेवर कैडर का निर्माण करना है।
  • वर्तमान केंद्रीय, राज्य और डीम्ड विश्वविद्यालय/शैक्षिक संस्थान योजना के तहत केंद्र के विभिन्न घटकों के रूप में अनुमोदित हैं तथा निजी संस्थानों के शिक्षक विभिन्न क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के साथ-साथ प्रशिक्षण में भी भाग ले सकते हैं।
  • इसके अलावा अर्पित (Annual Refresher Programme in Teaching- ARPIT) और स्वयं (SWAYAM) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके उच्च पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी पहल को कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसके लिये राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों (National Resource Centres- NRCs) के रूप में अनुशासन-विशिष्ट संस्थानों की पहचान की गई है तथा उन्हें अधिसूचित किया गया है।

एनुअल रिफ्रेशर प्रोग्राम इन टीचिंग (अर्पित)

(Annual Refresher Programme in Teaching-ARPIT)

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दिसंबर 2018 में शिक्षण हेतु वार्षिक रिफ्रेशर कार्यक्रम लॉन्च किया था।
  • अर्पित (एनुअल रिफ्रेशर प्रोग्राम इन टीचिंग) एक ऑनलाइन पहल है जिसके द्वारा MOOCs (Massive Open Online Courses) प्लेटफॉर्म स्वयं (SWAYAM) का उपयोग करके 15 लाख उच्च शिक्षा के शिक्षक ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
  • इसके लिये राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों (National Resource Centers-NRCs) की पहचान की गई जो ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री को तैयार करने में सक्षम हैं।
  • राष्ट्रीय विशिष्ट केंद्र संशोधित पाठ्यक्रम को संचालित करने के लिये अनुशासन, नए और उभरते रुझानों, शैक्षणिक सुधार तथा कार्यप्रणाली में नवीनतम विकास पर ध्यान देने के साथ ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने का काम करते हैं।
  • उच्च शिक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिये विभिन्न योजनाओं जैसे- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (Rashtriya Uchchatar Shiksha Abhiyan- RUSA), ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर एकेडमिक नेटवर्क (Global Initiative for Academics Network- GIAN) तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (Technical Education Quality Improvement Programme- TEQIP) का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर एकेडमिक नेटवर्क

(Global Initiative for Academics Network- GIAN)

  • भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश में उच्चतर शिक्षा के संवर्द्धन हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों की प्रतिभा के प्रयोग के लिये ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क नामक एक कार्यक्रम की शुरुआत की है।
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से वैश्विक उत्कृष्टता का भारतीय संसाधनों के परिप्रेक्ष्य में प्रयोग करके भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता की गुणवत्ता में सुधार करना है।

तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम

(Technical Education Quality Improvement Programme- TEQIP)

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दिसंबर, 2002 में भारत सरकार के तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
  • इसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना और संस्थानों की मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाना एवं गतिशील बनाना है।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा उच्च तथा तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये कई अन्य पहलें भी की जा रही हैं।
  • स्कूली शिक्षा के संबंध में शिक्षकों की भर्ती और सेवा शर्तें मुख्य रूप से राज्य/संघ राज्य सरकारों के प्रशासनिक क्षेत्र में होती हैं। केंद्र सरकार, केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा योजना के माध्यम से इन्हें सहायता प्रदान करती है।
  • केंद्र सरकार द्वारा शिक्षकों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिये नियमित रूप से सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण, नए भर्ती किये गए शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण और स्कूल प्रबंधन समितियों/स्कूल प्रबंधन विकास समितियों के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी जैसे कदम उठाए गए हैं।
  • ब्लॉक संसाधन केंद्र/क्लस्टर संसाधन केंद्र और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को स्कूलों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली की स्थापना जैसी डिजिटल तकनीक का उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training- NCERT) ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के प्रदर्शन और उपस्थिति को ट्रैक करने हेतु प्राथमिक शिक्षा के लिये प्रदर्शन संकेतक (Performance Indicators- PINDICS) विकसित किये हैं। NCERT द्वारा शिक्षकों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिये राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों के साथ PINDICS को साझा किया जाएगा।

प्रदर्शन संकेतक (Performance Indicators- PINDICS)

  • इसका उपयोग शिक्षकों के प्रदर्शन और प्रगति का आकलन करने के लिये किया जाता है। इसमें प्रदर्शन मानक, विशिष्ट मानक और प्रदर्शन संकेतक शामिल हैं।
  • प्रदर्शन मानक वे क्षेत्र हैं जिनमें शिक्षक अपने कार्यों और ज़िम्मेदारियों को निभाते हैं, साथ ही प्रदर्शन मानकों के तहत कुछ विशिष्ट कार्य हैं जिन्हें शिक्षकों द्वारा किये जाने की अपेक्षा की जाती है।
  • PINDICS, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 24, 29 और सर्व शिक्षा अभियान फ्रेमवर्क वर्ष 2011 में स्कूलों के लिये मानकों को निर्दिष्ट करने वाली अनुसूची पर आधारित है।
  • NCERT के वर्ष 2010-11 में किये गए अध्ययन इन-सर्विस एजुकेशन फ़ॉर टीचर्स (In-service Education for Teachers- INSET) से प्राप्त फीडबैक डेटा का उपयोग करके इसे और बेहतर ढंग से तैयार किया गया है।
  • निम्नलिखित प्रदर्शन मानकों की पहचान की गई है-
    • बच्चों के लिये डिज़ाइनिंग अधिगम अनुभव (Designing Learning Experiences)
    • विषयवस्तु का ज्ञान और समझ (Knowledge and Understanding of Subject Matter)
    • सीखने की सुविधा हेतु रणनीतियाँ (Strategies for Facilitating Learning)
    • पारस्परिक संबंध (Interpersonal Relationship)
    • व्यावसायिक विकास (Professional Development)
    • स्कूल विकास (School Development)
    • शिक्षक की उपस्थिति (Teacher Attendance)
  • भारत में शिक्षको के लिये कार्यक्रमों में गुणात्मक सुधार लाने के लिये चार वर्षीय एकीकृत B.Ed पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पाठ्यक्रम के लिये तैयार किये गए मॉडल पाठ्यक्रम में लिंग, समावेशी शिक्षा, सूचना व संचार तकनीक, योग, वैश्विक नागरिकता शिक्षा (Global Citizenship Education- GCED), स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे महत्त्वपूर्ण पहलू शामिल किये गए हैं।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय और शिक्षक शिक्षा के लिये राष्ट्रीय परिषद (National Council for Teacher Education- NCTE) ने शिक्षकों हेतु समर्पित डिजिटल बुनियादी ढाँचा DIKSHA (Digital Infrastucture for Knowledge Sharing) विकसित किया है, जिसका उद्देश्य देश के स्कूली शिक्षकों की नवीन तकनीक आधारित समाधानों तक पहुँच स्थापित करना है।

DIKSHA (Digital Infrastucture for Knowledge Sharing):

  • DIKSHA कार्यक्रम को मानव संसाधन विकास मंत्रालय और शिक्षक शिक्षा के लिये राष्ट्रीय परिषद (National Council for Teacher Education) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
  • भारत में कई शिक्षक अपनी कक्षाओं में नवीन तकनीक आधारित समाधानों का निर्माण और उपयोग कर रहे हैं।

स्रोत: pib

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