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पशु आधार

  • 09 Aug 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

भारत में दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी है और विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक भी है। वर्तमान में भारत में पशुधन की जानकारी से संबंधित एक विशाल डेटाबेस बनाया जा रहा है। यह पशुओं के लिये एक UID या पशु आधार (Pashu Aadhaar) जारी करता है। अभी तक लगभग 22.3 मिलियन गायों और भैंसों के लिये UIDs जारी किये जा चुके हैं।

प्रमुख बिंदु

  • पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य के लिये सूचना नेटवर्क (Information Network for Animal Productivity and Health-INAPH) के लिये नोडल एजेंसी ‘राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड’ (National Dairy Development Board-NDDB) है।
  • आधार के साथ समानताएँ हैं:
  1. INAPH भी प्रत्येक पशु को एक विशिष्ट यादृच्छिक पहचान संख्या प्रदान करता है।
  2. यह भारत के पशुधन संसाधनों के प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिये उपयोगी डेटा एवं सूचनाओं का संकलन करता है।
  3. पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह पशुओं का सबसे बड़ा वैश्विक डेटाबेस होगा।
  4. इसमें निहित डेटा में पशुओं की नस्ल और वंशावली, दूध उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI), टीकाकरण और पोषण इतिहास से संबंधित समस्त जानकारी शामिल होगी।
  • INAPH परियोजना के पहले चरण में देश की 94 मिलियन ‘दूध देने वाली’ मादा गायों (अर्थात् ऐसी गाय, जो वर्तमान में दूध उत्पादित करने की अवस्था में नहीं है) और भैंसों की आबादी को शामिल किया जाएगा।
  • इसमें सभी स्वदेशी, क्रॉसब्रीड के साथ-साथ विदेशी दुधारू पशुओं को भी शामिल किया गया है।
  • कुछ समय बाद इसे सभी गोजातीय पशुओं तक विस्तारित किया जाएगा जिनमें नर, बछड़े और बछिया, बूढ़े और आवारा पशु भी शामिल हैं।
  • प्रत्येक पशु के कान पर एक 12-अंकीय UID वाला थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन (Thermoplastic Polyurethane) टैग लगाया जाएगा।

चुनौतियाँ

कम उत्पादकता, खराब पशु स्वास्थ्य, आर्थिक रूप से कमज़ोर बनाने वाली बीमारियों की व्यापकता और गैर-वैज्ञानिक और उपाख्यान (Anecdotal) प्रणाली के आधार पर जीनोम चयन इसकी प्रमुख चुनौतियाँ है।

उद्देश्य

  • पशुओं की उचित पहचान तथा उनके उत्पादों चाहे वह दूध हो या मांस के बारे में, जानकारी प्राप्त करने की क्षमता को सक्षम बनाना।
  • यदि भारतीय डेयरी और पशुधन उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत स्वास्थ्यकर एवं फाइटोसैनेटरी मानकों का अनुपालन करना है, तो इसके लिये एक मज़बूत तथा व्यापक पशु सूचना प्रणाली, जो उत्पादों को उनके स्रोत के विषय में जानने की अनुमति देती है, का होना अनिवार्य है।
  • स्वस्थ या प्रीमियम पशुओं से प्राप्त उत्पादों को रोगग्रस्त या गैर-विशिष्ट पशुओं से प्राप्त उत्पादों से अलग किया जा सकता है।
  • रोग-मुक्त, उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले बैलों और दूध उत्पादक गायों की स्वदेशी नस्लों के प्रजनन के लिये इस डेटा का उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में स्वदेशी नस्लों की दूध उत्पादकता बहुत कम हैं।

आगे की राह

अभी तक समग्र पशु उत्पादकता को बढ़ाने के मामले में कृत्रिम गर्भाधान से सीमित सफलता ही मिली है। इसका एक प्रमुख कारण कृत्रिम गर्भाधान के लिये निम्न-आनुवांशिक गुणों वाले वीर्य का उपयोग किया जाना है। अधिकांश गायों या दाता बैल की AI स्थिति का खराब रिकॉर्ड एक अन्य कारण है, जिसके चलते कृत्रिम गर्भाधान में समस्या आती है। प्रत्येक पशु के गर्भाधान के इतिहास पर अधिक विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होने से AI कार्यक्रम को सफल बनाया जा सकेगा। प्रत्येक पशु की पोषण संबंधी जानकारी मिलने से पशुओं के लिये प्रभावी पोषण प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस डेटाबेस को अगली श्वेत क्रांति को प्रोत्साहित करने और पशुधन को ग्रामीण समृद्धि का माध्यम बनाने के एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाना चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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