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जूट सामग्री में अनिवार्य पैकेजिंग के लिये मानदंड

  • 30 Oct 2020
  • 9 min read

प्रीलिम्स के लिये:

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस, जूट आईसीएआरई, राष्‍ट्रीय जूट बोर्ड   

मेन्स के लिये:

जूट सामग्री में अनिवार्य पैकेजिंग के लिये मानदंड

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने शत-प्रतिशत खाद्यान्‍नों एवं 20% चीनी को अनिवार्य रूप से विविध प्रकार के जूट बोरों में पैक किये जाने की मंज़ूरी दी।

प्रमुख बिंदु: 

  • भारत सरकार ने जूट पैकिंग सामग्री अधिनियम, 1987 [Jute Packaging Material (JPM) Act, 1987] के तहत अनिवार्य रूप से पैकिंग किये जाने के इस मानक को विस्‍तारित किया है।
  • इसके अलावा यह भी अनिवार्य किया गया है कि खाद्यान्‍नों की पैकिंग के लिये शुरू में 10% जूट बोरों की खरीद ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (Government E-Marketplace - GEM) पोर्टल’ पर ‘रिवर्स ऑक्शन’ के ज़रिये होगी। 
  • अन्य प्रावधान: अगर जूट पैकिंग सामग्री की आपूर्ति में कोई कमी या व्‍यवधान आता है या किसी तरह की कोई प्रतिकूल स्थिति पैदा होती है तो कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) अन्‍य संबद्ध मंत्रालयों के साथ मिलकर उपबंधों में छूट दे सकता है और खाद्यान्‍नों की अधिकतम 30% की पैकिंग किये जाने का निर्णय ले सकता है।

लाभ:

  • भारत सरकार के इस निर्णय से देश के पूर्वी एवं पूर्वोत्तर विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा के किसानों तथा श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
  •  चीनी को विविध प्रकार के जूट बोरों में पैक किये जाने के निर्णय से जूट उद्योग को लाभ होगा।
  • देश में कच्‍चे जूट के घरेलू इस्‍तेमाल और जूट पैकिंग सामग्री को बढ़ावा मिलेगा।
  • गौरतलब है कि जूट उद्योग मुख्‍यत: सरकारी क्षेत्र पर निर्भर है और प्रतिवर्ष खाद्यान्‍नों की पैकिंग के लिये जूट बोरों की खरीद पर भारत सरकार 7500 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि  खर्च करती है। 
    • यह जूट क्षेत्र में मांग को जारी रखने और इस क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों एवं किसानों की आजीविका के लिये भारत सरकार की ओर से उठाया गया एक सकारात्मक कदम है।

भारत में जूट आधारित अर्थव्यवस्था: 

  • जूट क्षेत्र पर लगभग 3.7 लाख श्रमिक और कई लाख किसान परिवारों की आजीविका निर्भर है जिसे देखते हुए भारत सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिये निम्नलिखित संगठित प्रयास कर रही है। 
    • कच्‍चे जूट के उत्‍पादन एवं मात्रा को बढ़ाना।
    • जूट क्षेत्र का विविधीकरण करना।
    • जूट उत्‍पादों की सतत् मांग को बढ़ावा देना। 

जूट क्षेत्र को प्रदान की गई अन्य प्रकार की सहायता:    

  • जूट आईसीएआरई (Jute ICARE)
    • भारत सरकार ने कच्‍चे जूट की उत्‍पादकता एवं गुणवत्‍ता में सुधार लाने के लिये एक विशेष कार्यक्रम ‘जूट आईसीएआरई’ (Jute ICARE) शुरू किया है। 
      • इसके तहत सरकार विभिन्‍न प्रकार की कृषि पद्धतियों को उपलब्‍ध कराकर 2 लाख जूट किसानों की मदद कर रही है जिसमें बीजों की पंक्तियों में बुवाई, नोकदार निराई-उपकरण का प्रयोग करके खरपतवार प्रबंधन (Weed Management) और गुणवत्‍ता युक्‍त प्रमाणित बीजों का वितरण तथा सूक्ष्‍म जीवों की मदद से कच्‍चे जूट को सड़ाने की प्रक्रिया शामिल है। 
      • भारत सरकार के इन मध्‍यवर्ती प्रयासों से कच्‍चे जूट की गुणवत्ता और उत्‍पादन में काफी इज़ाफा हुआ है और जूट किसानों की आय बढ़कर 10,000 रुपए प्रति हेक्‍टेयर हो गई है।
  • प्रमाणित बीजों के वितरण से संबंधित प्रयास: हाल ही में भारतीय जूट निगम (Jute Corporation of India) ने वाणिज्यिक आधार पर 10,000 क्विंटल प्रमाणित बीजों के वितरण के लिये राष्ट्रीय बीज निगम (National Seeds Corporation) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किये हैं। 
    • तकनीकी उन्‍नयन और प्रमाणित बीजों के वितरण से जूट फसलों की गुणवत्ता एवं उत्‍पादकता में बढ़ोतरी होगी और इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
  • जूट क्षेत्र का विविधीकरण: जूट क्षेत्र के विविधीकरण को बढ़ावा देने के मद्देनज़र राष्‍ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board) ने राष्‍ट्रीय डिज़ाइन संस्‍थान (National Institute of Design) के साथ एक समझौता किया है और इसी के अनुरूप गांधी नगर (गुजरात) में एक जूट डिज़ाइन प्रकोष्‍ठ (Jute Design Cell) खोला गया है। 

राष्‍ट्रीय जूट बोर्ड (National Jute Board):

  • भारतीय जूट के प्रचार के लिये राष्ट्रीय जूट बोर्ड (NJB) सर्वोच्च निकाय है।
  • राष्ट्रीय जूट बोर्ड अधिनियम-2008 (National Jute Board Act-2008) के तहत स्थापित इस बोर्ड की अध्यक्षता भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के सचिव द्वारा की जाती है।
  • जूट विनिर्माता विकास परिषद (Jute Manufacturers Development Council) का गठन वर्ष 1984 में एक सांविधिक निकाय के रूप में किया गया था किंतु अब इसे राष्ट्रीय जूट बोर्ड में समाहित कर दिया गया है।

भारतीय जूट निगम लिमिटेड (Jute Corporation of India Ltd.):

  • भारतीय जूट निगम लिमिटेड कोलकाता में स्थित भारत सरकार की एक एजेंसी है जो जूट की खेती करने वाले राज्यों को न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं सहायता प्रदान करती है।
  • इसका गठन वर्ष 1971 में हुआ था।  
  • इसके अलावा विभिन्‍न राज्‍य सरकारों द्वारा खासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में जूट जियो टेक्‍सटाइल्‍स (Jute Geo Textiles) और एग्रो टेक्‍सटाइल्‍स (Agro-Textiles) को बढ़ावा दिया गया है। इसमें केंद्रीय सड़क परिवहन और जल संसाधन मंत्रालय की भी सहभागिता है। 
  • जूट उत्पाद के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी: जूट क्षेत्र में मांग को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने बांग्‍लादेश एवं नेपाल से जूट उत्पादों के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई है और यह 5 जनवरी, 2017 से प्रभावी है।
  • जूट स्‍मार्ट (Jute SMART) ई- कार्यक्रम: जूट क्षेत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने दिसंबर 2016 में जूट स्‍मार्ट ई-कार्यक्रम की शुरुआत की है जिसमें बी-ट्विल सेकिंग (B-Twill sacking) किस्‍म के टाट के बोरों की खरीद के लिये सरकारी एजेंसियों द्वारा एक समन्वित प्‍लेटफॉर्म उपलब्‍ध कराया गया है। 
    • इसके अलावा भारतीय जूट निगम द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्‍य और वाणिज्यिक अभियानों के तहत जूट की ऑनलाइन खरीद के लिये जूट किसानों को 100% धनराशि हस्‍तांतरित की जा रही है।

स्रोत: पीआइबी

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