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जैवविविधता और पर्यावरण

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान - एशिया

  • 29 Aug 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये

NDC- TPA कार्यक्रम, ग्रीनहाउस गैस, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान

मेन्स के लिये

कार्बनीकृत परिवहन संबंधी पहलों की आवश्यकता

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नीति आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC)- एशिया के लिये परिवहन पहल (TPA) के भारत घटक को लॉन्च किया है।

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान - एशिया के लिये परिवहन पहल (NDC- TPA)

    • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान - एशिया के लिये परिवहन पहल (NDC- TPA) का उद्देश्य भारत, वियतनाम और चीन में गैर कार्बनीकृत परिवहन को प्रोत्साहन देने हेतु एक व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
    • इस कार्यक्रम की अवधि 4 वर्ष की है और यह कार्यक्रम विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय कर तमाम तरह के हस्तक्षेपों के माध्यम से भारत तथा अन्य भागीदार देशों को अपने दीर्घकालीन लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगा।
  • कार्यान्वयन

    • यह एक संयुक्त कार्यक्रम है, जिसे जर्मनी के पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण एवं परमाणु सुरक्षा मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (International Climate Initiative-IKI) का समर्थन प्राप्त है और इस कार्यक्रम को 7 अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के समूह द्वारा लागू किया जाएगा।
    • इस कार्यक्रम के भारतीय घटक को कार्यान्वित करने के लिये भारत सरकार की ओर से नीति आयोग कार्यान्वयन भागीदार के रूप में कार्य करेगा।
  • लक्ष्य

    • ग्रीनहाउस गैस और परिवहन मॉडलिंग की क्षमता को मज़बूत करना
    • देश में गैरकार्बनीकृत परिवहन हेतु हितधारकों के लिये संवाद मंच की शुरुआत करना
    • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिये तकनीकी सहयोग प्रदान करना
    • जलवायु परिवर्तन से निपटने में परिवहन क्षेत्र संबंधी कार्यों का वित्तपोषण करना
    • इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicle-EV) की मांग और आपूर्ति नीति पर नीतिगत सिफारिश करना
  • लाभ

    • यह कार्यक्रम देश में इलेक्ट्रिक गतिशीलता (Electric Mobility) को बढ़ावा देने में मदद करेगा
    • इस कार्यक्रम से नीतिगत विकास, इलेक्ट्रिक वाहन बुनियादी ढाँचे के विकास और भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े स्तर पर प्रयोग को समर्थन मिलेगा।
  • भारतीय परिवहन क्षेत्र

    • भारत में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रोड नेटवर्क मौजूद है जो परिवहन के सभी माध्यमों द्वारा अधिकतम ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन करता है।
    • तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के चलते वाहनों की बिक्री भी तेज़ी से बढ़ रही है और वर्ष 2030 तक कुल वाहनों की संख्या में दोगुनी वृद्धि होने की संभावना है।
    • ऐसी स्थिति में पेरिस समझौते के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये भारत के परिवहन क्षेत्र के लिये कार्बनीकृत परिवहन की नीति को अपनाना आवश्यक है।

स्रोत: पी.आई.बी

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