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जैवविविधता और पर्यावरण

लिटिल अंडमान आईलैंड’ के लिये नीति आयोग की योजना

  • 02 Feb 2021
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नीति आयोग ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौजूद ‘लिटिल अंडमान आईलैंड’ के लिये 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट ऑफ लिटिल अंडमान आईलैंड- विज़न डॉक्यूमेंट' के नाम से एक सतत् विकास योजना जारी की है, जिसके कारण पर्यावरण संरक्षणवादियों के मध्य गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।

  • इससे पूर्व वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ‘समुद्री एवं स्टार्टअप हब’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।

Andaman-Nicobar-Islands

प्रमुख बिंदु

उद्देश्य

  • इस नीति का उद्देश्य द्वीपों की रणनीतिक अवस्थिति और प्राकृतिक विशेषताओं का लाभ प्राप्त करना है।
    • ये द्वीप हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी रणनीतिक अवस्थिति के कारण भारत की सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण हैं।
    • बेहतर अवसंरचना और कनेक्टिविटी के माध्यम से भारत को इन द्वीपों में अपनी सैन्य और नौसैनिक ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी।

योजना

  • योजना के तहत एक नए ग्रीनफील्ड तटीय शहर के निर्माण की नीति बनाई गई है, जिसे एक मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा और यह सिंगापुर तथा हॉन्गकॉन्ग जैसे शहरों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करेगा।

तीन ज़ोन: योजना के तहत विकास कार्यों को तीन ज़ोन्स में विभाजित किया गया है:

  • ज़ोन 1
    • यह लिटिल अंडमान आईलैंड के पूर्वी तट के साथ 102 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
    • यह एक महानगर होने के साथ ही आर्थिक दृष्टि से संपन्न क्षेत्र होगा जिसमें एयरोसिटी, पर्यटन तथा अस्पताल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
  • ज़ोन 2
    • यह आदिम वन के 85 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
    • यह एक लेज़र ज़ोन है, जिसमें एक मूवी मेट्रोपोलिज़, आवासीय क्षेत्र तथा पर्यटन विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (SEZ) शामिल किये जा सकते हैं। 
  • ज़ोन 3
    • यह आदिम वन के 52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
    • यह एक प्राकृतिक ज़ोन होगा जिसे तीन विशिष्ट क्षेत्रों- अद्वितीय फॉरेस्ट रिसोर्ट, प्राकृतिक चिकित्सीय क्षेत्र/खंड तथा प्राकृतिक आश्रय में विभाजित किया जाएगा। ये सभी पश्चिमी तट पर स्थित होंगे।

परिवहन विकास

  • विमान के सभी प्रकारों के लिये एक विश्वव्यापी हवाई अड्डा इस योजना के केंद्र में है, क्योंकि विकास के लिये वैश्विक हवाई अड्डा होना महत्त्वपूर्ण है।
  • द्वीप पर मौजूद एकमात्र जेटी (Jetty) का विस्तार किया जा सकता है।
  • पूर्व से पश्चिम तक तटरेखा के समानांतर 100 किमी. ग्रीनफील्ड रिंग हाइवे का निर्माण किया जा सकता है।

चुनौतियाँ

  • भारत के अन्य हिस्सों और विश्व के कई प्रमुख शहरों के साथ अच्छी कनेक्टिविटी का अभाव।
  • संवेदनशील जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र तथा सर्वोच्च न्यायालय की कुछ अधिसूचनाएँ भी क्षेत्र के विकास में बड़ी बाधा हैं।
  • एक अन्य प्रमुख मुद्दा स्वदेशी जनजातियों की उपस्थिति और उनके कल्याण की चिंता से संबंधित है।
  • लिटिल अंडमान का 95% भाग वनाच्छादित है, इन वनों का एक बड़ा हिस्सा प्राचीन सदाबहार प्रकार का है। द्वीप का लगभग 640 वर्ग किमी. का भाग भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत रिज़र्व फॉरेस्ट के रूप में है और लगभग 450 वर्ग किमी. का क्षेत्र ओंगे ट्राइबल रिज़र्व के रूप में संरक्षित है, इन वनों की सामाजिक-पारिस्थितिक-ऐतिहासिक स्थिति के कारण इनका अधिक महत्त्व है।

योजना में प्रस्तावित समाधान:

  • प्रस्ताव में इस भूमि के 240 वर्ग किमी. (35%) क्षेत्र को सम्मिलित करने का प्रस्ताव रखा गया है और मौजूदा विकल्प इस प्रकार हैं-
    • आरक्षित वन के 32% क्षेत्र को अनारक्षित करना और जनजातीय रिज़र्व के 31% या 138 वर्ग किमी. क्षेत्र को अनधिसूचित करना। 
    • यदि जनजातीय समूह इस योजना में बाधक बनते हैं, तो प्रस्ताव के अनुसार उन्हें द्वीप के अन्य हिस्सों में स्थानांतरित किया जा सकता है।

प्रस्ताव में निहित समस्याएँ:

  • यह लिटिल अंडमान में एक राष्ट्रव्यापी पार्क/वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण की बात करता है, जबकि यहाँ वर्तमान में मानवीय अस्तित्व नहीं है तथा इस स्थान की भू-वैज्ञानिक भेद्यता की भी पूर्ण जानकारी नहीं है, यह क्षेत्र वर्ष 2004 में सुनामी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ था।
    • सुनामी से लिटिल अंडमान इस कदर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है कि वहाँ का सिर्फ जलीय ढाँचा ही नहीं बल्कि उसकी भौतिक स्थिति भी बदल गई। 
    • इस प्रस्ताव में न तो कोई वित्तीय विवरण है और न ही वनों एवं अन्य पारिस्थितिक संपदाओं पर इसके प्रभावों का आकलन प्रदान किया गया है।
    • पश्चिमी तट पर पश्चिमी खाड़ी में प्रस्तावित ‘नेचर रिसॉर्ट’ में थीम रिसॉर्ट्स, फ्लोटिंग/अंडरवाटर रिसॉर्ट्स एवं समुद्र तटीय रिसॉर्ट्स आदि का निर्माण प्रस्तावित है।
    • वर्तमान में यह एक दुर्गम क्षेत्र विशाल ‘लैदरबैक सी टर्टल’ का प्रजनन स्थल है।

वन विभाग की चिंताएँ:

  • एक नोट में लिटिल अंडमान के प्रभागीय वन अधिकारी ने पारिस्थितिक संवेदनशीलता, स्वदेशी अधिकारों और भूकंप एवं सुनामी के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का सुझाव दिया है।
  • उन्होंने उल्लेख किया है कि वन भूमि के इतने बड़े विभाजन से पर्यावरणीय नुकसान होगा जिससे काफी अधिक क्षति होगी।
  • साथ ही विभिन्न जंगली जानवरों की आवासीय विशेषताएँ प्रभावित होंगी।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट न होने के कारण प्रस्ताव का मूल्यांकन भी नहीं किया जा सकता।

लिटिल अंडमान आईलैंड:

  • यह द्वीप लिटिल अंडमान समूह का हिस्सा है (लिटिल अंडमान ग्रेट अंडमान के समकक्ष है)। यह अंडमान का चौथा सबसे बड़ा द्वीप है।
    • यह अपने मुख्य गाँव के नाम से प्रसिद्ध है जो कि इसकी सबसे बड़ी बस्ती-हुत खाड़ी (Hut Bay) है।
  • जनजातियाँ
    • पोर्ट ब्लेयर से लगभग 120 किलोमीटर की सामुद्रिक दूरी पर स्थित यह द्वीप वर्ष 1957 में एक आदिवासी रिज़र्व बन गया है।
    • यह ओंगे जनजाति का निवास स्थान माना जाता है।
  • अवस्थिति एवं यातायात:
    • द्वीपसमूह के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘हट बे जेट्टी’ (Hut Bay Jetty) राजधानी पोर्ट ब्लेयर से इस द्वीप में आने वाले जहाज़ों या नौकाओं के लिये एकमात्र बंदरगाह है।

स्रोत: द हिंदू

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