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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

  • 17 Dec 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?


तीन वर्षों से अधिक की देरी के बाद हाल ही में भारत ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission) के तहत 70 से अधिक सुपर कंप्यूटर बनाने के लिये फ्रांसीसी प्रौद्योगिकी फर्म अटोस (Atos)के साथ 4,500 करोड़ रूपए का अनुबंध किया है।


महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • इस अनुबंध को प्राप्त करने के लिये अटोस, लेनोवो, एचपी और नेटवेब टेक्नोलॉज़ी के मध्य प्रतिस्पर्द्धा थी।
  • इस अनुबंध द्वारा भारत में 73 सुपर कंप्यूटर डिज़ाइन और निर्मित किये जाने की संभावना है जिसकी बदौलत भारत की सुपरकंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
  • इस अनुबंध के तहत फ्राँस की कंपनी अटोस भारत में सुपर कंप्यूटर निर्माण की दिशा में काम करेगी।
  • गौरतलब है कि देश में उच्च क्षमता वाली 70 से भी अधिक सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं से युक्त विभिन्न शैक्षणिक और शोध संस्थानों का नेटवर्क बनाया जाएगा।

क्या है राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन?

  • 25 मार्च, 2015 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को मंज़ूरी दी थी।
  • संचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास, वैश्विक प्रौद्योगिकी के रुझानों और बढ़ती हुई आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को मंज़ूरी दी थी।
  • इस मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग कार्यान्वित कर रहे हैं।
  • सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में कार्यकलापों को शुरु करने के लिये 2014-15 में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के लिये 42.50 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया था।
  • ये नए सुपर कंप्यूटर न केवल सरकार की ई-प्रशासन नीति को बेहतर बनाएंगे बल्कि यह डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को भी आम जनता तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
  • ये सुपर कंप्यूटर विभिन्न मंत्रालयों, वैज्ञानिकों व शोध करने वाले संस्थानों के काम आएंगे। इनका उपयोग वाहन बनाने से लेकर नई दवाओं के निर्माण, ऊर्जा के स्रोत तलाशने व जलवायु परिवर्तन आदि क्षेत्रों में किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत भारत को विश्व स्तरीय कम्प्यूटिंग शक्ति बनाना है।
  • भारत के पास लगभग 30 सुपर कंप्यूटर हैं जिनमें से अधिकांश उच्च अधिगम वाले संस्थानों, जैसे भारतीय विज्ञान संस्थान, आईआईटी और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं जैसे भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, सी-डैक सीएआईआर-चतुर्थ प्रतिमान संस्थान और राष्ट्रीय मध्यम रेंज मौसम पूर्वानुमान केंद्र आदि में स्थित हैं।
  • सुपरकंप्यूटिंग मिशन के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद भारत की गिनती अमेरिका, जापान, चीन और यूरोपीय संघ जैसे सुपरकंप्यूटर से संपन्न देशों में होगी।

परियोजना में देरी क्यों?

  • अलग-अलग मंत्रालयों की मिलकर काम करने में उत्पन्न चुनौतियों के साथ-साथ वित्त की कमी, इस परियोजना के शुरू होने में तीन साल की देरी की वज़ह रही।

कहाँ लगेंगे ये सुपर कंप्यूटर?

  • पहले तीन सुपर कंप्यूटर आईआईटी बीएचयू, आईआईटी खड़गपुर और आईआईआईटीएम पुणे में स्थापित किये जाएंगे। आईआईटी बीएचयू को एक पेटा फ्लॉप सुपर कंप्यूटर मिलेगा, जबकि अन्य दो संस्थानों को 650 टेरा फ्लॉप सुपर कंप्यूटर मिलेंगे।
  • C-DAC सभी सुपर कंप्यूटर को एक सामान्य ग्रिड से जोड़ने की योजना बना रहा है, जो किसी भी संस्थान को सुपरकंप्यूटिंग पावर तक पहुँचने की सुविधा प्रदान करेगा जिससे यह दुनिया की सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटिंग प्रणाली बन जाएगी।

स्रोत- बिज़नेस लाइन

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