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राष्ट्रीय क्रेडिट ढाँचा

  • 26 Oct 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, शैक्षणिक क्रेडिट बैंक, नेशनल क्रेडिट ढाँचा।

मेन्स के लिये:

नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) और इसका महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने 'नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क' (National Credit Framework -NCrF) के एक मसौदे का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की पूरी शिक्षा प्रणाली को अकादमिक 'क्रेडिट' शासन के तहत लाना है और इसमें सार्वजनिक दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय क्रेडिट ढाँचा:

  • विषय: राष्ट्रीय क्रेडिट ढाँचा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक अंग है।
    • ढाँचे के अनुसार, एक शैक्षणिक वर्ष को किसी छात्र द्वारा उपयोग किये गए घंटों की संख्या के आधार पर परिभाषित किया जाएगा। शैक्षणिक वर्ष के अंत में प्रत्येक को तदनुसार क्रेडिट प्रदान किया जाएगा।
    • जुलाई 2021 में अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की स्थापना और संचालन) विनियमों के तहत इसकी रूपरेखा तैयार की गई है।
  • क्रेडिट सिस्टम: NCrF पर उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट, जिसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है, कक्षा 5 से ही क्रेडिट स्तर का प्रस्ताव करती है जो कि क्रेडिट स्तर 1 होगा, क्रमशः स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट के साथ क्रेडिट स्तर 7 और 8 तक जाएगा।
    • सीखने के प्रत्येक वर्ष के साथ क्रेडिट स्तर में 0.5 की वृद्धि होगी।
  • क्रेडिट अर्निंग: क्रेडिट के असाइनमेंट के लिये कुल 'नोशनल लर्निंग आवर्स इन ए ईयर' 1200 घंटे होंगे। छह महीने के प्रति सेमेस्टर 20 क्रेडिट के साथ प्रत्येक वर्ष 1200 घंटे सीखने के लिये न्यूनतम 40 क्रेडिट अर्जित किये जा सकते हैं। प्रत्येक क्रेडिट 30 घंटे प्रति क्रेडिट सीखने के 30 घंटे के साथ आएगा।
  • NCrF के संदर्भ में सीखने के घंटे का अर्थ न केवल कक्षा में शिक्षण से है, बल्कि सह-पाठ्यचर्या और पाठ्येतर गतिविधियों में भी बिताया गया समय है। ऐसी गतिविधियों की सूची में खेल, योग, प्रदर्शन कला, संगीत, सामाजिक कार्य, एनसीसी, व्यावसायिक शिक्षा, साथ ही नौकरी पर प्रशिक्षण, इंटर्नशिप शामिल हैं।
    • आसान प्रवेश और निकास: क्रेडिट अंतरण तंत्र किसी भी छात्र/शिक्षार्थी को किसी भी समय, सामान्य एवं व्यावसायिक दोनों तरह के शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश करने तथा बाहर निकलने में सक्षम बनाएगा। ऐसे मामलों में प्राप्त कार्य अनुभव या शिक्षार्थी द्वारा किये गए किसी अन्य प्रशिक्षण को उचित महत्त्व दिया जाता है।
    • सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर उचित ध्यान देना: नया क्रेडिट ढाँचा कक्षा शिक्षण, प्रयोगशाला कार्य, कक्षा परियोजनाओं, खेल और अन्य गतिविधियों में प्रदर्शन को ध्यान में रखेगा, साथ ही पाठ्यचर्या एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियों या विभिन्न विषयों के बीच अंतर नहीं करेगा।
    • आधार-सक्षम छात्र पंजीकरण: आधार-सक्षम छात्र पंजीकरण किया जाएगा। छात्र पंजीकरण के बाद एक शैक्षणिक क्रेडिट बैंक (Academic Credit Banks) खाता खोला जाएगा। उन खातों में डिग्री और क्रेडिट जमा किया जाएगा। डिजिलॉकर जैसा नॉलेज़ लॉकर मौजूद होगा।
    • शैक्षणिक क्रेडिट बैंक: उच्च शिक्षा के लिये हाल ही में शुरू किये गए शैक्षणिक क्रेडिट बैंक (Academic Credit Banks) का विस्तार स्कूली शिक्षा से अर्जित क्रेडिट के एंड-टू-एंड प्रबंधन की अनुमति देने के लिये किया जाएगा और इसमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण भी शामिल होंगे।
    • महत्त्व:
      • यह शैक्षिक और कौशल संस्थानों एवं कार्यबल को शामिल करते हुए 'कौशल, पुन: कौशल, अप-स्किलिंग, मान्यता तथा मूल्यांकन के लिये एक छत्र ढाँचे' के रूप में काम करेगा।
      • ज्ञान प्राप्ति, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सकारात्मक सामाजिक परिणामों का श्रेय अगले 2-3 वर्षों में 100% साक्षरता हासिल करने एवं भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम होगा।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सतत् विकास लक्ष्य-4 (वर्ष 2030) के अनुरूप है। यह भारत में शिक्षा प्रणाली के पुनर्गठन और पुनर्रचना का इरादा रखती है। कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2020)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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