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नासा का अंतरिक्षयान LRO

  • 18 Sep 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

नासा का अंतरिक्षयान LRO चंद्रमा पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का पता लगाने में इसरो की मदद करेगा।

प्रमुख बिंदु:

  • लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter- LRO) नासा का एक रोबोटिक अंतरिक्षयान है जो वर्तमान में चंद्रमा की परिक्रमा करते समय चित्रों के माध्यम से डेटा एकत्र करता है और चंद्रमा की सतह का अध्ययन करता है।
  • यह अंतरिक्षयान चंद्रमा पर पानी और अन्य संसाधनों की संभावना का पता लगाने में मदद करता है, साथ ही चंद्रमा के भविष्य के मिशनों की योजना बनाने में भी मदद करता है।
  • LRO का प्राथमिक उद्देश्य चंद्रमा की सतह का उच्च-रिज़ॉल्यूशन (High Resolution) 3डी मानचित्र तैयार करना था जिससे चंद्रमा हेतु भविष्य के रोबोट और क्रू (Crew) मिशनों की सहायता की जा सके।
  • LRO और लूनर क्रेटर ऑब्ज़र्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट मिशन (Lunar Crater Observation and Sensing Satellite Missions) 18 जून, 2009 को पृथ्वी से छोड़ा गया और इसने 23 जून, 2009 को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया।
  • सितंबर 2010 में LRO ने अपना प्राथमिक मानचित्रण मिशन पूरा किया और चंद्रमा के चारों ओर एक विस्तारित विज्ञान मिशन (Extended Science Mission) शुरू किया। यह नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • LRO अंतरिक्षयान पर लगे उपकरण चंद्रमा के दिन-रात का तापमान, वैश्विक भू-स्थानिक ग्रिड (Global Geodetic Grid), चंद्रमा का एल्बिडो और उच्च रिज़ॉल्यूशन कलर इमेजिंग (High Resolution Color Imaging) से संबंधित जानकारियाँ उपलब्ध करा रहे हैं।

भू-स्थानिक ग्रिड (Geodetic Grid): यह GPS आधारित सैटेलाइट नेविगेशन में इस्तेमाल हेतु एक मानक है। इस मानक में समन्वित प्रणाली के तहत पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण मॉडल, संबंधित चुंबकीय मॉडल का विवरण तथा स्थानीय परिवर्तन इत्यादि शामिल होते हैं।

  • चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि यहाँ पर पानी की उपलब्धता की अधिक संभावनाएँ हैं।
  • अनुमानतः LRO के पास अभी भी कम-से-कम छह वर्षों के लिये अपने मिशन पर बने रहने हेतु पर्याप्त ईंधन है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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