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भारतीय अर्थव्यवस्था

मुद्रा योजना और रोज़गार सृजन

  • 06 Sep 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में श्रम और रोज़गार मंत्रालय के तहत श्रम ब्यूरो (Labour Bureau) द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana-PMMY) के संबंध में एक सर्वेक्षण किया गया है।

सर्वेक्षण से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • सर्वेक्षण में भाग लेने वाले पाँच में से मात्र एक ही लाभार्थी (कुल लाभार्थियों में से मात्र 20.6 फीसदी लाभार्थी) ने मुद्रा ऋण का उपयोग कर एक नया व्यवसाय आरंभ किया, शेष सभी लाभार्थियों ने मुद्रा ऋण का उपयोग अपने मौजूदा व्यवसाय के विस्तार के लिये किया।
  • मुद्रा की तीन श्रेणियों- शिशु, किशोर और तरुण के तहत कुल 5.71 लाख करोड़ रुपए मंज़ूर किए गए थे, जबकि एक ऋण का औसत आकार 46,536 रुपए था।
  • वर्ष 2017-18 में मुद्रा योजना के तहत स्वीकृत कुल ऋण में से तीन प्रकार के ऋणों की हिस्सेदारी इस प्रकार है:
    • शिशु ऋण - 42 प्रतिशत
    • किशोर ऋण - 34 प्रतिशत
    • तरुण ऋण - 24 प्रतिशत
  • वर्ष 2017-18 में मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के ऋणों द्वारा नई नौकरियों के सृजन का हिस्सा निम्नानुसार है:
    • शिशु ऋण - 66 प्रतिशत
    • किशोर ऋण - 18.85 प्रतिशत
    • तरुण ऋण - 15.51 प्रतिशत
  • मुद्रा योजना के तहत क्षेत्रवार रोज़गार सृजन के आँकड़े:
    • सेवा क्षेत्र - 34.34 प्रतिशत
    • व्यापार क्षेत्र - 33.23 प्रतिशत
    • कृषि क्षेत्र - 20.33 प्रतिशत
    • विनिर्माण क्षेत्र - 11.7 प्रतिशत
  • केवल सेवा और व्यापार क्षेत्र ने एक साथ रोज़गार के सृजन में दो-तिहाई से अधिक का योगदान दिया

यह सर्वे अप्रैल 2018 से नवंबर 2018 के मध्य आयोजित किया गया था एवं इसमें कुल 97,000 लाभार्थियों ने हिस्सा लिया था।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना:

(Pradhan Mantri MUDRA Yojana-PMMY)

  • इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसके तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों के उद्योगों को ज़मानत मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के ऋणों की व्यवस्था है:
    • शिशु (Shishu) - 50,000 रुपए तक के ऋण
    • किशोर (Kishor) - 50,001 से 5 लाख रुपए तक के ऋण
    • तरुण (Tarun) - 500,001 से 10 लाख रुपए तक के ऋण
  • इसका उद्देश्य माइक्रोफाइनेंस को आर्थिक विकास के एक उपकरण के रूप में उपयोग करना है जो कमज़ोर वर्ग के लोगों, छोटे विनिर्माण इकाइयों, दुकानदारों, फल और सब्जी विक्रेताओं, ट्रक और टैक्सी ऑपरेटरों को लक्षित करने, खाद्य सेवा इकाइयों, मरम्मत की दुकानों, मशीन ऑपरेटरों, कारीगरों और खाद्य उत्पादकों को आय सृजित करने का अवसर प्रदान करने में मदद करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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