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शासन व्यवस्था

COVID-19 के लिये इस्तेमाल हो सकता है MPLADS कोष

  • 26 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना

मेन्स के लिये:

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कोविड-19 (COVID-19) के प्रसार को रोकने हेतु सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation-MoSPI) ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (Members of Parliament Local Area Development Scheme-MPLADS) के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है।

प्रमुख बिंदु:

  • MPLADS के दिशा-निर्देशों में संशोधन के तहत सांसद अब MPLADS के अंतर्गत आने वाली निधि को निम्नलिखित कार्यों में उपयोग कर सकते हैं:
    • चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मचारियों को एक व्यक्ति का तापमान रिकॉर्ड करने और नजर बनाए रखने में सक्षम बनाने हेतु इन्फ्रा-रेड थर्मामीटर्स (Infra-Red Thermometers)।
    • चिकित्सा कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षित करने और उन्हें कुशलता से काम के लिये सक्षम बनाने हेतु व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protection Equipment-PPE) की व्यवस्था, जिससे बीमारी के प्रसार का जोखिम न्यूनतम हो जाए।
    • रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और प्रवेश के अन्य बिंदुओं पर थर्मल इमेजिंग स्कैनर या कैमरा (Thermal Imaging Scanners or Cameras) लगाना, जिससे एक सुरक्षित दूरी से तापमान जानना संभव हो सके।
    • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry Of Health and Family Welfare) द्वारा स्वीकृत कोरोना परीक्षण किट।
    • स्वीकृत सुविधाओं के भीतर आईसीयू वेंटिलेटर (ICU Ventilator) और आइसोलेशन/ क्वारंटीन (Isolation/ Quarantine) वार्ड की स्थापना।
    • चिकित्सा कर्मचारियों के लिये फेस मास्क, दस्ताने और सैनिटाइज़र।
    • कोविड-19 से बचाव, नियंत्रण और उपचार के लिये स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोई अन्य चिकित्सा उपकरण।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना

(Members of Parliament Local Area Development Scheme):

  • पृष्ठभूमि:
    • MPLADS 23 दिसंबर, 1993 को पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गई थी।
    • सांसदों को ऐसा तंत्र उपलब्ध कराया जा सके जिससे वे स्थानीय लोगों की ज़रूरतों के अनुसार स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और सामुदायिक बुनियादी ढाँचा सहित उन्हें बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने के लिये विकास कार्यों की सिफारिश कर सकें।
    • यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा फरवरी 1994 में पहली बार जारी किये गए दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाती है एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा इस योजना को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को हस्तांतरित करने के बाद दिसंबर 1994 में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किये गए।
    • इन दिशा-निर्देशों में फरवरी 1997, सितंबर 1999, अप्रैल 2002, नवंबर 2005, अगस्त 2012 और मई 2014 में पुनः संशोधन किये गए।
    • दिशा-निर्देशों को संशोधित करते समय सांसदों, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से संबंधित राज्यसभा और लोकसभा की समितियों, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक तथा तत्कालीन योजना आयोग (अब नीति आयोग) के कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन, सभी हितधारकों के सुझावों और विगत वर्ष के कार्य अनुभवों को ध्यान में रखा गया है।
  • उद्देश्य:
    • सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना केंद्र सरकार की योजना है जिसके लिये आवश्यक निधि पूर्णतः भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। यह निधि सहायता अनुदान के रूप में सीधे ज़िला प्राधिकारियों को जारी की जाती है।
    • योजना के अंतर्गत ऐसे कार्य शामिल किये जाते है जो विकासमूलक, स्थानीय ज़रूरतों पर आधारित, जनता के उपयोग के लिये हमेशा सुलभ हों। इस योजना के तहत राष्ट्रीय तौर पर प्राथमिक कार्यों को वरीयता दी जाती है, जैसे- पेयजल उपलब्ध कराना, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, सड़क इत्यादि।
    • इस योजना के अंतर्गत जारी की गई निधि अव्यपगत होती है यानी अगर कोई देय निधि किसी वर्ष विशेष में जारी नहीं होती, तो उसे आगे के वषों में पात्रता के अनुसार आवंटित राशियों में जोड़ दिया जाता है। इस समय, प्रति सांसद/निर्वाचन-क्षेत्र के लिये वार्षिक पात्रता 5 करोड़ रुपए है।
    • इस योजना के तहत सांसदों की भूमिका संस्तुतिपरक है। वे संबंधित ज़िला प्राधिकारियों को अपनी  पसंद के कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं जो संबंधित राज्य सरकार की स्थापित कार्यविधियों का पालन करते हुए इन कार्यों को कार्यान्विति करते है।
    • ज़िला प्राधिकारियों को कार्यों की पात्रता की जाँच करने, निधि मंज़ूर करने और कार्यान्वयन अभिकरणों का चयन, कार्यों की प्राथमिकता का निर्धारण और समग्र निष्पादन की देखरेख करने और जमीनी स्तर पर योजना की मॉनीटरिंग करने का अधिकार प्राप्त है। ज़िला प्राधिकारी संबंधित विभागों, स्थानीय कार्यान्वयन अभिकरणों या अन्य सरकारी अभिकरणों के कार्यों को निष्पादित करवाते है। कुछ मामलों में ज़िला प्राधिकारी प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों द्वारा कार्य संपन्न कराते हैं।

स्रोत: पीआईबी

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