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मॉडल इंश्योरेंस विलेज

  • 07 May 2021
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा संबंधी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिये ‘मॉडल इंश्योरेंस विलेज’ (MIV) की अवधारणा को प्रस्तुत किया है।

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार, भारत में  बीमा संबंधी सेवाओं की पहुँच, जो वर्ष 2001 में 2.71% थी, वर्ष 2019 में 3.76% तक बढ़ गई, लेकिन यह वृद्धि वैश्विक औसत 7.23% से काफी नीचे है।
  • हाल ही में संसद ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% करने के लिये बीमा संशोधन विधेयक, 2021 पारित किया है।

प्रमुख बिंदु:

‘मॉडल इंश्योरेंस विलेज’ (MIV) की अवधारणा:

  • इस अवधारणा के तहत ग्रामीणों के समक्ष आने वाले सभी बीमा योग्य जोखिमों के लिये व्यापक बीमा सुरक्षा प्रदान करने तथा रियायती अथवा सस्ती दरों पर बीमा कवर उपलब्ध कराने पर विचार किया गया है।
  • बीमा प्रीमियम को सस्ता बनाने के लिये राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), अन्य संस्थानों, कॉर्पोरेट सामाजिक ज़िम्मेदारी (CSR) फंड्स, सरकारी सहायता तथा पुनर्बीमा कंपनियों द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान किये जाने की आवश्यकता है।
  • प्रथम वर्ष के दौरान इसे देश के विभिन्न ज़िलों में न्यूनतम 500 गाँवों में लागू किया जा सकता है इसके बाद आगामी दो वर्षों में इसका विस्तार 1,000 गाँवों तक किया जा सकता है।
  • इस अवधारणा को आगे बढ़ाने और संचालित करने के लिये प्रत्येक सामान्य बीमा कंपनी और बीमा व्यवसाय को स्वीकार करने वाली पुनर्बीमा कंपनी जिसका कार्यालय भारत में है, को शामिल किया जाने की आवश्यकता है।

MIV के तहत संभावित प्रस्ताव:

  • मौसम सूचकांक उत्पाद या हाइब्रिड उत्पाद जिसमें मौसम सूचकांक उत्पाद भी शामिल होते हैं और ऐसी विभिन्न फसलें जिन्हें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा सुरक्षा प्राप्त नहीं है, के लिये क्षतिपूर्ति आधारित बीमा सुरक्षा।
  • फसलों, पशुधन, किसानों, खेत की व्यापक आवश्यकताओं को लक्षित करने वाली लचीली फार्म इंश्योरेंस पैकेज नीतियाँ।
  • उच्च मूल्य कृषि, अनुबंध कृषि और कॉर्पोरेट कृषि समुदाय के लिये अलग-अलग उत्पाद का प्रस्ताव क्योंकि इनकी ज़रूरतें अलग हैं।
  • आपदाओं के कारण उत्पन्न बड़े जोखिमों को कवर करने वाले पूर्व निर्धारित पैरामीट्रिक मौसम सूचकांक के आधार पर राज्यों को बड़े स्तर पर बीमा कवर की पेशकश की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा के प्रसार में चुनौतियाँ:

  • जागरूकता की कमी, बीमा उत्पादों का सीमित विकल्प, लोगों के अनुकूल और पारदर्शी दावा निपटान तंत्रों की अनुपस्थिति तथा बीमा कंपनियों का कमज़ोर नेटवर्क आदि ग्रामीण बीमा व्यवसाय के विकास को आगे बढ़ाने से संबंधित मुद्दे/चुनौतियाँ हैं।

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI):

  • मल्होत्रा ​​समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद, वर्ष 1999 में बीमा उद्योग को विनियमित करने और विकसित करने के लिये एक स्वायत्त निकाय के रूप में बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) का गठन किया गया था।
  • अप्रैल 2000 में IRDA को एक सांविधिक निकाय का दर्जा दिया गया था।
  • IRDA के प्रमुख उद्देश्यों में बीमा बाज़ार की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उपभोक्ता की पसंद और कम प्रीमियम के माध्यम से ग्राहकों की संतुष्टि को बढ़ाने के साथ ही प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना भी शामिल है।
  • इसका मुख्यालय हैदराबाद में है।

पुनर्बीमा (Reinsurance):

  • यह एक प्रक्रिया है जिसके तहत एक इकाई (पुनर्बीमाकर्त्ता) प्रीमियम भुगतान पर विचार करते हुए एक बीमा कंपनी द्वारा जारी नीति के तहत कवर किये गए जोखिम को पूरी तरह से या इसके कुछ हिस्सों को कवर करती है। दूसरे शब्दों में, यह बीमा कंपनियों के लिये बीमा सुरक्षा का एक रूप है।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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