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‘राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम’ के तहत फिल्म निकायों का विलय

  • 01 Apr 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC)

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के तहत फिल्म निकायों के विलय से संबंधित मुद्दे।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चार फिल्म मीडिया इकाइयों के विलय की घोषणा की है, जिसके तहत फिल्म डिवीज़न, फिल्म समारोह निदेशालय, भारतीय राष्ट्रीय फिल्म संग्रह और बाल चित्र समिति को ‘राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम’ में मिलाया जाएगा।

  • यह निर्णय बिमल जुल्का के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ समिति (2020) की फिल्म मीडिया इकाइयों के युक्तिकरण और विलय पर रिपोर्ट के अनुरूप है।

प्रमुख बिंदु

  • चार फिल्म मीडिया इकाइयों के विषय में:
    • फिल्म डिवीज़न:
      • यह वर्ष 1948 में स्थापित किया गया था और चारों इकाइयों में सबसे पुराना है।
      • इसे मुख्य रूप से सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार हेतु वृत्तचित्रों के निर्माण और समाचार पत्रिकाओं का प्रकाशन और भारतीय इतिहास का सिनेमाई रिकॉर्ड रखने के लिये बनाया गया था।
    • फिल्म समारोह निदेशालय:
      • भारत सरकार द्वारा वर्ष 1973 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत स्थापित फिल्म समारोह निदेशालय को भारतीय फिल्मों को बढ़ावा देने का कार्य सौंपा गया है।
      • यह फिल्म आधारित सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने का भी प्रयास करता है।
    • भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार:
      • भारतीय सिनेमाई विरासत की प्राप्ति और उसे संरक्षित करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ वर्ष 1964 में भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार की स्थापना की गई थी।
    • बाल चित्र समिति (CFSI):
      • बाल चित्र समिति (Children’s Film Society of India-CFSI ने वर्ष 1955 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया।
      • CFSI ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देता है जो बच्चों को स्वस्थ और सर्वांगीण मनोरंजन प्रदान कर उनके दृष्टिकोण को विश्व भर में प्रतिबिंबित करने में प्रोत्साहित कर सके।
  • NFDC के बारे में:
    • राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) है, जिसकी स्थापना वर्ष 1975 में भारतीय फिल्म उद्योग के एकीकृत विकास को संवर्द्धित और व्यवस्थित करने तथा सिनेमा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
    • वर्तमान में रविंदर भाकर इसके अध्यक्ष हैं, जो कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं।

विलय का महत्त्व:

  • बेहतर समन्वय:
    • इन सभी को एक प्रबंधन के तहत लाने से विभिन्न गतिविधियों के बीच ओवरलैप की स्थिति में कमी आएगी जिससे सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
  • फिल्मों के निर्माण में प्रोत्साहन:
  • यह फीचर फिल्मों, वृत्तचित्रों, बाल फिल्मों और एनीमेशन फिल्मों सहित सभी शैलियों की फिल्मों के निर्माण तथा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में भागीदारी के माध्यम से फिल्मों का प्रचार व विभिन्न समारोहों का घरेलू स्तर पर आयोजन, फिल्मी सामग्री का संरक्षण, फिल्मों का डिजिटलीकरण, बहाली एवं वितरण तथा आउटरीच गतिविधियाँ को मज़बूती के साथ प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
    • हालाँकि इन इकाइयों की उपलब्ध संपत्ति का स्वामित्व भारत सरकार के पास रहेगा।

विलय से संबंधित मुद्दे:

  • राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के घाटे की स्थिति:
    • घाटे में चल रहे निगम के साथ चार सार्वजनिक वित्तपोषित निकायों का विलय किया जा रहा है।
  • विलय को लेकर कोई ठोस योजना नहीं:
    • अभिलेखागार का हस्तांतरण कैसे किया जाएगा, इस संबंध में कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है क्योंकि सेल्युलाइड ('सिनेमैटोग्राफिक फिल्म के लिये प्रयुक्त किया जाने वाला पद) भंगुर और ज्वलनशील सामग्री होती है।
    • यदि NFDC लाभ अर्जित नहीं करेगा तो विनिवेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उस स्थिति में यदि हमारे अभिलेखागार स्वायत्त सार्वजनिक संस्थान नहीं रहते हैं, तो निसंदेह उनके साथ छेड़छाड़ की जाएगी, उन्हें क्षतिग्रस्त किया जाएगा या हमेशा के लिये नष्ट कर दिया जाएगा।

भारतीय फिल्म उद्योग की स्थिति:

  • भारत विश्व स्तर पर फिल्मों का सबसे बड़ा निर्माता है। निजी क्षेत्र के नेतृत्व में यह उद्योग एक वर्ष में 3000 से अधिक फिल्मों का निर्माण करता है।
  • वित्तीय वर्ष 2020 में भारत में फिल्म उद्योग व्यवसाय लगभग 183 बिलियन रुपए का था।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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