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जैवविविधता और पर्यावरण

कामेंग नदी में बड़े पैमाने पर मछलियों की मृत्यु

  • 06 Nov 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

कामेंग नदी, भूकंप, भूस्खलन, ब्रह्मपुत्र नदी, पक्के बाघ अभयारण्य

मेन्स के लिये:

भारत का भूकंपीय क्षेत्र, भूस्खलन के कारण तथा इनका प्रबंधन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में चीन के सीमा के निकट 3.4 तीव्रता के भूकंप के कारण हुए भूस्खलन से अरुणाचल प्रदेश की कामेंग नदी में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हो गई है।

  • इस क्षेत्र को भूकंपीय ज़ोन V में रखा गया है, इसका अभिप्राय है कि यह भूकंप के लिये सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र है।

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:

    • यह भूकंप नदी के स्रोत के आस-पास के क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 6,300 मीटर की ऊँचाई पर आया।
    • भूस्खलन के कारण कई टन कीचड़ और चट्टानों का नदी में समावेश हुआ, जिससे जल का प्रवाह काफी हद तक कम हो गया।
    • बहुत अधिक मलबों के कारण नदी नदी का रंग काला हो गया परिणामतः ऑक्सीजन की कम घुलित मात्रा के चलते मछलियाँ मृत पाई गईं।
    • कम घुलित ऑक्सीजन सांद्रता प्राकृतिक घटनाओं के माध्यम से उत्पन्न हो सकती है जिसमें मौसमी नदियों के प्रवाह में परिवर्तन और जल स्तर में खारापन/लवणता और ऊष्मीय स्तरीकरण दोनों शामिल हैं।
    • कम घुलित ऑक्सीजन का स्तर भी इस प्रणाली में ऑक्सीजन की अत्यधिक मांग का संकेत दे सकता है।
  • कामेंग नदी:

    • यह तवांग ज़िले में भारत-तिब्बत सीमा पर बर्फ से ढकी गोरी चेन पर्वत (Gori Chen Mountain) के नीचे हिमनद झील से निकलती है।
    • कामेंग एक सीमा पारीय (Transboundary) नदी नहीं है।
    • यह पश्चिम कामेंग ज़िले के भालुकपोंग क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश और असम के सोनितपुर ज़िले से होकर बहती है।
    • अपने निचले बहाव क्षेत्र में यह एक गुंफित (Braided) नदी बन जाती है और यह ब्रह्मपुत्र नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है।
    • यह असम के कोलिया भोमोरा सेतु पुल के पूर्व में स्थित तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है।
    • यह पूर्वी कामेंग ज़िले और पश्चिम कामेंग ज़िलों के बीच की सीमा का निर्माण करती है।
    • यह अपने पश्चिम (अरुणाचल प्रदेश) में सेसा और ईगलनेस्ट अभयारण्यों और पूर्व में पक्के बाघ अभयारण्य (अरुणाचल प्रदेश) के बीच सीमा का निर्धारण करती है।
    • डफला पहाड़ियाँ पूर्व में हैं और आका पहाड़ियाँ कामेंग नदी के पश्चिम में स्थित हैं।
    • सहायक नदियाँ: टिप्पी, टेंगा, बिचोम और दिरांग चु।
    • ऐतिहासिक महत्त्व:
      • मध्ययुगीन काल के दौरान यानी 13वीं से 16वीं शताब्दी की शुरुआत में, इसने चुटिया (Chutiya) साम्राज्य और कामता साम्राज्य के बीच की सीमाओं को चिह्नित किया।
      • बाद में, 16वीं शताब्दी में अहोमों द्वारा चुटिया साम्राज्य के विलय और कामता साम्राज्य के पतन के बाद, इसने अहोम साम्राज्य और बरो-भुयान शासन के बीच सीमांकन की भूमिका निभाई।
      • चुटिया साम्राज्य (सादिया भी) एक मध्यकालीन राज्य था जो वर्तमान असम और अरुणाचल प्रदेश के आस-पास के क्षेत्रों में सादिया के चारों ओर विकसित हुआ था।
      • कामता साम्राज्य का उद्भव पश्चिमी कामरूप में हुआ, ऐसा माना जाता है कि जब कामरूपनगर के शासक संध्या ने 1257 ई. के बाद कुछ समय के लिये अपनी राजधानी को पश्चिम में कामतापुर स्थानांतरित कर दिया।
        • कामरूप एक प्राचीन राज्य है जो सामान्यत: अब असम राज्य के अंतर्गत है।
      • सुकफा (Sukapha) 13वीं शताब्दी के अहोम साम्राज्य के संस्थापक थे, जिसने छह शताब्दियों तक असम पर शासन किया था।
      • बरो-भुइयाँ ( Baro-Bhuyans) असम और बंगाल में मध्य युग के अंत में तथा प्रारंभिक आधुनिक काल में सैनिक-ज़मींदारों के संघों को संदर्भित करता है।

स्रोत: द हिंदू

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