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जैव विविधता और पर्यावरण

CCS और CDR की सीमाएँ

  • 15 Dec 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये :

सीसीएस और सीडीआर, COP28, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (CCS), कार्बन-डाइऑक्साइड रिमूवल (CDR) तकनीक, बेरोकटोक जीवाश्म ईंधन, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की सीमाएँ।

मेन्स के लिये:

सीसीएस और सीडीआर की सीमाएँ, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

स्रोत:द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में COP28 में लिये गए मसौदा निर्णयों में कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) तथा कार्बन डाइऑक्साइड रिमूवल (CDR) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके कार्बन उत्सर्जन को कम करने और हटाने की सिफारिश की गई है।

  • निर्बाध जीवाश्म ईंधन का तात्त्पर्य है कि उनके उत्सर्जन को कैप्चर करने के लिये CCS तकनीकों का उपयोग किये बिना इन ईंधनों का दहन।
  • मसौदा निर्णय ऐसे बेरोकटोक जीवाश्म ईंधन को "चरणबद्ध तरीके से समाप्त" करने की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं।

CCS और CDR क्या हैं?

  • कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS):
    • CCS उन प्रौद्योगिकियों को संदर्भित करता है जो वायुमंडल में उत्सर्जित होने से पहले उत्सर्जन के स्रोत पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को कैप्चर कर सकते हैं।
    • इन स्रोतों में जीवाश्म ईंधन उद्योग (जहाँ बिजली पैदा करने के लिये कोयला, तेल और गैस का दहन किया जाता है) तथा इसमें स्टील व सीमेंट उत्पादन जैसी औद्योगिक प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
  • कार्बन-डाइऑक्साइड रिमूवल (CDR):
    • CDR कृत्रिम तकनीकों जैसे वनीकरण या पुनर्वनीकरण के साथ-साथ प्रत्यक्ष वायु कैप्चर जैसी तकनीकों का आकार ले सकता है, जिसमें उपकरण वायु से CO₂ लेकर पेड़ों की तरह काम करते हैं और इसका भूमिगत संग्रह करते हैं।
    • इसके अतिरिक्त, अधिक परिष्कृत CDR प्रौद्योगिकियाँ हैं जैसे त्वरित रॉक अपक्षय, जिसमें चट्टानों के रासायनिक विघटन से उसके कण उत्पन्न होते हैं जो वायुमंडल से CO₂को अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं।
      • कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज़ (BECCS) के साथ बायोएनर्जी जैसी अन्य प्रौद्योगिकियाँ लकड़ी जैसे जलते बायोमास से CO₂ को कैप्चर और संग्रहीत करती हैं।

CCS और CDR को कैसे काम करना चाहिये?

  • IPCC की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट (AR6) ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के अनुमानों के लिये इन प्रौद्योगिकियों पर काफी हद तक निर्भर करती है।
  • वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की 50% से अधिक संभावना के साथ IPCC के मूल्यांकन किये गए परिदृश्य, इस धारणा पर विश्वास करते हैं कि विश्व वर्ष 2040 तक 5 बिलियन टन CO₂ का अनुक्रमण कर सकती है। यह अनुक्रम पैमाना भारत के वर्तमान वार्षिक CO₂ उत्सर्जन को पार करता है।
  • CDR प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के बिना 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये AR6 में कोई मार्ग नहीं है।
  • वर्तमान उत्सर्जन दरों को देखते हुए, सात वर्षों के भीतर इसके 1.5 डिग्री सेल्सियस की दहलीज़ को पार करने का एक महत्त्वपूर्ण ज़ोखिम है। केवल प्रत्यक्ष उपायों (जैसे अक्षय ऊर्जा अपनाने) के माध्यम से उत्सर्जन को कम करना इस स्तर पर लगभग असंभव होगा, जिससे CDR पर पर्याप्त निर्भरता की आवश्यकता होती है।

CCS और CDR की चुनौतियाँ क्या हैं?

  • रिबाउंड उत्सर्जन चिंताएँ:
    • ये ऐसी चिंताएँ हैं जिनसे CCS और CDR का अस्तित्व अनजाने में निरंतर उत्सर्जन के लिये अधिक जगह बना सकता है।
    • इस घटना से अक्षय ऊर्जा स्रोतों में संक्रमण के स्थान पर जीवाश्म ईंधन पर उत्सर्जन या लंबे समय तक निर्भरता बढ़ सकती है।
  • जीवाश्म ईंधन निर्भरता:
    • कुछ मामलों में तेल क्षेत्रों में कैप्चर किये गए CO₂ को इंजेक्ट करके अधिक तेल निष्कर्षण के लिये CCS का उपयोग किया गया है, संभवतः उनपर निर्भरता कम करने के विपरीतबी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता अधिक है।
  • भूमि इक्विटी संबंधी चिंताएँ:
    • CDR तरीके जैसे वनीकरण, पुनर्वितरण, BECCS, और प्रत्यक्ष वायु कैप्चर भूमि की आवश्यकता से विवश हैं।
    • ग्लोबल साऊथ में भूमि को प्रायः वृक्षारोपण और अन्य बड़े पैमाने पर CDR तरीकों को तैनात करने के लिये 'व्यवहार्य' और/या 'लागत प्रभावी' माना जाता है।
    • नतीजतन, ऐसी CDR परियोजनाएँ स्वदेशी समुदायों और जैवविविधता संबंधी भूमि अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं तथा भूमि-उपयोग के अन्य रूपों के साथ प्रतिस्पर्द्धा कर सकती हैं, जैसे कि कृषि जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ:
    • CCS एवं CDR प्रौद्योगिकियों के पैमाने में उच्च लागत, सीमित बुनियादी ढाँचे और इन तकनीकों को अधिक प्रभावी व किफायती बनाने के लिये पर्याप्त नवाचार की आवश्यकता सहित महत्त्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियाँ उपलब्ध हैं।

आगे की राह 

  • CCS तथा CDR से संबंधित चिंताओं का समाधान करने के लिये व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जिसमें तकनीकी प्रगति, जीवाश्म ईंधन पर निरंतर निर्भरता को हतोत्साहित करने वाला नीतिगत ढाँचे एवं व्यापक जलवायु लक्ष्यों के साथ संरेखित करने के लिये CCS और CDR प्रौद्योगिकियों की ज़िम्मेदारीपूर्ण व सतत् नियोजन सुनिश्चित करने वाली रणनीतियों को अपनाना शामिल है।
  • CCS तथा CDR प्रौद्योगिकियों को व्यापक जलवायु रणनीतियों के अंतर्गत एकीकृत करना अहम है किंतु दीर्घकालिक समाधान के स्थान पर संक्रमणकालीन समाधान के रूप में उनकी भूमिका पर ज़ोर देने की आवश्यकता है।
  • यह सुनिश्चित करना कि उनका नियोजन नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने, ऊर्जा दक्षता एवं सतत् प्रथाओं के माध्यम से अर्थव्यवस्था को डीकार्बोनाइज़ करने के प्रयासों में बाधा न बने।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित कृषि पद्धतियों पर विचार कीजिये: (2012)

  1. समोच्च मेंडबंदी (कंटूर बंडिंग)
  2. रिले फसल 
  3. शून्य जुताई

वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में उपर्युक्त में से कौन-सा मिट्टी में कार्बन अधिग्रहण/भंडारण में सहायक है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (b)


प्रश्न. कार्बन डाइ-ऑक्साइड के मानवजनित उत्सर्जन के कारण होने वाले ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन कार्बन पृथक्करण के लिये संभावित स्थल हो सकता है? (2017)

  1. परित्यक्त और गैर-आर्थिक कोयले की तह 
  2. तेल और गैस भंडारण में कमी 
  3. भूमिगत गहरी लवणीय संरचनाएँ

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)


प्रश्न. कृषि में शून्य जुताई के क्या-क्या लाभ हैं? (2020)

  1. पिछली फसल के अवशेषों को जलाए बिना गेहूँ की बुवाई संभव है। 
  2. धान के पौधों की नर्सरी की आवश्यकता के बिना गीली मृदा में धान के बीज की सीधी बुवाई संभव है।
  3. मृदा में कार्बन पृथक्करण संभव है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

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