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लद्दाख: त्सो कर आर्द्रभूमि क्षेत्र

  • 30 Dec 2020
  • 7 min read

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में भारत ने लद्दाख के त्सो कर (Tso Kar) आर्द्रभूमि क्षेत्र (Wetland Complex) को अपने 42वें रामसर स्थल के रूप में शामिल किया है इसे यह दर्जा  आर्द्रभूमियों पर अंतर्राष्ट्रीय रामसर कन्वेंशन (International Ramsar Convention on Wetlands) द्वारा प्रदान किया गया है।

  • इससे पहले महाराष्ट्र में लोनार झील और आगरा में सुर सरोवर (जिसे केथम झील भी कहा जाता है) को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।

प्रमुख बिंदु: 

Ramsar-Site

त्सो कर आर्द्रभूमि क्षेत्र के बारे में:

  • त्सो कर बेसिन एक उच्च ऊंँचाई वाला आर्द्रभूमि क्षेत्र है, जिसमें दो प्रमुख जलप्रपात शामिल हैं:
    • दक्षिण में लगभग 438 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली मीठे पानी की झील स्‍टारत्‍सपुक त्सो
    • उत्तर में 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली खारे पानी की झील त्सो कर 
  • त्‍सो कर का अर्थ है सफेद झील। अत इस क्षेत्र में मौजूद अत्‍यधिक खारे पानी के वाष्पीकरण के कारण किनारे पर सफेद नमक की पपड़ी पाई जाती है।
  • ‘बर्ड लाइफ इंटरनेशनल’ (Bird Life International) के अनुसार त्सो कर घाटी ए 1 श्रेणी का एक महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) है तथा प्रवासी पक्षियों के लिये ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ (Central Asian Flyway) एक महत्त्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है।
    • महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (Important Bird Area-IBA):
      • बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के IBA कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक पक्षियों और संबंधित जैव विविधता के संरक्षण हेतु IBA के एक वैश्विक नेटवर्क की पहचान, निगरानी और सुरक्षा करना है।
      • बर्ड लाइफ इंटरनेशनल गैर-सरकारी संगठनों की एक वैश्विक साझेदारी है जो पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण के लिये प्रयासरत है।
    • मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway- CAF):
      • इसमें आर्कटिक और भारतीय महासागरों तथा संबंधित द्वीप शृंखलाओं के मध्य यूरेशिया का एक बड़ा महाद्वीपीय क्षेत्र शामिल है।
      • फ्लाईवे में जल-मार्ग के कई महत्वपूर्ण प्रवास मार्ग/देशांतर गमन शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश रूसी संघ (साइबेरिया) के उत्तरी प्रजनन मैदानों से लेकर दक्षिण पश्चिम एशिया में मालदीव तथा हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिणी ब्रिटेन के गैर-प्रजनन (शीतकालीन) मैदानों तक फैले हुए हैं।
      • इसमें 182 प्रवासी जल-प्रजातियों की कम से कम 279 संख्या शामिल है, जिसमें विश्व स्तर पर 29 संकटग्रस्त प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • यह क्षेत्र भारत में काले गर्दन वाले सारस पक्षी (ग्रस नाइग्रीकोलिस) का एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन क्षेत्र है।
  •  यह आईबीए ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीबे (पोडिसेक्रिस्ट्रैटस), बार-हेडेड गीज यानी कलहंस (अनसेरुंडिकस), रूडी शेल डक यानी बतख (टाडोर्नफ्रेग्यूनिएना), ब्रान-हेडेड गल (लार्सब्रोननिसेफालस), लेस रैंड-प्लवेर (चारेड्रियसमुंगोलस) और कई अन्‍य प्रजातियों के लिये एक प्रमुख प्रजनन क्षेत्र है।

 आर्द्रभूमि क्षेत्र का महत्त्व:

  •  आर्द्रभूमि को "स्थलीय और जलीय इको-सिस्टम के मध्य संक्रमणकालीन भूमि के रूप में परिभाषित किया जाता है जहांँ पानी का स्तर सामान्यत: सतह के पास या भूमि उथले पानी से ढकी होती है"।
  • आर्द्रभूमियांँ भोजन, पानी, रेशे, भूजल पुनर्भरण, जल शोधन, बाढ़, कटाव नियंत्रण और जलवायु विनियमन जैसे महत्त्वपूर्ण संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत शृंखला प्रदान करते हैं।
  • वास्तव में आर्द्रभूमि क्षेत्र जल का प्रमुख स्रोत है तथा मुख्य रूप से मीठे जल की आपूर्ति करता है जो वर्षा जल को सोखकर भूजल के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।

रामसर साइट

  • आर्द्रभूमियों पर रामसर कन्वेंशन को वर्ष 1971 में ईरानी शहर जो कि रामसर में कैस्पियन सागर के दक्षिणी किनारे पर स्थित है, में अपनाया गया यह एक अंतर-सरकारी संधि है।
  •  भारत द्वारा इसे 1 फरवरी, 1982 में लागू किया गया।
  • वे आर्द्रभूमि क्षेत्र जो अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के हैं, रामसर स्थल के रूप में घोषित किये गए हैं।
  • इस कन्वेंशन का उद्देश्य विश्व में सतत विकास की दिशा में योगदान देते हुए स्थानीय और राष्ट्रीय कार्यों तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सभी आर्द्रभूमियों का संरक्षण व उपयोग करना है।
  • मोंट्रेक्स रेकॉर्ड (Montreux Record) उन आर्द्रभूमि स्थलों की एक सूची हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के हैं जहांँ के पारिस्थितिक में चरित्र में परिवर्तन हुए हैं, हो रहे हैं, या तकनीकी विकास, प्रदूषण या अन्य मानव हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप परिवर्तन होने की संभावना है।
    • यह रामसर सूची के भाग के रूप में शामिल है।
  • वर्तमान में भारत के दो आर्द्रभूमियों को मोंट्रेक्स रिकॉर्ड में शामिल किया गया हैं:
    • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)। 
    • लोकटक झील (मणिपुर)।
  • चिलिका झील (ओडिशा) को इस रिकॉर्ड में शामिल किया गया था लेकिन बाद में हटा दिया गया

स्रोत: पीआईबी

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