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आंतरिक सुरक्षा

BSF के क्षेत्राधिकार का विस्तार

  • 16 Oct 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल

मेन्स के लिये:

BSF के क्षेत्राधिकार में विस्तार के निहितार्थ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में गृह मंत्रालय ने असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर तक ज़ब्ती, तलाशी और गिरफ्तारी हेतु ‘सीमा सुरक्षा बल’ (BSF) के क्षेत्राधिकार का विस्तार करने के लिये एक अधिसूचना जारी की है।

प्रमुख बिंदु

  • आदेश के संबंध में:
    • यह अधिसूचना बीएसएफ अधिनियम, 1968 के तहत वर्ष  2014 के एक आदेश को प्रतिस्थापित करेगी, जिसमें मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय को भी शामिल किया गया था।
      • इसमें विशेष रूप से दो नवनिर्मित केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का भी उल्लेख है।
    • जिन उल्लंघनों के मामले में सीमा सुरक्षा बल तलाशी और ज़ब्ती की कार्यवाही कर सकता है, उनमें नशीले पदार्थों की तस्करी, अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी, विदेशियों का अवैध प्रवेश और किसी अन्य केंद्रीय अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध आदि शामिल हैं।
    • किसी संदिग्ध को हिरासत में लेने या निर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर एक खेप ज़ब्त किये जाने के बाद बीएसएफ केवल ‘प्रारंभिक पूछताछ’ कर सकती है और 24 घंटे के भीतर संदिग्ध को स्थानीय पुलिस को सौंपना आवश्यक है।
      • संदिग्धों पर मुकदमा चलाने का अधिकार बीएसएफ के पास नहीं है।
  • संबंधित मुद्दे:
    • सार्वजनिक व्यवस्था बनाम राज्य की सुरक्षा: सार्वजनिक व्यवस्था, जो कि सार्वजनिक शांति और सुरक्षा का प्रतीक है, को बनाए रखना मुख्य रूप से राज्य सरकार का दायित्त्व है (प्रविष्टि-1, राज्य सूची)।
      • हालाँकि जब कोई गंभीर सार्वजनिक अव्यवस्था, जो राज्य या देश की सुरक्षा या रक्षा के लिये खतरा उत्पन्न करती है, तो स्थिति केंद्र सरकार के लिये भी चिंता का विषय बन जाती है (संघ सूची की प्रविष्टि 1)।
    • संघवाद की भावना को कमज़ोर करना: राज्य सरकार की सहमति प्राप्त किये बिना जारी यह अधिसूचना, राज्यों की शक्तियों पर अतिक्रमण करने के समान है।
      • पंजाब सरकार का कहना है कि यह अधिसूचना सुरक्षा या विकास की आड़ में राज्य सरकार की शक्तियों पर केंद्र सरकार का अतिक्रमण है।
    • बीएसएफ के कामकाज पर प्रभाव: भीतरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना सीमा सुरक्षा बल के दायरे में नहीं आता है, बल्कि इसका प्राथमिक दायित्व अंतर्राष्ट्रीय सीमा की रक्षा करना है, ऐसे में यह अधिसूचना प्राथमिक दायित्व के निर्वहन को लेकर बीएसफ की क्षमता को कमज़ोर करेगी।

राज्यों में सशस्त्र बलों की तैनाती पर संवैधानिक दृष्टिकोण:

  • केंद्र अनुच्छेद 355 के तहत राज्य को "बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति" से बचाने के लिये अपने बलों को तैनात कर सकता है, तब भी जब संबंधित राज्य, केंद्र से सहायता की मांग नहीं करता है और केंद्रीय बलों की तैनाती हेतु अनिच्छुक है।
  • संघ के सशस्त्र बलों की तैनाती के संदर्भ में किसी राज्य के विरोध के मामले में केंद्र द्वारा पहले संबंधित राज्य को अनुच्छेद 355 के तहत निर्देश जारी किया जाता है।
  • केंद्र सरकार के निर्देश का पालन न करने की स्थिति में केंद्र अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है।

सीमा सुरक्षा बल:

  • भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद 1965 में बीएसएफ का गठन किया गया था।
  • यह गृह मंत्रालय (MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारत के सात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है।
    • अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल हैं: असम राइफल्स (एआर), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) )
  • पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं पर 2.65 लाख सैनिक तैनात हैं।
  • इसमें एक एयर विंग, मरीन विंग, एक आर्टिलरी रेजिमेंट और कमांडो यूनिट है।
    • बीएसएफ अरब सागर में सर क्रीक और बंगाल की खाड़ी में सुंदरबन डेल्टा जैसी भौगोलिक स्थितियों में भी सुरक्षा प्रदान कर रही है।
    • कानून और व्यवस्था बनाए रखने तथा शांतिपूर्ण चुनाव कराने में राज्य प्रशासन की मदद करने में बीएसएफ की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
    • बीएसएफ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी सुरक्षा प्रदान करती है ताकि ज़रूरत पड़ने पर मानव जीवन को बचाया जा सके।
  • यह हर साल अपनी प्रशिक्षित जनशक्ति का एक बड़ा दल भेजकर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को समर्पित सेवाओं में योगदान देता है।
  • इसे भारतीय क्षेत्रों की रक्षा की पहली पंक्ति कहा गया है।

आगे की राह 

  • राज्य की सहमति वांछनीय है: भारत के पड़ोस में सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय सशस्त्र बलों और राज्य के पुलिस अधिकारियों के बीच मौजूदा संबंधों में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
    • हालाँकि यह वांछनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा अपने सशस्त्र बलों को राज्यों में तैनात करते समय  जहाँ भी संभव हो, राज्य सरकार से परामर्श किया जाना चाहिये।
  • राज्य का आत्मनिर्भर बनना: प्रत्येक राज्य सरकार अपनी सशस्त्र पुलिस को मज़बूत करने के लिये केंद्र सरकार के परामर्श से अल्पकालिक और दीर्घकालिक व्यवस्था कर सकती है।
    • इसका उद्देश्य सशस्त्र पुलिस को काफी हद तक आत्मनिर्भर बनाना है ताकि गंभीर गड़बड़ी की स्थिति में ही केंद्रीय सशस्त्र बलों की सहायता ली जाए।
  • क्षेत्रीय व्यवस्था: पड़ोसी राज्यों के एक समूह की आम सहमति से ज़रूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सशस्त्र पुलिस के उपयोग की स्थायी व्यवस्था हो सकती है।
    • क्षेत्रीय परिषद ऐसी व्यवस्था तैयार करने के लिये एक क्षेत्र के भीतर राज्यों की सहमति प्राप्त करने के लिये सबसे अच्छा मंच होगा।
  • पुलिस सुधार: विभिन्न समितियों और निर्णयों द्वारा अनुशंसित पुलिस सुधारों को पूरा करने के लिये यह उचित समय है।

स्रोत: द हिंदू

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