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30 जनवरी: विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस

  • 31 May 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस, विश्व स्वास्थ्य सभा

मेन्स के लिये:

विश्व स्वास्थ्य सभा तथा भारत की भूमिका

चर्चा में क्यों?

वर्तमान 74वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने 30 जनवरी को 'विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) दिवस' के रूप में घोषित किया।

  • इस दिन को मान्यता देने का प्रस्ताव संयुक्त अरब अमीरात द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इसे प्रतिनिधियों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया।
  • पहला विश्व NTD दिवस वर्ष 2020 में अनौपचारिक रूप से मनाया गया था।

प्रमुख बिंदु:

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD):

  • NTD संक्रमण का एक समूह है जो अफ्रीका, एशिया और अमेरिका के विकासशील क्षेत्रों में हाशिये पर रहने वाले समुदायों में सबसे सामान्य है। ये रोग विभिन्न प्रकार के रोगजनकों जैसे-वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोज़ोआ और परजीवी के कारण होते हैं।
    • NTD विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामान्य है, जहाँ लोगों के पास स्वच्छ पानी या मानव अपशिष्ट के निपटान के सुरक्षित तरीकों तक पहुँच नहीं है।
  • इन बीमारियों को आमतौर पर तपेदिक, एचआईवी-एड्स और मलेरिया जैसी बीमारियों की तुलना में अनुसंधान और उपचार के लिये कम धन मिलता है। 
  • NTD के उदाहरण हैं: सर्पदंश का जहर, खुजली, जम्हाई, ट्रेकोमा, लीशमैनियासिस और चगास रोग आदि।

NTDs पर लंदन उद्घोषणा:

  • इसे NTDs के वैश्विक भार को वहन करने के लिये 30 जनवरी, 2012 को अपनाया गया था।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व बैंक, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के अधिकारी, प्रमुख वैश्विक दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई राष्ट्रीय सरकारों के प्रतिनिधियों ने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन में इन बीमारियों को समाप्त करने का संकल्प लिया।

वर्ष 2021-2030 के लिये WHO का नया रोडमैप:

  • प्रक्रिया को मापने से लेकर प्रभाव को मापने तक।
  • रोग-विशिष्ट योजना और प्रोग्रामिंग से लेकर सभी क्षेत्रों में सहयोगात्मक कार्य तक।
  • बाह्य रूप से संचालित एजेंडे से लेकर देश के स्वामित्व वाले और सरकार द्वारा वित्तपोषित कार्यक्रमों तक।

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों की स्थिति

  • वैश्विक स्तर पर एक बिलियन से अधिक लोग उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों से प्रभावित हैं।
    • ये रोग रोके जाने व उपचार योग्य हैं, हालाँकि इसके बावजूद ये रोग- गरीबी एवं पारिस्थितिक तंत्र के साथ उनके जटिल अंतर्संबंध- विनाशकारी स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों का कारण बने हुए हैं।
  • कुल 20 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग हैं, जो दुनिया भर में 1.7 बिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करते हैं।
  • कालाजार और लसीका फाइलेरिया जैसे परजीवी रोगों समेत भारत में कम-से-कम 11 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग मौजूद हैं, जिससे देश भर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं, इनमें प्रायः अधिकतर लोग गरीब एवं संवेदनशील वर्ग से होते हैं।

NDTs के उन्मूलन हेतु भारतीय पहल:

  • NDTs के उन्मूलन की दिशा में गहन प्रयासों के हिस्से के रूप में वर्ष 2018 में ‘लिम्फेटिक फाइलेरिया रोग के तीव्र उन्मूलन की कार्य-योजना’ (APELF) शुरू की गई थी।
  • वर्ष 2005 में भारत, बांग्लादेश और नेपाल की सरकारों द्वारा सबसे संवेदनशील आबादी के शीघ्र निदान और उपचार में तेज़ी लाने और रोग निगरानी में सुधार एवं कालाजार को नियंत्रित करने के लिये WHO-समर्थित एक क्षेत्रीय गठबंधन का गठन किया गया है।
  • भारत पहले ही कई अन्य NDTs को समाप्त कर चुका है, जिसमें गिनी वर्म, ट्रेकोमा और यॉज़ शामिल हैं।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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