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आंतरिक सुरक्षा

जम्मू में ड्रोन से हमला

  • 28 Jun 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मानव रहित विमान अथवा ड्रोन

मेन्स के लिये:

ड्रोन के उपयोग संबंधी चिंताएँ और ड्रोन अटैक में हो रही बढ़ोतरी के कारण, ड्रोन विनियमन संबंधी नियम-कानून

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ड्रोन (Drone) का इस्तेमाल पहली बार विस्फोटक उपकरणों को गिराने के लिये किया गया, जिससे जम्मू में वायु सेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र के अंदर विस्फोट किया गया।

ड्रोन

  • ड्रोन मानव रहित विमान (Unmanned Aircraft) के लिये एक आम शब्दावली है। मानव रहित विमान के तीन उप-सेट हैं- रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (Remotely Piloted Aircraft), ऑटोनॉमस एयरक्राफ्ट (Autonomous Aircraft) और मॉडल एयरक्राफ्ट (Model Aircraft)।
    • रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट में रिमोट पायलट स्टेशन, आवश्यक कमांड और कंट्रोल लिंक तथा अन्य घटक होते हैं।
  • युद्धक उपयोग के अलावा ड्रोन का उपयोग कृषि में कीटनाशकों का छिड़काव, पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी, ​​हवाई फोटोग्राफी और खोज तथा राहत कार्यों आदि के लिये किया जाता है।

प्रमुख बिंदु:

Rogue-Drones

ड्रोन हमला और चिंताएँ :

  • पिछले दो वर्षों में भारतीय क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद और ड्रग्स की तस्करी के लिये पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन इस्तेमाल किये गए हैं।
    • ड्रोन काफी नीचे उड़ते हैं और इसलिये किसी भी रडार सिस्टम द्वारा इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।
  • सरकारी आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में पाकिस्तान से लगी सीमा पर 167 ड्रोन देखे गए और वर्ष 2020 में ऐसे 77 ड्रोन देखे गए थे।
  • हाल के वर्षों में ड्रोन प्रौद्योगिकी के तेज़ी से प्रसार और इसके वैश्विक बाज़ार के तेज़ी से विकास के साथ दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में भी ड्रोन हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
  • ड्रोन सुरक्षा के लिये खतरा बन रहे हैं, विशेष रूप से संघर्ष क्षेत्रों में जहाँ गैर-राज्य पक्ष सक्रिय हैं और प्रौद्योगिकी तक आसान पहुँच रखते हैं।
    • उदाहरणार्थ: वर्ष 2019 में सऊदी अरब में ‘अरामको क्रूड ऑइल’ पर दोहरे ड्रोन हमले।
  • सामूहिक विनाश के हथियार इतने बड़े पैमाने पर मौत और विनाश करने की क्षमता वाले हथियार हैं कि शत्रु के हाथों में इनकी उपस्थिति को एक गंभीर खतरा माना जा सकता है।
  • सैन्य क्षेत्र में छोटे ड्रोन उस दर से बढ़ रहे हैं जिसने युद्धक्षेत्र कमांडरों और योजनाकारों को समान रूप से चिंतित कर दिया है।
    • कुछ घटनाओं में छोटे ड्रोन भी विस्फोटक आयुध से लैस थे, उन्हें संभावित घातक निर्देशित मिसाइलों में परिवर्तित करने के लिये इस प्रकार के परिष्करण का प्रदर्शन किया गया।

ड्रोन अटैक बढ़ने की वजह:

  • सस्ता एवं सुलभ:
    • ड्रोन अटैक के मामलों में बढ़ोतरी का प्राथमिक कारण यह है कि पारंपरिक हथियारों की तुलना में ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं और काफी विनाशकारी हो सकते हैं।
  • दूर से नियंत्रित करना सक्षम
    • युद्ध के उद्देश्यों के लिये ड्रोन का उपयोग करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता है और यह हमलावर पक्ष के किसी भी सदस्य को खतरे में नहीं डालता है।
  • प्रयोग करने में आसान
    • सुगम संचालन और शत-प्रतिशत क्षति पहुँचाने की ड्रोन की क्षमता ही सभी देशों को अपनी सेना को ड्रोन-विरोधी युद्ध तकनीक से लैस करने पर मजबूर करती है।

भारत में ड्रोन संचालन से संबंधित नियम

  • मानव रहित विमान प्रणाली (UAS) नियम, 2020:
    • यह सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों का एक समूह है जिसका उद्देश्य मानव रहित विमान यानी ड्रोन के उत्पादन, आयात, व्यापार, स्वामित्व, ड्रोन पोर्ट (ड्रोन के लिये हवाई अड्डे) और इसके संचालन को विनियमित करना है।
    • यह व्यवसायों द्वारा ड्रोन के उपयोग के लिये एक रूपरेखा तैयार करता  है।
  • नेशनल काउंटर रोग ड्रोन दिशा-निर्देश, 2019 (National Counter Rogue Drones Guidelines)
    • इन दिशा-निर्देशों के तहत किसी संपत्ति की महत्ता, अविनियमित उपयोग से उठने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करने के लिये कई उपायों का सुझाव दिया गया है।
    • राष्ट्रीय महत्त्व के महत्त्वपूर्ण स्थानों के लिये दिशा-निर्देशों में एक ऐसे मॉडल की तैनाती का आह्वान किया गया है जिसमें रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड कैमरे जैसे प्राइमरी और पैसिव पहचान साधन शामिल हों।
    • इसके अलावा रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर, ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (GPS) स्पूफर्स, लेज़र और ड्रोन कैचिंग नेट जैसे सॉफ्ट किल और हार्ड किल उपायों को प्रयोग करने का भी सुझाव दिया गया है।

अन्य पहल:

  • निर्देशित-ऊर्जा हथियार (Directed-Energy Weapon):
    • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दो ड्रोन-विरोधी निर्देशित-ऊर्जा हथियार (DEW) सिस्टम विकसित किये हैं,जिसमें 2 किमी की दूरी पर हवाई लक्ष्य को निशाना बनाने के लिये 10 किलोवाट और 1 किमी की रेंज के लिये 2 किलोवाट लेज़र के साथ एक कॉम्पैक्ट ट्राइपॉड-माउंटेड है। लेकिन इनका अभी बड़ी संख्या में उत्पादन होना बाकी है।
  • स्मैश-2000 प्लस (Smash-2000 Plus):
    • सशस्त्र बल अब इज़रायली `स्मैश-2000 प्लस' कम्प्यूटरीकृत अग्नि नियंत्रण और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक साईट्स जैसी  अन्य प्रणालियों का भी सीमित संख्या में आयात कर रहे हैं जिसे दिन और रात दोनों स्थितियों में छोटे शत्रु ड्रोन के खतरे से निपटने के लिये बंदूकों और राइफलों पर लगाया जा सकता है।

आगे की राह:

  • ड्रोन हमले को ध्यान में रखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभावित रूप से मानव रहित विमान प्रणालियों के लिये मौजूदा नियमों को और अधिक कठोर बनाने पर विचार कर सकता है।
  • वर्तमान ड्रोन नियम, निर्माता या आयातक से अंतिम उपयोगकर्त्ताओं तक ड्रोन के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिये पर्याप्त हैं। हालांकि दुश्मन ड्रोन हमेशा गैर-अनुपालक होंगे। इनकी रोकथाम के लिये कड़े नियमों की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू

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