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भारतीय अर्थव्यवस्था

लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें

  • 29 Jun 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सरकारी घाटा, Covid-19, लघु बचत योजनाएँ

मेन्स के लिये:

लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती के लाभ और हानि

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार जुलाई-सितंबर तिमाही के लिये छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज़ दरों में कटौती कर सकती है।

  • अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस समय छोटी बचत दरों में कटौती से मुद्रास्फीति में वृद्धि के बीच परिवारों को और नुकसान होगा।

प्रमुख बिंदु:

पृष्ठभूमि:

  • अप्रैल 2020 में विभिन्न उपकरणों/प्रपत्र पर छोटी बचत दरों में 0.5% और 1.4% के बीच कमी की गई, जिससे सार्वजनिक भविष्य निधि (Public Provident Funds- PPF) की दर 7.9% से 7.1% हो गई।
  • सरकार ने 2021-22 (अप्रैल-जून) की पहली तिमाही के लिये ब्याज दरों में और कमी करने का फैसला किया परंतु इसे "निरीक्षण" (Oversight) करार देते हुए अपने फैसले को वापस ले लिया।

लघु बचत योजनाएँ/प्रपत्र:

  • संदर्भ:
    • ये भारत में घरेलू बचत के प्रमुख स्रोत हैं और इसमें 12 उपकरण/प्रपत्र (Instrument) शामिल हैं।
    • जमाकर्त्ताओं को उनके धन पर सुनिश्चित ब्याज मिलता है।
    • सभी लघु बचत प्रपत्रों से संग्रहीत राशि को राष्ट्रीय लघु बचत कोष (NSSF) में जमा किया जाता है।
    • कोविड-19 महामारी के कारण सरकारी घाटे में वृद्धि की वजह से उधार की उच्च आवश्यकता को पूरा करने के लिये छोटी बचतें सरकारी घाटे के वित्तपोषण के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरी हैं।
  • वर्गीकरण: लघु बचत प्रपत्रों को तीन श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है: 
    • डाक जमा: इसमें बचत खाता, आवर्ती जमा, भिन्न-भिन्न परिपक्वता की सावधि जमा और मासिक आय योजना शामिल है। 
    • बचत प्रमाणपत्र: राष्ट्रीय लघु बचत प्रमाणपत्र (NSC) और किसान विकास पत्र (KVP)।
    • सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ: सुकन्या समृद्धि योजना, लोक भविष्य निधि (PPF) और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS)।
  • दरों का निर्धारण:
    • छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों का निर्धारण समान परिपक्वता वाले बेंचमार्क सरकारी बॉण्डोंं के अनुरूप तिमाही आधार पर किया जाता है। वित्त मंत्रालय द्वारा समय-समय पर दरों की समीक्षा की जाती है।
      • पिछले एक वर्ष से बेंचमार्क सरकारी बॉण्ड यील्ड 5.7 फीसदी से 6.2 फीसदी के बीच रही है। इससे सरकार को भविष्य में छोटी बचत योजनाओं पर दरों में कटौती करने की छूट मिलती है।
    • लघु बचत योजना पर गठित श्यामला गोपीनाथ पैनल (वर्ष 2010) ने छोटी बचत योजनाओं के लिये बाज़ार-संबद्ध ब्याज दर प्रणाली का सुझाव दिया था।

दर में कटौती का लाभ

  • चूँकि केंद्र सरकार अपने घाटे को पूरा करने के लिये लघु बचत कोष का उपयोग करती है, इसलिये कम दरें घाटे के वित्तपोषण की लागत को कम करेंगी।
  • दरों में कटौती का अर्थ होगा कि सरकार चाहती है लोग अधिक-से-अधिक व्यय करें ताकि अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की जा सके।

हानि:

  • दरों में कटौती से निवेशकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम वर्ग को नुकसान होगा।
    • इसके अलावा कोविड-19 की दूसरी लहर से पहले भी घरेलू बचत लगातार दो तिमाहियों से घट रही है।
  • आगे चलकर बैंकों द्वारा सावधि जमा दरों को और युक्तिसंगत बनाया जाएगा तथा रिटर्न में और कमी आएगी।
  • कम दर का मतलब है अधिकांश ऋण प्रपत्रों पर रिटर्न की वास्तविक दर नकारात्मक होगी क्योंकि मुद्रास्फीति 5% के आसपास होगी।

प्रतिलाभ और मुद्रास्फीति दर:

  • प्रतिलाभ दर एक बचत खाते, म्यूचुअल फंड या बॉण्ड में निवेश से प्राप्त होने वाली अपेक्षित या वांछित राशि है।
  • प्रतिलाभ की वास्तविक दर मुद्रास्फीति की दर के समायोजन के बाद निवेश पर प्रतिफल है। इसकी गणना निवेश पर प्रतिफल से मुद्रास्फीति दर घटाकर की जाती है।
  • मुद्रास्फीति में किसी व्यक्ति की वार्षिक वापसी दर को कम करने की शक्ति होती है। जब वार्षिक मुद्रास्फीति की दर प्रतिफल की दर से अधिक हो जाती है तो क्रय शक्ति में गिरावट के कारण उपभोक्ता को इसमें निवेश करने से हानि होती है।
  • मुद्रास्फीति दैनिक या सामान्य उपयोग की अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि को संदर्भित करती है, जैसे कि भोजन, कपड़े, आवास, मनोरंजन, परिवहन, उपभोक्ता स्टेपल आदि। यह एक देश की मुद्रा इकाई की क्रय शक्ति में कमी का संकेत है। 

स्रोत: द हिंदू

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