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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

चीन के BRI से अलग हुआ इटली

  • 11 Dec 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, G7 राष्ट्र, रूस-यूक्रेन संघर्ष, FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) 

मेन्स के लिये:

चीन के BRI से अलग हुआ इटली,भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा समझौते

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स 

चर्चा में क्यों?

साइन अप करने वाला एकमात्र G7 राष्ट्र बनने के चार साल से अधिक समय बाद इटली चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से बाहर हो गया है।

  • चीन के BRI  से इटली की संभावित वापसी आर्थिक, भू-राजनीतिक और रणनीतिक कारकों के संयोजन से उत्पन्न हुई है, जिसने देश को अपनी भागीदारी का पुनर्मूल्यांकन करने के लिये प्रेरित किया है।

BRI से हटने के इटली के क्या कारण हैं?

  • आर्थिक असंतुलन
    • इटली 2019 में BRI में उस समय शामिल हुआ था जब 10 वर्षों में तीन बार मंदी से बचने के बाद वह निवेश और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिये उत्सुक था।
    • हालाँकि प्रत्याशित आर्थिक लाभ नहीं हुआ क्योंकि इन चार वर्षों के बाद समझौते ने इटली के लिये बहुत कुछ हासिल नहीं किया है।
      • काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के आँकड़ों के अनुसार, इटली में चीनी FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) 2019 के 650 मिलियन अमेरिकी डालर से घटकर वर्ष 2021 में केवल 33 मिलियन अमेरिकी डालर रह गया।
      • BRI में शामिल होने के बाद से व्यापार के संदर्भ में चीन को इटली का निर्यात 14.5 बिलियन यूरो से बढ़कर मात्र 18.5 बिलियन यूरो हो गया, जबकि इटली को चीन का निर्यात 33.5 बिलियन यूरो से बढ़कर 50.9 बिलियन यूरो हो गया।
  • भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण: 
    • इटली का पुनर्विचार यूरोपीय देशों के बीच चीन के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन करने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
    • चीन के बढ़ते प्रभाव, भू-राजनीतिक संरेखण और रणनीतिक निहितार्थों पर चिंताओं ने, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसी वैश्विक घटनाओं के बीच इटली को BRI के प्रति अपने रुख का पुनर्मूल्यांकन करने के लिये प्रेरित किया है।
      • अप्रैल में EU-चीन निवेश पर व्यापक समझौता (CAI) निरस्त हो गया। पिछले साल एस्टोनिया और लातविया ने मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय देशों में चीन के कूटनीतिक दबाव 17+1 को छोड़ दिया था। लिथुआनिया 2021 में बाहर हो गया था।
  • पश्चिमी सहयोगियों के साथ गठबंधन:
    • इटली का अपने पश्चिमी सहयोगियों, विशेष रूप से G7 के साथ अधिक निकटता से जुड़ने की ओर झुकाव, BRI के संबंध में उसके निर्णय को प्रभावित कर सकता है।
    • G7 की आगामी अध्यक्षता के साथ इटली पश्चिमी सहयोगियों के साथ एकजुटता के संकेत के रूप में BRI को छोड़ने पर विचार कर सकता है।
  • नकारात्मक प्रेस एवं ऋण संबंधी चिंताएँ:
    • BRI को संभावित ऋण जाल तथा वित्तीय संव्यवहार में पारदर्शिता की कमी के लिये विश्व स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा है।
    • BRI में भागीदारी के कारण अन्य देशों को भारी ऋण बोझ का सामना करने की रिपोर्टें इटली की BRI से वापसी में योगदान दे सकती हैं।

भारत-इटली के संबंध कैसे रहे हैं?

  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध:
    • भारत और इटली व्यापार मार्गों तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से ऐतिहासिक संबंधों के साथ हज़ारों वर्ष पुराने प्राचीन संबंध साझा करते हैं।
    • रवीन्द्रनाथ टैगोर एवं महात्मा गांधी जैसे व्यक्तियों ने इटली के साथ उल्लेखनीय वार्ता की, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक बनाने में योगदान मिला है।
  • द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विफलताएँ:
    • इतालवी नौसैनिक मामला: वर्ष 2012 में केरल तट पर भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी दो इतालवी नौसैनिकों के मामले से संबंधों में तनाव आ गया। यह मुद्दा राजनीतिक एवं विधिक रूप से बढ़ गया, जिससे देशों के बीच राजनयिक संबंधों पर प्रभाव पड़ा। अंततः वर्ष 2021 में इटली द्वारा भारत को प्रतिपूर्ति दिये जाने के बाद मामला सुलझ गया।
    • अगस्ता वेस्टलैंड आरोप: अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के संबंध में भ्रष्टाचार के आरोपों ने संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। एक प्रमुख रक्षा व्यवहार में अनैतिक संव्यवहार तथा भ्रष्टाचार की जाँच के कारण इटली व भारत दोनों में विधिक विवाद उत्पन्न हुए।
      • अनुबंध रद्द होने तथा विधिक कार्यवाही के बावजूद इतालवी न्यायालयों ने अपर्याप्त साक्ष्यों के कारण सभी आरोपों को खारिज़ कर दिया।
  • बेहतरी के प्रयास:
    • राजनयिक सहभागिता: संबंधों को सुधारने के प्रयास लगभग वर्ष 2018 के आसपास शुरू हुए। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुए आधिकारिक दौरे, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं उच्च स्तरीय सहभागिता का उद्देश्य संबंधों का पुनर्निर्माण करना था।
    • सामरिक साझेदारी: वर्ष 2021 में G20 शिखर सम्मेलन के लिये भारतीय प्रधानमंत्री की इटली यात्रा तथा उसके बाद इतालवी नेताओं के साथ वार्ता ने महत्त्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किये। रक्षा, व्यापार व प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए द्विपक्षीय समझौते एवं सामरिक साझेदारी स्थापित की गई।
    • आर्थिक सहयोग: द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, इटली, यूरोपीय संघ के भीतर भारत के लिये एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है। रक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग सहित आर्थिक सहयोग पर बल देने से संबंध मज़बूत हुए हैं।
    • चीन के साथ जुड़ाव पर पुनर्विचार: भारत और इटली दोनों ने चीन के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन किया है, विशेषकर बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (BRI) जैसी पहल के संबंध में। आर्थिक असंतुलन तथा अधूरी अपेक्षाओं से प्रेरित BRI पर इटली का पुनर्विचार, क्षेत्रीय चिंताओं के कारण BRI के प्रति भारत के विरोध के अनुरूप है।
  • अन्य क्षेत्रों में सहयोग:
    • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग: वर्ष 2021 में दोनों देशों ने इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (ASI) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बीच कार्य पद्धति के रूप में विषयगत कार्य समूहों की स्थापना की तथा साथ ही हेलियोफिज़िक्स में प्रथम संयुक्त ASI-ISRO कार्य समूह का निर्माण किया। 
      • हेलियोफिज़िक्स, सौरमंडल पर सूर्य के प्रभावों का अध्ययन है।
    • आतंकवाद-रोधी और सुरक्षा हेतु सहयोग: दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय स्तर और बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद एवं अंतर्राष्ट्रीय अपराध के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को मज़बूत करने का वचन दिया।
      • दोनों देश सहयोग, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ाने के लिये 'आतंकवाद-निरोध पर भारत-इटली संयुक्त कार्य समूह' की अगली बैठक आयोजित करने पर भी सहमत हुए।
    • क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी: भारत एवं इटली ने आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे पर गठबंधन (CDRI) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसे नए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की क्षमता को स्वीकार किया है।
      • भारत ने ISA के सार्वभौमिकरण के बाद ISA में शामिल होने पर इटली का स्वागत किया।

    आगे की राह 

    • इटली के BRI से बाहर हो जाने के साथ भारत और इटली के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावना है। दोनों देश प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स एवं बुनियादी ढाँचे के विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापार, निवेश तथा संयुक्त उद्यम के रास्ते तलाश सकते हैं।
    • भारत और इटली रक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी एवं समुद्री सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को बढ़ा सकते हैं। रक्षा उत्पादन, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सूचना साझाकरण में सहयोगात्मक प्रयास सुरक्षा संबंधों को मज़बूत कर सकते हैं।
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