हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ईरान ने संवर्धित यूरेनियम क्षमता की तय सीमा पार की

  • 02 Jul 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में ईरान ने वर्ष 2015 के समझौते के अनुसार संवर्धित यूरेनियम की तय सीमा से अधिक यूरेनियम भंडारण करने की बात को स्वीकार कर लिया है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy agency- IAEA) ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है।

मुख्य बिंदु

  • ईरान के साथ P5+1 देशों ने 2015 में एक परमाणु समझौता (The Joint Comprehensive Plan of Action-JCPOA) किया था। इस समझौते में ईरान के लिये यूरेनियम भंडारण की अधिकतम सीमा तय कर दी गई थी तथा इसके बदले में ईरान पर से कुछ आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त एवं कुछ को निलंबित किया जाना था।
  • इस समझौते में प्रासंगिक सीमा (300 किग्रा. यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड-UF6) का ईरान द्वारा अतिक्रमण किया गया है जिसकी घोषणा स्वयं ईरान ने की है।
  • अमेरिका के इस समझौते से निकलने तथा ईरान पर फिर से प्रतिबंध आरोपित करने के पश्चात ईरान का यह महत्त्वपूर्ण कदम है। ध्यातव्य है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के पश्चात् ईरान ने संवर्धित यूरेनियम में वृद्धि करने की चेतावनी दी थी।
  • ईरान के कदम के पश्चात ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही हैं कि ईरान का यह फैसला यूरोपीय देशों (फ्राँस, जर्मनी, ब्रिटेन) को प्रेरित कर सकता है कि यूरोपीय देश अमेरिका पर दबाव बनाए जिससे पूर्व के समझौते पर वापस लौटा जा सके।
  • ज्ञात हो कि यूरोपीय देश पहले ही अमेरिका के इस समझौते से एकतरफा बाहर निकलने के पक्ष में नहीं है तथा ईरान अमेरिका के मध्य उपजे तनाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
  • ऐसा माना जा रहा है कि ईरान का यह कदम विभिन्न राष्ट्रों को चेतावनी स्वरूप उठाया गया है कि यदि अमेरिका का रुख ईरान के प्रति नरम नहीं होता और वह ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधो से ईरान को राहत नहीं देता है तो ईरान इस समझौते को तोड़ सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी

(International Atomic Energy Agency-IAEA)

  • इस अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना वर्ष 1957 में परमाणु ऊर्जा तकनीक के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखकर की गई थी।
  • वर्तमान में इसके 171 राष्ट्र सदस्य है तथा इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में है।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य परमाणु ऊर्जा का शांति के लिये उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही यह परमाणु ऊर्जा के किसी भी ऐसे सैन्य उपयोग का विरोध करती है जिसमे परमाणु हथियार भी शामिल है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close