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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन

  • 25 Jan 2018
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?
भारत द्वारा 23 से 24 जनवरी के बीच तिरुवनंतपुरम में अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (International Dam Safety Conference), 2018 का आयोजन किया गया है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा केरल जल संसाधन विभाग (Kerala Water Resources Department -KWRD), केरल राज्य बिजली बोर्ड, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कालीकट एवं अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • बांध सुरक्षा सम्मेलनों का आयोजन झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु एवं उत्तराखंड के सात राज्यों में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं उन्नयन परियोजना (Dam Safety Rehabilitation and Improvement Project -DRIP) के तहत वार्षिक समारोह के रूप में किया जाता है।
  • इसके एक हिस्से के रूप में डीआरआईपी बांध सुरक्षा मुद्दों पर अधिक जागरूकता लाने तथा दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों, ज्ञान एवं उपलब्ध अनुभव के द्वारा उन पर ध्यान देने के लिये अनूठे समाधान ढूंढने जैसे कार्यों पर भी बल दिया जाता है।
  • बांध से संबंधित विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक तथा संबंधित उद्योग बांध सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्र होते हैं।
  • इसके अतिरिक्त इसके अंतर्गत नए बांधों के डिज़ाइन तथा निर्माण पर ध्यान देने के साथ-साथ वर्तमान बांधों के लिये आपदा कम करने संबंधी उपायों हेतु उनकी निगरानी, अनुवीक्षण, परिचालन, रख-रखाव, पुनर्वास के लिये भी विचारों, तकनीकों, माध्यमों और सामग्रियों को साझा किया जाता है।

लक्ष्य

  • 2100 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वर्ष 2012 में आरंभ होने वाली विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का लक्ष्य देश में ऐसे पुराने बांधों का पुनर्वास करना है जो खस्ताहाल हैं। 
  • इसके तहत ऐसे बांधों की संरचनागत सुरक्षा एवं परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने के संबंध में विचार-विमर्श किया जाता है।
  • इस परियोजना का लक्ष्य इस क्षेत्र में संस्थागत क्षमता एवं परियोजना प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है। 

“धर्मा” क्या है?

  • यह एक सॉफ्टवेयर कार्यक्रम “बांध स्वास्थ्य एवं पुनर्वास निगरानी अनुप्रयोग” (Dam Health and Rehabilitation Monitoring Application-DHARMA) है, इसे उक्त सम्मेलन के दौरान लॉन्च किया गया।
  • यह डीएचएआरएमए बांध से संबंधित सभी डाटा को व्यवस्थित रूप में डिजिटलाइज़ करने हेतु आरंभ किया गया एक वेब टूल है।
  • यह देश में बड़े बांधों से संबंधित प्रामाणिक परिसंपत्ति तथा स्वास्थ्य सूचना के प्रलेखन में मदद करेगा और आवश्यकता आधारित पुनर्वास सुनिश्चित करने में भी सक्षम बनाएगा।

बांध सुरक्षा पुनर्वास एवं उन्नयन परियोजना

  • विश्व बैंक की सहायता से भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय (Ministry of Water Resources) द्वारा डीआरआईपी (DAM REHABILITATION AND IMPROVEMENT PROJECT-DRIP) का क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह एक छह वर्षीय परियोजना है।

मुख्य

  • इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य देश के चार राज्यों केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु और बाद में कर्नाटक, उत्तराखंड और झारखंड के लगभग 223 बांधों के पुनर्वास और सुधार का कार्य करना है। 
  • वर्तमान में डीआरआईपी के तहत शामिल बांधों की संख्या 223 से बढ़कर 250 तक पहुँच गई है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • इस परियोजना के अंतर्गत नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देते हुए केंद्रीय और राज्य स्तरों पर बांध सुरक्षा मूल्यांकन और कार्यान्वयन के लिये संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर अधिक बल दिया गया है।
  • केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) के केंद्रीय बांध सुरक्षा संगठन (Central Dam Safety Organisation) द्वारा परियोजना के कार्यान्वयन के संबंध में समन्वय और पर्यवेक्षण का कार्य किया जाता है।

उद्देश्य

  1. चयनित मौजूदा बांधों और संबद्ध अनुप्रयोगों की सुरक्षा और प्रदर्शन में स्थाई तरीके से सुधार करना।
  2. सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्यों के साथ-साथ केंद्रीय स्तर पर बांध सुरक्षा संस्थागत व्यवस्था को मज़बूत बनाना।
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